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लाइव: संसद मानसून सत्र चौथा दिन: NEET पेपर लीक विवाद पर विपक्ष के स्थगन प्रस्तावों से हंगामा बरकरार — 23 जुलाई 2026लाइव
23 जुल॰ 2026, 11:06 am (45 दिन पहले)· 3

लाइव: संसद मानसून सत्र चौथा दिन: NEET पेपर लीक विवाद पर विपक्ष के स्थगन प्रस्तावों से हंगामा बरकरार — 23 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन विपक्ष के भारी विरोध प्रदर्शनों के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही को बिना किसी कामकाज के दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ा। जहां एक ओर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने विपक्षी दलों पर NEET मुद्दे पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग फिर दोहराई।

भारतीय संसद के मानसून सत्र का चौथा दिन, जो गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को आयोजित हुआ, पूरी तरह से एक अभूतपूर्व विधायी गतिरोध और पंगुता का शिकार हो गया। सदन के भीतर पूरे दिन देशव्यापी परीक्षा संकट की गूंज बहुत ही उग्र रूप में सुनाई देती रही। एकजुट विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक ही मांग पर अपना पूरा जोर लगा दिया—नीट (NEET) पेपर लीक जैसे बड़े घोटाले को रोकने में मिली प्रशासनिक विफलता के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपना इस्तीफा सौंपना चाहिए। विपक्ष के इस कड़े और अडिग रुख के कारण संसद में किसी भी तरह का कोई भी विधायी कामकाज नहीं हो सका। जिस दिन को महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मांगने और जरूरी विधेयकों को पारित करने के लिए तय किया गया था, वह दिन केवल तीव्र राजनीतिक टकराव के एक बड़े अखाड़े में तब्दील होकर रह गया। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों ही सदनों में लगातार शोर-शराबा, नारेबाजी और बार-बार होने वाले आकस्मिक स्थगन का एक अंतहीन सिलसिला देखने को मिला। इस पूरे घटनाक्रम ने देश के शैक्षिक बुनियादी ढांचे के प्रबंधन को लेकर सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दल के बीच पैदा हुई गहरी दरार और अविश्वास को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। यह गतिरोध कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह देश भर के उन लाखों छात्रों के गुस्से और हताशा का सीधा प्रतिबिंब है, जो मानते हैं कि इस प्रशासनिक चूक ने उनके सुरक्षित भविष्य की उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है। विपक्ष ने अपने संसदीय अधिकारों का पूरा इस्तेमाल करते हुए सत्ता पक्ष पर चौतरफा दबाव बनाने की रणनीति अपनाई, जिससे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का सर्वोच्च विधायी मंच पूरे दिन के लिए पंगु बन गया।

हंगामे की भेंट चढ़ी संसद की निर्धारित कार्यसूची

राजधानी में इस बड़े राजनीतिक तूफान के आने से पहले, संसद के दोनों सदनों के लिए आधिकारिक कार्यसूची बहुत ही सावधानीपूर्वक तैयार की गई थी। बांटी गई कार्यसूची के अनुसार, दिन की शुरुआत अति-महत्वपूर्ण प्रश्नकाल के साथ होनी थी। यह एक ऐसी बुनियादी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है जहां सांसद विभिन्न मंत्रियों से सीधे सवाल पूछकर कार्यपालिका की जवाबदेही तय करते हैं। इसके बाद, लोकसभा में मंगलवार, 22 जुलाई 2026 की संशोधित सूची से बचे हुए उन सरकारी कामों को उठाया जाना था, जो पिछले व्यवधानों के कारण पूरे नहीं हो पाए थे। प्रशासन की नीतियों को लागू करने के लिए यह बचा हुआ विधायी कार्य बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा था। इसी तरह, राज्यसभा का कार्यक्रम भी बिल्कुल इसी ढांचे पर आधारित था, जिसमें प्रश्नकाल और उसी मंगलवार के सत्र से अधूरी रह गई सरकारी बहसों को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दी गई थी। हालांकि, परीक्षा लीक मामले को लेकर विपक्ष के गुस्से का स्तर इतना ज्यादा था कि पीठासीन अधिकारियों के अपनी-अपनी कुर्सी पर बैठते ही यह सावधानी से बनाई गई पूरी कार्यसूची चंद मिनटों में ही दरकिनार कर दी गई। पूरा का पूरा ध्यान केवल शिक्षा मंत्रालय से जवाबदेही मांगने और मंत्री के इस्तीफे पर केंद्रित हो गया, जिससे सारे जरूरी काम ठप पड़ गए। इस गतिरोध ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक छात्रों के भविष्य से जुड़े इस ज्वलंत मुद्दे का कोई ठोस राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक सरकार के लिए अपने किसी भी अन्य विधायी एजेंडे को आगे बढ़ा पाना लगभग असंभव साबित होगा।

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विपक्ष की सुबह की अहम रणनीतिक बैठक

आज की कार्यवाही की गंभीरता को भली-भांति समझते हुए, विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेताओं ने संसद सत्र की घंटी बजने से काफी पहले ही एक उच्च-स्तरीय रणनीतिक बैठक बुलाई। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय राजनीति के कुछ सबसे प्रमुख चेहरों ने हिस्सा लिया, ताकि वे सदन के पटल पर अपने समन्वय को अंतिम रूप दे सकें। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव इस बैठक में शामिल हुए। उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ रणनीतिकार जयराम रमेश और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की मुखर सांसद सुप्रिया सुले भी मौजूद थीं। सुबह-सुबह हुए इस जमावड़े का स्पष्ट उद्देश्य सरकार के खिलाफ एक एकजुट और अभेद्य मोर्चा पेश करना था। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग आज की राजनीतिक चर्चा के बिल्कुल केंद्र में रहे। अपनी रणनीति को एक दिशा में लाकर, इन नेताओं ने यह तय किया कि विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्य सदन में एक ही सुर में अपनी मांगें उठाएंगे, जिससे पीठासीन अधिकारियों और सत्ताधारी प्रशासन पर अधिकतम दबाव बनाया जा सके। यह बैठक इस बात का साफ संकेत थी कि पूरा इंडिया (INDIA) गठबंधन इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के मूड में है और वे सरकार को किसी भी कीमत पर आसानी से बच निकलने का कोई रास्ता नहीं देने वाले हैं।

