दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के दौरान कैंपस में केवल चुनावी सरगर्मियां और प्रचार का शोर ही देखने को नहीं मिलता, बल्कि इसके पीछे एक बेहद व्यवस्थित और कड़ा प्रशासनिक ढांचा काम करता है. चुनाव के दौरान डाला गया प्रत्येक वोट EVM में सुरक्षित रूप से दर्ज हो जाता है. इसके बाद इन वोटिंग मशीनों को बेहद सुरक्षित माहौल में सील कर दिया जाता है, ताकि अगले दिन बिना किसी गड़बड़ी के मतगणना का काम पूरा किया जा सके. छात्र अक्सर इस बात को लेकर बेहद उत्सुक रहते हैं कि आखिर इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में वोटों की गिनती कैसे की जाती है और इसमें कितना समय लगता है.
पोलिंग बूथ से लेकर स्ट्रॉन्ग रूम तक का सफर
दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन और चुनाव आयोग की नियमावली के अनुसार, मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद से ही वोटों की सुरक्षा की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. 18 सितंबर 2026 को मतदान की समय सीमा समाप्त होते ही सभी कॉलेजों में पोलिंग एजेंटों की देखरेख में EVM को सील कर दिया जाता है. इसके बाद, दिल्ली पुलिस के कड़े सुरक्षा पहरे और नियुक्त पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में इन मशीनों को कॉलेजों से बाहर निकाला जाता है. इन सभी मशीनों को सुरक्षित तरीके से नॉर्थ कैंपस स्थित मुख्य काउंटिंग सेंटर यानी यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पस हॉल में पहुंचाया जाता है. रातभर इन सभी वोटिंग मशीनों को भारी सुरक्षा बलों की निगरानी में स्ट्रॉन्ग रूम के भीतर बंद रखा जाता है.
काउंटिंग की सुबह और स्ट्रॉन्ग रूम का खुलना
अगले दिन यानी शनिवार, 19 सितंबर 2026 को सुबह ठीक 8 बजे काउंटिंग सेंटर के दरवाजे खोले जाते हैं. स्ट्रॉन्ग रूम का ताला खोलने से पहले चुनाव अधिकारियों, प्रत्याशियों और उनके प्राधिकृत एजेंटों की मौजूदगी अनिवार्य होती है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. ताला खोलने के बाद केंद्रीय पैनल के चार प्रमुख पदों के लिए वोटों की गिनती का काम शुरू होता है. इन पदों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव शामिल हैं. वोटों की इस गिनती के साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के नए छात्र नेतृत्व का फैसला होने की उलटी गिनती शुरू हो जाती है.
राउंड-वाइज गिनती और पल-पल बदलते रुझान
DUSU चुनाव में मतों की गणना का काम व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग राउंड में किया जाता है. इस प्रक्रिया के तहत विभिन्न कॉलेजों और बूथों की मशीनों के आंकड़े एक-एक करके खोले जाते हैं और उन्हें मुख्य तालिका में जोड़ा जाता. हर एक राउंड की गिनती पूरी होने के बाद नए रुझान सामने आते हैं, जिससे उम्मीदवारों के बीच मुकाबला और भी रोमांचक हो जाता है. जैसे-जैसे आंकड़ों में बदलाव आता है, वैसे-वैसे काउंटिंग सेंटर के बाहर खड़े समर्थकों के बीच उत्सुकता और तनाव दोनों ही बढ़ने लगते हैं.
मतगणना की समय सीमा और नतीजों का अंतिम ऐलान
आमतौर पर इस पूरी मतगणना प्रक्रिया को संपन्न होने में लगभग 4 से 6 घंटे या उससे अधिक का समय लग सकता है. समय का यह अनुमान इस बात पर निर्भर करता है कि कुल कितना प्रतिशत मतदान हुआ है और तकनीकी रूप से सभी आंकड़ों का मिलान करने में कितना वक्त लग रहा है. दोपहर होते-होते चुनावी मुकाबले की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाती है कि कौन सा उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए है. सभी राउंड के मुहरबंद आंकड़ों के अंतिम सत्यापन के बाद, मुख्य चुनाव अधिकारी आधिकारिक रूप से विजयी उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते हैं. इस घोषणा के साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी को अपनी नई छात्र सरकार मिल जाती है.














