मध्य पूर्व में सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर एक साथ बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ओमान के रणनीतिक तटीय इलाके में होर्मुज़ जलडमरूमध्य के भीतर मालवाहक जहाजों पर हमले और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाए जाने के बाद फारस की खाड़ी में सुरक्षा संकट गंभीर हो गया है। एक तरफ यमन के तटीय क्षेत्र में भारतीय व्यावसायिक पोत के डूबने और सऊदी अरब के हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले से क्षेत्रीय तनाव चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ वाशिंगटन, तेहरान और अन्य क्षेत्रीय देशों के बीच वार्ता के दावों को लेकर स्थिति विरोधाभासी बनी हुई है। ओमान, कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक पोतों पर हमले और समुद्री सुरक्षा चिंताएं
ब्रिटिश समुद्री संस्था UKMTO के आधिकारिक ब्योरे के मुताबिक मंगलवार, 4 अगस्त को ओमान के अल खसाब तट से लगभग 20 नॉटिकल मील अर्थात 37 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रक्षेप्य से मार की गई। जिस जहाज को निशाना बनाया गया, उसकी पहचान तुरंत उजागर नहीं की गई है, लेकिन चालक दल की सूचना के बाद संबंधित प्राधिकारियों ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। इस घटना में नुकसान या हताहतों की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया जारी है।
इसी दौरान यमन के तटीय जलक्षेत्र के पास एक अन्य गंभीर घटना घटी, जहां प्रक्षेप्य टकराने के बाद एक भारतीय मालवाहक पोत असंतुलित होकर समुद्र में डूब गया। भारत के जहाजरानी मंत्री ने सामाजिक मीडिया मंच X पर इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यमन के तट रक्षक बल ने तुरंत राहत अभियान चलाकर जहाज पर सवार सभी 14 भारतीय नाविकों को सकुशल बाहर निकाल लिया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पर मंडराता खतरा अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। युद्धविराम टूटने के बाद ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी नाकेबंदी को नए सिरे से लागू कर दिया है। जलमार्ग से गुजरने का प्रयास करने वाले कई पोतों पर गोलीबारी की गई है और आवाजाही को अवरुद्ध करने के लिए सुरक्षा चौकियां सख्त कर दी गई हैं।
हालाँकि, तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ओमान और ईरान के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक सुरक्षा तंत्र पर सहमति बनती दिख रही है। प्रस्तावित योजना के तहत फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले पोत ईरानी नियंत्रण वाले जलीय मार्ग का इस्तेमाल करेंगे और वापसी के लिए ओमान द्वारा नियंत्रित मार्ग से बाहर निकलेंगे। पर्यावरण संरक्षण और समुद्री सुरक्षा प्रदान करने के बदले सेवा शुल्क वसूलने का प्रावधान रखा गया है, बशर्ते अमेरिकी पक्ष ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकेबंदी को हटाने पर राजी हो जाए।
कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला और क्षेत्रीय सैन्य टकराव
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जारी अशांति के बीच कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर एक भीषण सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया गया। प्राप्त ब्योरे के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत में बने अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाने के लिए कम से कम 3 ड्रोन का इस्तेमाल किया। इस हमले के तुरंत बाद कुवैत और ईरान से सटे इराक के बसरा प्रांत में भारी विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं। ईरानी प्रसारण सेवाओं ने पुष्टि की है कि हमले के चलते कुवैती ठिकाने के परिसर में भीषण आग लग गई।
सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। यमन के हूती लड़ाकों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि उनके ड्रोन दस्तों ने सऊदी अरब के नजरान एयरपोर्ट स्थित संवेदनशील ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। हूती प्रवक्ता के अनुसार यह कार्रवाई सादा और हज्जा प्रांतों के ऊपर सऊदी ड्रोन उड़ानों के जवाब में की गई है। इस हमले के बाद सऊदी अधिकारियों ने नजरान हवाई अड्डे पर सभी प्रकार के उड़ानों का परिचालन तुरंत रोक दिया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब सऊदी कच्चे तेल के निर्यात पर हूतियों द्वारा घोषित नाकेबंदी के बाद दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और हवाई हमले तेज हो गए हैं।
तमाम सैन्य कार्रवाइयों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियान ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि तेहरान केवल अपनी क्षेत्रीय सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा कर रहा है और उसका इरादा जंग को व्यापक पैमाने पर फैलाने का बिल्कुल नहीं है।