स्थगन प्रस्तावों के जरिए विपक्ष का विधायी हमला

विपक्ष के मौखिक विरोध को तुरंत उन औपचारिक संसदीय प्रस्तावों का भी साथ मिला, जिन्हें सभी नियमित कार्यवाहियों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया था। निचले सदन में इस विधायी हमले का नेतृत्व कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद केसी वेणुगोपाल ने किया। उन्होंने लोकसभा में एक कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस विधिवत रूप से पेश किया। इस कदम का स्पष्ट उद्देश्य सभी पूर्व-निर्धारित सरकारी कामों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करना था, ताकि सदन अपना पूरा ध्यान देश की परीक्षा प्रणाली में आए उस गंभीर संकट पर केंद्रित कर सके, जिसने लाखों युवाओं को प्रभावित किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि वेणुगोपाल का प्रस्ताव केवल प्रशासनिक विफलता के विरोध तक सीमित नहीं था; इसमें 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुई हालिया घटनाओं को भी प्रमुखता से उठाया गया, जहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की थी। उन्होंने व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे युवाओं को बलपूर्वक तितर-बितर किए जाने पर तुरंत जवाबदेही तय करने की मांग की। इसी बीच, उच्च सदन में कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने राज्यसभा में भी बिल्कुल इसी तरह का कार्यस्थगन नोटिस पेश करके इसी रणनीति को दोहराया। सुरजेवाला की मांग भी लोकसभा जैसी ही थी, जिसमें पेपर लीक, छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई और देश भर में शैक्षिक सुधारों की भारी आवश्यकता पर एक समर्पित बहस का आह्वान किया गया था। इन प्रस्तावों के जरिए विपक्ष ने यह कानूनी रूप से दर्ज करा दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में छात्रों के हितों से बड़ा कोई और मुद्दा संसद में चर्चा के लायक नहीं है।

हंगामे की भेंट चढ़ा लोकसभा का सुबह का सत्र

जैसे ही घड़ी ने तय समय का इशारा किया और लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, सदन के भीतर का तनाव तुरंत एक बड़े हंगामे में बदल गया। जिस पल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपनी कुर्सी संभाली और औपचारिक रूप से प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की, निचले सदन में भारी शोर-शराबा होने लगा। विपक्षी सदस्य अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे और पीछे हटने से साफ इनकार करते हुए तुरंत सदन के वेल में आ गए। उन्होंने परीक्षा संकट को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इस कानफोड़ू शोर के कारण कोई भी सवाल या मंत्री का जवाब सुनना पूरी तरह से असंभव हो गया। सत्र को बचाने की कोशिश में, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आंदोलनकारी सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने की बार-बार और गंभीर अपील की। उन्होंने हंगामे के बीच सभी सत्ताधारी और विपक्षी सदस्यों से अनुरोध किया कि वे पहले प्रश्नकाल में भाग लें और फिर सदन के स्थापित नियमों के दायरे में रहकर इस विषय पर एक व्यवस्थित बहस करें। हालांकि, उनकी इन अपीलों का किसी पर कोई असर नहीं हुआ। लगातार हो रहे हंगामे के कारण किसी भी तरह का विधायी काम असंभव हो गया, जिसके बाद अध्यक्ष के पास निचले सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए अचानक स्थगित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। अध्यक्ष की यह बेबसी इस बात का सबूत थी कि राजनीतिक भावनाएं संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं पर पूरी तरह से हावी हो चुकी थीं।

राज्यसभा में भी दिखा लोकसभा जैसा ही गतिरोध

उच्च सदन, यानी राज्यसभा के हालात भी लोकसभा में हो रहे हंगामे से बिल्कुल अलग नहीं थे। पीठासीन अधिकारी सी.पी. राधाकृष्णन ने दिन का कामकाज शुरू करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें तुरंत विपक्ष के एक समन्वित और कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। विपक्षी गठबंधन के सदस्य अपनी सीटों पर खड़े हो गए और जोर-जोर से नारेबाजी करते हुए मांग करने लगे कि परीक्षा लीक घोटाले और शिक्षा मंत्री के भविष्य पर चर्चा करने के लिए बाकी सभी कामकाज को किनारे रख दिया जाए। पीठासीन अधिकारी राधाकृष्णन ने सदस्यों से बार-बार सदन की गरिमा बनाए रखने और अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की विनती की, लेकिन इसके बावजूद शोर का स्तर लगातार बढ़ता ही गया। इस व्यवस्थित व्यवधान का मतलब था कि कोई भी दस्तावेज पटल पर नहीं रखा जा सका और कोई भी प्रारंभिक बयान नहीं दिया जा सका। यह महसूस करते हुए कि सदन का माहौल किसी भी तरह की संसदीय बहस या नियमित कामकाज के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है, पीठासीन अधिकारी राधाकृष्णन को कार्यवाही को समय से पहले ही रोकना पड़ा। उन्होंने राज्यसभा को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया, जिससे संसद के दोनों सदनों में एक साथ विधायी पंगुता की स्थिति पैदा हो गई। राज्यसभा, जिसे अक्सर वरिष्ठों और गंभीर विचार-विमर्श का सदन माना जाता है, वहां भी इस तरह का उग्र गतिरोध इस बात का स्पष्ट प्रमाण था कि विपक्ष इस मुद्दे को कितनी गहराई से ले रहा है।

मकर द्वार पर सत्ता पक्ष और विपक्ष का आमने-सामने प्रदर्शन

स्थगन के कारण विधायी कक्षों के खाली होने के बाद, यह राजनीतिक लड़ाई संसद परिसर के भीतर स्थित प्रतिष्ठित मकर द्वार पर पहुंच गई। यहां विरोध प्रदर्शनों का एक बेहद स्पष्ट और नाटकीय टकराव देखने को मिला। विपक्ष की ओर से इस मोर्चे का नेतृत्व कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किया, जो एकजुटता का एक मजबूत संदेश देने के लिए आंदोलनकारी सदस्यों के साथ आकर खड़ी हो गईं। इस विरोध प्रदर्शन में इंडिया (INDIA) गठबंधन के शीर्ष नेता मौजूद थे, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव शामिल थे। वे सभी एक साथ खड़े होकर तख्तियां लिए हुए थे और पेपर लीक घोटाले में जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे। हालांकि, विपक्ष का यह प्रदर्शन एकतरफा नहीं रहा। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों ने भी जवाबी मोर्चा खोलते हुए बिल्कुल उसी स्थान पर विपक्षी नेताओं के ठीक सामने अपना डेरा डाल लिया। सत्ताधारी गठबंधन के सदस्यों ने अपना खुद का उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप आमने-सामने का एक बेहद तनावपूर्ण गतिरोध पैदा हो गया। यह दृश्य उस कड़वे राजनीतिक विभाजन को स्पष्ट रूप से दर्शा रहा था जिसने वर्तमान संसदीय सत्र को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया है। लोकतंत्र के मंदिर के ठीक बाहर दोनों पक्षों का यह शक्ति प्रदर्शन यह साबित कर रहा था कि कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है।

टीएमसी बगावत और निलंबन का भारी विवाद

एक तरफ जहां परीक्षा संकट ने पूरे माहौल को गर्म कर रखा था, वहीं मकर द्वार पर सत्ताधारी गठबंधन के सांसद एक अलग और बेहद संवेदनशील आंतरिक संसदीय विवाद को भी जोर-शोर से उठा रहे थे। उनका यह जवाबी विरोध प्रदर्शन विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ निर्देशित था। बनर्जी से जुड़ा यह विवाद एक बड़े राजनीतिक फेरबदल के कारण उपजा है, जिसमें हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने पार्टी छोड़कर अपने पूरे धड़े का नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया है। दल-बदल के इस बेहद अस्थिर और तनावपूर्ण माहौल के बीच, बनर्जी पर यह गंभीर आरोप लगा कि उन्होंने नवगठित गुट से जुड़ी महिला सांसदों के खिलाफ बहुत ही अभद्र और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। इस मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए, नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया की तीन महिला सांसदों—मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तिदार—ने सीधे लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में एक कड़ी शिकायत दर्ज कराई। इस गंभीर शिकायत पर त्वरित और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए, लोकसभा ने बुधवार, 22 जुलाई 2026 को कल्याण बनर्जी को मानसून सत्र की शेष पूरी अवधि के लिए निलंबित करने का आदेश पारित कर दिया। बनर्जी के इस निष्कासन ने संसद के पहले से ही गरमाए हुए माहौल में और ज्यादा आग में घी डालने का काम किया, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तीखा हो गया।

सरकार का चर्चा का प्रस्ताव और विपक्ष पर शर्तें थोपने का आरोप

लगातार हो रहे व्यवधानों के बीच, सरकार ने सदन के पटल पर अपना बचाव करने और अपना रुख स्पष्ट करने की भरपूर कोशिश की। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में कमान संभालते हुए मजबूती से यह बात रखी कि सत्ताधारी प्रशासन नीट (NEET) परीक्षा लीक मामले पर एक व्यापक चर्चा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि सरकार ने यह फैसला विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ लंबे विचार-विमर्श के बाद ही लिया है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस पार्टी, और विशेष रूप से विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे जानबूझकर इस प्रस्तावित बहस पर मनमानी शर्तें थोप रहे हैं। रिजिजू का तर्क था कि इस तरह की पूर्व-शर्तें रखना विपक्ष की असली मंशा को उजागर करता है, जो यह दर्शाता है कि वे वास्तव में कोई रचनात्मक चर्चा होने ही नहीं देना चाहते। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बिना मामले का राजनीतिकरण किए दोनों सदनों में एक स्वच्छ बहस को सुविधाजनक बनाने की पूरी इच्छा रखती है। विपक्ष से अपनी सभी शर्तें वापस लेने का आग्रह करते हुए, उन्होंने औपचारिक रूप से सभापति से इस बहस के लिए एक विशिष्ट समय निर्धारित करने का अनुरोध किया और घोषणा की कि सरकार उसी दिन इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। रिजिजू का यह रुख सरकार की उस रणनीति का हिस्सा था जिसमें वह यह साबित करना चाहती थी कि असल में विपक्ष ही सदन की कार्यवाही से भाग रहा है।

पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों पर प्रधानमंत्री का निर्देश