वाशिंगटन और तेहरान के परस्पर विरोधी दावे एवं कूटनीतिक प्रयास
कूटनीतिक पटल पर अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार, 3 अगस्त को वाशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में वार्ताकारों और मीडिया से बातचीत में दावा किया कि तेहरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत की प्रक्रिया जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति को ईरान के लिए एक बेहद गंभीर मोड़ बताते हुए कहा कि यह सिर कलम से पहले आखिरी मौका है। उन्होंने आगे कहा कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों के विशेष अनुरोध पर उन्होंने बातचीत का यह रास्ता खुला रखा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। इस्माइल बक़ाई ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन के साथ सीधे तौर पर कोई भी चर्चा नहीं हो रही है। ईरान वर्तमान में केवल ओमान के साथ वार्ता में शामिल है, जिसका एकमात्र केंद्र बिंदु होर्मुज़ जलडमरूमध्य में पोतों की सुरक्षित आवाजाही को बहाल करना है।
दूसरी ओर, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक टीवी साक्षात्कार में उम्मीद जताई कि बुधवार, 5 अगस्त तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने के लिए एक अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो सकते हैं। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य जलडमरूमध्य से व्यावसायिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही की गारंटी हासिल करना है ताकि वैश्विक ऊर्जा दरों में स्थिरता लाई जा सके।
मध्य पूर्व में जारी इस गंभीर गतिरोध को सुलझाने के लिए कतर, ओमान और पाकिस्तान की ओर से बहुपक्षीय प्रयास किए जा रहे हैं। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने पुष्टि की है कि तीनों देश दोनों पक्षों के बीच संदेशों और समझौतों के मसौदे का आदान-प्रदान कराने में समन्वय स्थापित कर रहे हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची को त्वरित चर्चा के लिए इस्लामाबाद आने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है।
लेबनान और इजराइल के बीच रोम में वार्ता तथा हिज़बुल्लाह का विरोध
क्षेत्रीय संघर्ष के एक अन्य महत्वपूर्ण केंद्र लेबनान में भी कूटनीतिक खींचतान जारी है। अमेरिका की देखरेख में लेबनानी और इजराइली प्रतिनिधियों के बीच इटली की राजधानी रोम स्थित अमेरिकी दूतावास में नए दौर की प्रत्यक्ष बातचीत मंगलवार से शुरू हुई, जो गुरुवार तक चलने वाली है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य जून में वाशिंगटन में हुए पिछले समझौते के आधार पर दक्षिणी लेबनान से इजराइली सैन्य टुकड़ियों की चरणबद्ध वापसी तय करना है। पूर्व समझौते में हिज़बुल्लाह का निरस्त्रीकरण और पायलट क्षेत्रों में लेबनानी सेना की तैनाती शामिल थी।
रोम वार्ता का कड़ा विरोध करते हुए हिज़बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने एक टेलीविजन संबोधन में कहा कि लेबनान और इजराइल के बीच सीधे बातचीत से देश के लिए अपमान और लगातार समझौतों के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा। नईम कासिम ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन की तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह एक निष्पक्ष नेता के बजाय पक्षपाती रुख अपना रहे हैं, जो देश के राष्ट्रीय हितों के विपरीत है।
वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता और कीमतों की प्रतिक्रिया
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव और सैन्य हमलों की खबरों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजारों में देखने को मिला है। पिछले कारोबारी सत्र में 7 प्रतिशत तक टूटकर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद मंगलवार, 4 अगस्त को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की रिकवरी दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड के अग्रिम महीने के वायदा अनुबंध 0055 GMT पर 0.62 डॉलर अर्थात 0.7 प्रतिशत की बढ़त लेकर 84.39 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए। इसी तरह अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 0.61 डॉलर यानी 0.7 प्रतिशत सुधरकर 80.95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि इससे पहले के सत्र में इसमें 5 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आई थी। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला कोई ठोस कूटनीतिक समझौता अमलीजामा नहीं पहन लेता, तब तक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान की आशंकाएं बनी रहेंगी।



