चूंकि संसदीय गतिरोध खत्म होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे थे, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधायी कक्षों के बाहर से एक बेहद महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) का सहारा लेते हुए, प्रधानमंत्री ने उस संकट पर सरकार के एक बड़े और निर्णायक कदम की घोषणा की जिसने छात्र समुदाय को गहराई से परेशान कर रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने परीक्षा पेपर लीक से संबंधित मामलों से निपटने के लिए विशेष रूप से फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का एक कड़ा फैसला लिया है। अपने बयान में, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन विशेष न्यायिक रास्तों का निर्माण इसलिए किया जा रहा है ताकि परीक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाने के दोषियों को बिना किसी देरी के त्वरित और कड़ी सजा दी जा सके, और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी सामान्य देरी को खत्म किया जा सके। उन्होंने आगे बताया कि संबंधित अधिकारियों और विभागों को इन अदालतों की स्थापना के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाने के सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हो रहे बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शनों के जवाब में प्रधानमंत्री की यह पहली सीधी सार्वजनिक टिप्पणी थी। उन्होंने इन फास्ट-ट्रैक अदालतों को देश के युवाओं की रक्षा करने और उन्हें तेजी से न्याय दिलाने के लिए एक आवश्यक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत किया। यह कदम सरकार की उस कोशिश को भी दर्शाता है जिसके तहत वह छात्रों के गुस्से को शांत कर उनका विश्वास दोबारा जीतना चाहती है।

दोपहर की कार्यवाही: बार-बार स्थगन का एक अंतहीन चक्र

जब घड़ियों में दोपहर के बारह बजे, तो गतिरोध टूटने की उम्मीद के साथ दोनों सदनों की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, लेकिन हकीकत इससे बहुत अलग साबित हुई। लोकसभा में, पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने कुर्सी संभाली, लेकिन उनका स्वागत विपक्ष की उसी अभेद्य नारेबाजी की दीवार से हुआ। इस शोरगुल के बीच, मंत्री किरेन रिजिजू ने अपनी सुबह की अपील को दोहराते हुए जोर देकर कहा कि सरकार बिना किसी पूर्व-शर्त के उचित समय पर पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सैकिया ने भी सदस्यों से संसदीय मर्यादा बनाए रखने की मार्मिक अपील की, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की लगातार उठ रही मांग ने उन्हें निचले सदन को फिर से दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करने पर मजबूर कर दिया। इसी बीच, राज्यसभा की कार्यवाही भी फिर से शुरू हुई। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार के दावों का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष बहस के लिए पूरी तरह से तैयार है। हालांकि, खरगे अपनी मांगों पर अडिग रहे; उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के पहले इस्तीफे पर जोर दिया और साथ ही मांग की कि सरकार पेपर लीक और परीक्षाओं के भारी दबाव से जुड़ी छात्रों की दुखद मौतों के संबंध में एक विस्तृत और आधिकारिक बयान जारी करे। खरगे के इस बयान ने सदन में फिर से भारी शोर-शराबे की लहर पैदा कर दी, जिसके चलते राज्यसभा को भी तुरंत दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। यह बार-बार का स्थगन इस बात का स्पष्ट संकेत था कि दोनों पक्षों के बीच संवाद के सारे रास्ते पूरी तरह से बंद हो चुके हैं।

सत्ता पक्ष का विपक्ष पर जोरदार पलटवार

लगातार रक्षात्मक मुद्रा में रहने से इनकार करते हुए, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्ष की रणनीतियों के खिलाफ एक बेहद आक्रामक पलटवार शुरू कर दिया। बीजेपी के लोकसभा सांसद संबित पात्रा ने तीखे शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी केवल सदन का कीमती समय बर्बाद करने के लिए एक नाटकीय दिखावा कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर यह गंभीर आरोप लगाया कि वे असल में उन्हीं मुद्दों से भाग रहे हैं जिनका वे समर्थन करने का दावा करते हैं। पात्रा ने अपनी पार्टी द्वारा उठाए गए सक्रिय कदमों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पिछले कुछ दिनों में, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आंदोलनकारी छात्रों और प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ अत्यंत गंभीर बातचीत की है। उन्होंने दावा किया कि इन चर्चाओं से एक स्पष्ट सहमति बनी है कि इस मुद्दे पर गहरे चिंतन और बेहद सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है। पात्रा का तर्क था कि कांग्रेस को ऐसे रचनात्मक समाधानों में कोई दिलचस्पी नहीं है और वह केवल राजनीतिक नौटंकी चाहती है। इस हमले को और तेज करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष युवाओं से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर गंदी राजनीति कर रहा है। उनका कहना था कि बहस को टालने के लिए नई-नई शर्तें गढ़कर, कांग्रेस अपनी पुरानी बाधा डालने वाली रणनीति पर लौट आई है। सीतारमण ने दावा किया कि विपक्ष इसलिए डर रहा है क्योंकि एक पारदर्शी बहस सरकार द्वारा की गई कड़ी कार्रवाइयों की सच्चाई को सामने ला देगी, जिससे उनके पास आंदोलन करने का कोई ठोस कारण ही नहीं बचेगा।

प्रधानमंत्री पर प्रियंका गांधी वाड्रा का तीखा प्रहार

राजनीतिक बयानबाजी तब अपने चरम बिंदु पर पहुंच गई जब कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुए व्यवहार को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बेहद व्यक्तिगत और तीखा हमला बोला। विशाल संसद भवन परिसर के भीतर मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए, उन्होंने प्रधानमंत्री की नेतृत्व शैली को लेकर एक बहुत ही कड़ा और आलोचनात्मक अंतर खींचा। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ प्रधानमंत्री मंगल ग्रह (Mars) पर जाने जैसी बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धियों का श्रेय लेने के लिए हमेशा सबसे आगे रहते हैं, वहीं अब यह बेहद जरूरी हो गया है कि वे उन प्रशासनिक फैसलों की पूरी जिम्मेदारी खुद लें जो देश के युवाओं के भविष्य को सक्रिय रूप से बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की सार्वजनिक छवि के दोहरेपन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया पर अक्सर बच्चों के प्रति गहरा स्नेह दिखाने वाले पोस्ट साझा करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ उसी प्रशासन का नेतृत्व करते हैं जिसने ठीक एक रात पहले शांतिपूर्ण छात्रों के खिलाफ पुलिस बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने और शारीरिक बल प्रयोग करने की पूरी अनुमति दे दी थी। अपनी आलोचना को और धार देते हुए, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश के लोकतांत्रिक इतिहास में कभी ऐसा नजारा देखने को मिला है जहां सत्ताधारी दल के सांसद खुद सदनों के बाहर खड़े होकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हों। लगातार हो रही संसदीय विफलताओं को सीधे उनके नेतृत्व का प्रतिबिंब बताते हुए, प्रियंका गांधी ने अंत में उन्हें एक बेहद कमजोर और डरपोक नेता करार दिया जो सदन को सुचारू रूप से चलाने में पूरी तरह से अक्षम है।

राज्यसभा में नियम 267 को लेकर अभूतपूर्व गतिरोध

उच्च सदन में होने वाले विधायी घर्षण का एक बहुत बड़ा हिस्सा नियम 267 नामक एक विशिष्ट संसदीय तंत्र के इर्द-गिर्द घूमता रहा। शिक्षा क्षेत्र में तत्काल सुधार की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हो रहे विशाल विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में, विभिन्न विपक्षी गुटों ने 22 जुलाई 2026 को राज्यसभा में नियम 267 के तहत एक औपचारिक नोटिस प्रस्तुत किया था। यह विशिष्ट नियम एक अत्यंत शक्तिशाली उपकरण है जो सदन के सभी सूचीबद्ध कामकाज को पूरी तरह से निलंबित करके अत्यधिक सार्वजनिक महत्व के किसी भी मामले को तुरंत उठाने की अनुमति देता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्ष के इस अडिग रुख को स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हुए घोषणा की कि परीक्षा संकट पर किसी भी तरह की बहस विशेष रूप से केवल इसी कड़े नियम के प्रावधानों के तहत होनी चाहिए। उन्होंने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने इस प्रक्रियात्मक मांग को मानने से साफ इनकार कर दिया है। खरगे ने आगे यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान सत्ताधारी दल के सदस्यों ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित वरिष्ठ नेताओं का सक्रिय रूप से अपमान किया। यह प्रक्रियात्मक गतिरोध एक बहुत बड़ा वैचारिक युद्धक्षेत्र बन गया, जहां समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने यह घोषणा करके इस नाकेबंदी को और मजबूत कर दिया कि यदि सरकार पेपर लीक की वास्तविकता को स्वीकार कर रही है, तो शिक्षा मंत्री को तुरंत प्रभाव से इस्तीफा देना ही होगा, और वह इस्तीफा सुरक्षित होने के बाद ही सदन में किसी भी प्रकार की बहस शुरू की जाएगी।

दिन भर के लिए स्थगन और उच्च स्तरीय आपात बैठकें

व्यवधानों का यह निरंतर चक्र अंततः दिन भर के लिए विधायी कामकाज के पूरी तरह से ठप होने पर समाप्त हुआ। लोकसभा में, पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया द्वारा नियम 377 के तहत मामलों को शुरू करने की हताश कोशिश के बावजूद, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्ष के कानफोड़ू नारों ने किसी भी तरह की प्रगति को पूरी तरह से असंभव बना दिया। यह नियम उन महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों को उठाने के लिए बनाया गया है जो अन्य प्रस्ताव श्रेणियों में फिट नहीं बैठते हैं। परिणामस्वरूप, निचले सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई, और अगली बैठक शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे के लिए निर्धारित की गई। राज्यसभा का हश्र भी बिल्कुल ऐसा ही हुआ। जब उच्च सदन दोपहर 3 बजे हरिवंश सिंह की अध्यक्षता में कुछ समय के लिए फिर से बुला लिया गया, तो उन्होंने सदस्यों से लगभग विनती करते हुए कहा कि वे कम से कम एक विधेयक पर विचार करने दें, उन्हें याद दिलाते हुए कि वे पहले ही कीमती चार दिन बर्बाद कर चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद, अराजकता बिल्कुल वैसी ही जारी रही। अंतिम स्थगन से ठीक पहले, मंत्री किरेन रिजिजू ने पूरी भावुकता के साथ सभापति से शिकायत की कि खरगे और उनके साथी जानबूझकर तथ्यात्मक बहस से बचने के लिए कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं। इस सब को नजरअंदाज करते हुए, खरगे ने छात्र समुदाय के साथ हुए गंभीर अन्यायों का विवरण देने वाला एक पत्र जोर-जोर से पढ़ना शुरू कर दिया। जैसे ही नारेबाजी अपने चरम पर पहुंची, हरिवंश सिंह ने हार मान ली और उच्च सदन को भी दिन भर के लिए स्थगित कर दिया। इस अभूतपूर्व संस्थागत पंगुता के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बंद कमरे की बैठक की, जो मौजूदा संसदीय संकट को दूर करने के लिए तत्काल उच्च स्तरीय विचार-विमर्श का एक स्पष्ट संकेत था।

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  1. राज्यसभा में नियम 267 क्या है? जानिए इसके बारे में

    शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच, विपक्षी दलों ने 22 जुलाई, 2026 को भारतीय संसद के उच्च सदन, राज्यसभा में नियम 267 के तहत एक नोटिस प्रस्तुत किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा अनिवार्य रूप से 'नियम 267' के अंतर्गत ही होनी चाहिए। CJP विरोध प्रदर्शन 2026: राज्यसभा में नियम 267 का क्या महत्व है?
  2. पीएम को अब अपने कदमों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए: प्रियंका गांधी

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों के प्रदर्शनों को लेकर गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री 'मंगल ग्रह पर जाने' का श्रेय तो ले लेते हैं, इसलिए अब समय आ गया है कि वे अपने फैसलों की जिम्मेदारी भी खुद स्वीकार करें। संसद भवन परिसर में मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर बच्चों के प्रति स्नेह दिखाते हैं, लेकिन ठीक एक रात पहले उन्होंने पुलिस को उन पर 'आंसू गैस छोड़ने और बल प्रयोग करने' की अनुमति दे दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश के लोकतांत्रिक इतिहास में कभी ऐसा देखा गया है कि सत्ताधारी दल के सांसद ही बाहर खड़े होकर विरोध कर रहे हों। उन्होंने कहा कि कई सत्रों से वे संसद की कार्यवाही चलाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह एक कमजोर और डरपोक नेता हैं। PTI
  3. गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से की मुलाकात

    संसद में NEET पेपर लीक मामले को लेकर विपक्षी दलों के लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ बैठक की। PTI
  4. रिजिजू ने खड़गे और विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- NEET चर्चा से बचने के लिए कर रहे हंगामा

    सदन के दिन भर के लिए स्थगित होने से ठीक पहले, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह से कहा कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी सांसद सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा संसद में इस मुद्दे पर औपचारिक चर्चा के लिए तैयार होने के बावजूद, विपक्ष NEET बहस से बचने के लिए ऐसा कर रहा है। नारेबाजी और लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच यह टिप्पणी उस समय आई जब खड़गे ने छात्रों के साथ हुई कथित नाइंसाफी को उजागर करने के लिए एक पत्र पढ़ना शुरू किया। उपसभापति हरिवंश सिंह ने सांसदों को शांत कराकर मर्यादा बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने सदन को स्थगित कर दिया। राज्यसभा की अगली बैठक अब शुक्रवार (24 जुलाई, 2026) को सुबह 11 बजे होगी।
  5. कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर राज्यसभा दिन भर के लिए स्थगित

    पीठासीन अधिकारी: हरिवंश सिंह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्ष के निरंतर हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बीच उपसभापति ने सदन की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया।
  6. विपक्ष युवाओं से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति कर रहा है: निर्मला सीतारमण

    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब सरकार NEET मुद्दे पर पूरी तरह से विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है, तब भी विपक्ष नई शर्तें रखकर संसदीय कार्यवाही में बाधा उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने कहा कि NEET और युवा छात्रों के भविष्य का सहारा लेकर कांग्रेस पार्टी वही कर रही है जिसके लिए वह जानी जाती है—सदन की कार्यवाही रोकना और चर्चा से बचना। उन्होंने दावा किया कि वे चर्चा नहीं चाहते क्योंकि बहस होने पर सच्चाई और सरकार द्वारा की गई कार्रवाई सबके सामने आ जाएगी। उनके पास अब आंदोलन का कोई ठोस कारण नहीं बचा है, इसलिए वे हंगामा कर रहे हैं।
  7. विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

    लगातार हो रहे व्यवधानों के कारण गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को लोकसभा की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने सदस्यों से मर्यादा बनाए रखने और सदन को सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। अब निचले सदन की अगली बैठक शुक्रवार (24 जुलाई, 2026) को सुबह 11 बजे होगी। दिलीप सैकिया ने लोकसभा के प्रक्रिया नियमों के नियम 377 के तहत मामलों को उठाने का प्रयास किया। यह नियम सांसदों को उन महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों को उठाने की अनुमति देता है जिन्हें प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव या अन्य प्रस्तावों के तहत नहीं उठाया जा सकता है। इसके बावजूद, विपक्षी सांसदों ने लगातार नारेबाजी जारी रखी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे।
  8. सदन शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए टली

    विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच उपसभापति हरिवंश सिंह ने राज्यसभा की बैठक को दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। उन्होंने सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने और गरिमा बनाए रखने का अनुरोध करते हुए कहा, "आज चौथा दिन है, आइए चर्चा के लिए एक विधेयक पर विचार करें। इसका मतलब यह है कि आप सदन को चलने देना नहीं चाहते हैं।"
  9. लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई

    दिलीप सैकिया इस समय सदन के पीठासीन अधिकारी के रूप में अध्यक्षता कर रहे हैं।
  10. किरेन रिजिजू का आरोप: शर्तें थोपकर NEET चर्चा से भागने की कोशिश कर रहा है विपक्ष

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे तरह-तरह की पूर्व-शर्तें रखकर NEET पेपर लीक मामले पर चर्चा से बचने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष द्वारा लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग किए जाने के बीच, रिजिजू ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि चर्चा के दौरान सरकार भी इस पूरे मुद्दे पर अपना पक्ष और दृष्टिकोण सामने रखना चाहती है।
  11. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही शुरू होगी चर्चा: अखिलेश यादव

    समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यदि सरकार पेपर लीक की बात को स्वीकार कर रही है, तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा, "इस्तीफा दिए जाने के बाद ही हम चर्चा की शुरुआत करेंगे।"
  12. हम नियम 267 के तहत चर्चा चाहते थे, लेकिन सरकार सहमत नहीं हुई: मल्लिकार्जुन खरगे

    राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "हम नियम 267 के तहत चर्चा कराना चाहते थे। लेकिन वे (सरकार) इसके लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने राहुल जी, प्रियंका जी और अन्य नेताओं का अपमान किया। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद ही हम किसी भी तरह की चर्चा के लिए तैयार होंगे।"
  13. 20 बागी सांसदों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर TMC सांसद कल्याण बनर्जी निलंबित

    लोकसभा ने बुधवार (22 जुलाई, 2026) को तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया। उन पर 'नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) की महिला सदस्यों के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है। इस पार्टी में तृणमूल के 20 बागी सांसदों ने अपने धड़े का विलय कर लिया था। NCPI की महिला सांसदों, जिनमें मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तिदार शामिल हैं, ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में इस संबंध में एक शिकायत दर्ज कराई थी।
  14. विपक्ष और राहुल गांधी का रवैया गैर-जिम्मेदाराना: भाजपा सांसद मनोज तिवारी

    "विपक्ष और राहुल गांधी गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार प्रदर्शित कर रहे हैं। ये लोग तख्तियां लेकर तो आते हैं लेकिन विषय पर चर्चा नहीं करते," भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने आज संसद में बार-बार हो रहे स्थगन के बीच कहा। उन्होंने आगे कहा, "आज हम सभी यह जानना चाह रहे हैं कि वे चर्चा से क्यों भाग रहे हैं। संसद में NEET पर बहस करें। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि हम फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करेंगे..."
  15. लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण आज लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
  16. रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष की शर्तों के बिना NEET पर चर्चा की अपील की

    प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी के बीच, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में भी वही बातें दोहराईं जो उन्होंने आज सुबह राज्यसभा में कही थीं, जिसमें उन्होंने NEET पेपर लीक पर चर्चा के लिए सरकार की तैयारी की बात कही थी। पीठासीन अधिकारी सैकिया ने सदस्यों से मर्यादा बनाए रखने और "बिना किसी पूर्व शर्त के उचित समय पर" चर्चा होने देने का आग्रह किया।
  17. राज्यसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित

    उच्च सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने NEET पेपर लीक और उससे जुड़ी छात्रों की मौतों पर सरकार से एक आधिकारिक बयान जारी करने की भी मांग की। उनके इस वक्तव्य के तुरंत बाद, लगातार नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
  18. राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरू

    पीठासीन अधिकारी: सी.पी. राधाकृष्णन
  19. लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू

    पीठासीन अधिकारी: दिलीप सैकिया
  20. चर्चा से बचने के लिए शर्तें न थोपें: रिजिजू ने विपक्षी दलों से कहा

    विपक्ष के हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार NEET पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए तैयार होने के बावजूद चौथे दिन की कार्यवाही को बाधित किया गया। "हमने कई विपक्षी दलों से बातचीत की थी। लेकिन बाद में उन्होंने मनमाने ढंग से शर्तें थोपना शुरू कर दिया। आज प्रधानमंत्री मोदी ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे भारत के युवाओं के साथ खड़े हैं।" उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्षी नेताओं को सद्बुद्धि आएगी। उन्होंने आगे कहा, "यह समय एक साथ आने और आगे उठाए जाने वाले कदमों को तय करने का है। संसद इस पर चर्चा करने का सही और उचित मंच है। बहस से बचने के लिए शर्तें न थोपें। ऐसा लगता है कि वे बहाने ढूंढ रहे हैं।" शोभना के. नायर की रिपोर्ट।
  21. कांग्रेस सदन में चर्चा नहीं चाहती; वह सिर्फ राजनीति करना चाहती है: भाजपा सांसद

    संसद परिसर के भीतर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस सदन में चर्चा नहीं चाहती है। "कांग्रेस बैनर लेकर प्रदर्शन करके सदन का समय भी बर्बाद करती है। यह पार्टी उन मुद्दों से भागती है जिन पर चर्चा की जानी चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "पिछले 2-3 दिनों में भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष JP Nadda ने छात्रों और सोनम वांगचुक से बातचीत की। इस बातचीत से एक बात निकलकर सामने आई कि पेपर लीक के मुद्दे पर गंभीर चिंतन होना चाहिए और सख्त कानून बनाए जाने चाहिए। लेकिन, कांग्रेस सदन में चर्चा नहीं चाहती; वह केवल राजनीति करना चाहती है।"
  22. संसद परिसर में INDI गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए खरगे और राहुल गांधी

    कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य नेता संसद परिसर के भीतर मकर द्वार पर INDI गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। NDA के सांसद भी ठीक उसी स्थान के सामने विपक्षी INDI गठबंधन के सांसदों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
  23. रिजिजू के बयान की पूरी जानकारी | पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करेगी सरकार: पीएम नरेंद्र मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को कहा कि सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का फैसला किया है। पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, "हमने पेपर लीक में शामिल लोगों को त्वरित और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का निर्णय लिया है।" NEET-UG पेपर लीक पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों से जुड़े उनके ये पहले सीधे कमेंट्स थे। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विभागों को इस संबंध में सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। पीएम मोदी ने युवाओं की रक्षा करने और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए पेपर लीक मामलों हेतु फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना की घोषणा की।
  24. राज्यसभा दोपहर 12 बजे तक स्थगित

    सदन की गरिमा बनाए रखने की बार-बार की गई अपीलों के बाद भी हंगामा न थमने पर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
  25. केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए: खरगे

    मंत्री किरेन रिजिजू को जवाब देते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आज सरकार के इस कदम पर प्रधानमंत्री का बयान "उकसाने वाला" है। खरगे ने कांग्रेस पार्टी के रुख को दोहराते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निश्चित रूप से इस्तीफा देना चाहिए।
  26. सरकार NEET मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार, लेकिन कांग्रेस ने शर्तें रख दी हैं: रिजिजू

    राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सभी दलों से बातचीत के बाद NEET पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा करने का फैसला किया था, लेकिन उच्च सदन में मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में कांग्रेस ने इस बहस के लिए "शर्तें रख दी हैं।" "शर्तें न रखें, यह आपकी मंशा को दर्शाता है कि आप चर्चा नहीं होने देना चाहते।" उन्होंने "मामले का राजनीतिकरण किए बिना" दोनों सदनों में चर्चा कराने की सरकार की मंशा पर भी जोर दिया। रिजिजू ने पेपर लीक में शामिल लोगों को त्वरित और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा का उल्लेख किया। राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी यह उनकी पहली सीधी टिप्पणी थी। "बिना किसी शर्त के, मैं सभापति से समय तय करने का अनुरोध करता हूं और हम आज ही चर्चा के लिए तैयार हैं।"
  27. भारी शोर-शराबे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित

    सदन को सुचारू रूप से चलाने की बार-बार अपील करने के बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा: "मैं सरकार और विपक्ष के सभी सांसदों से अनुरोध करता हूं कि वे प्रश्नकाल के बाद आएं और सदन के नियमों के दायरे में रहकर इस विषय पर चर्चा करें।" लगातार जारी हंगामे के बाद निचले सदन की कार्यवाही आज दोपहर 12 बजे तक के लिए टाल दी गई है।
  28. लोकसभा में आज की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा

    जैसे ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज के प्रश्नकाल की शुरुआत करने की घोषणा की, वैसे ही निचले सदन में भारी शोर-शराबा शुरू हो गया।
  29. दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले रणनीति तैयार करने के लिए मिले INDIA ब्लॉक के सांसद

    संसद में आज के मानसून सत्र की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले विपक्षी सांसदों ने एक अहम बैठक की, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता जयराम रमेश और NCP(SP) सांसद सुप्रिया सुले शामिल थे। WhatsApp Image 2026-07-23 at 10.44.53.jpeg WhatsApp Image 2026-07-23 at 10.44.53 (1).jpeg तस्वीर सौजन्य: विशेष व्यवस्था
  30. दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने दिया कार्यस्थगन का नोटिस

    संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन की शुरुआत में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का एक नोटिस पेश किया है। उन्होंने देश की परीक्षा प्रणाली में जारी "गंभीर संकट" पर चर्चा करने और 20 जुलाई को जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाने के लिए नियमित कामकाज को निलंबित करने की मांग की है। इस बीच, कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने राज्यसभा में NEET पेपर लीक, प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई और देश के शिक्षा सुधारों पर चर्चा करने की मांग को लेकर कार्यस्थगन का नोटिस दिया है। PTI
  31. मकर द्वार पर NDA और INDIA ब्लॉक के सांसदों ने एक-दूसरे के खिलाफ किया प्रदर्शन

    देशभर में परीक्षा पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, कई विपक्षी सांसदों ने गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को संसद परिसर के मकर द्वार के पास एकत्रित होकर प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग दोहराई। इस प्रदर्शन में विपक्षी सांसदों के साथ कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी शामिल हुईं। दूसरी तरफ, सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने भी जवाबी मोर्चा खोलते हुए TMC सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ प्रदर्शन किया। कल्याण बनर्जी को दो महिला सांसदों के खिलाफ कथित रूप से अमर्यादित टिप्पणी करने के कारण सदन से निलंबित किया गया है।
  32. राज्यसभा के लिए आज की कार्यसूची की जानकारी

    प्रश्नकाल और मंगलवार, 22 जुलाई, 2026 की संशोधित कार्यसूची में शामिल ऐसे सरकारी कामकाज पर विचार करना जो उस दिन संपन्न नहीं हो पाए थे।
  33. लोकसभा के लिए आज की कार्यसूची

    प्रश्नकाल और मंगलवार, 22 जुलाई, 2026 की संशोधित कार्यसूची में दर्ज उन सरकारी कामों पर चर्चा जो उस दिन पूरी नहीं हो सकी थी।

सवाल-जवाब

संसद के मानसून सत्र में आज कामकाज क्यों ठप रहा?
विपक्ष नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा, जिसके कारण हुए भारी हंगामे से संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही पूरी तरह से ठप रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामले में क्या बड़ा ऐलान किया है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार ने पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों को त्वरित और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का फैसला किया है।
मकर द्वार पर किन प्रमुख नेताओं ने एक साथ प्रदर्शन किया?
मकर द्वार पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत इंडिया गठबंधन के कई दिग्गज नेताओं ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को किस मामले में निलंबित किया गया?
कल्याण बनर्जी को एनसीपीआई (NCPI) की तीन महिला सांसदों के खिलाफ कथित अमर्यादित टिप्पणी करने की शिकायत के बाद मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया है।
संसद में नियम 267 क्या है और विपक्ष इसकी मांग क्यों कर रहा था?
राज्यसभा में नियम 267 के तहत नियमित कामकाज को रोककर किसी अति महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे पर तुरंत चर्चा की जाती है; विपक्ष छात्रों के हित में नीट मामले पर इसी नियम के तहत तत्काल बहस चाहता था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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