पश्चिम एशिया में जंग एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी सेना ने लगातार चौथे दिन ईरान पर हवाई हमले किए और उसके बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है। इसके जवाब में ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन के अल-अजराक बेस और कुवैत के मीना अब्दुल्ला में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए, जबकि बहरीन में तैनात अमेरिकी पांचवें बेड़े को भी निशाना बनाने का दावा किया गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर तेहरान बातचीत की मेज पर नहीं लौटा, तो अगले हफ्ते अमेरिकी हमलों का दायरा बढ़ाकर ईरान के पावर स्टेशनों और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। इस बीच जॉर्डन, कुवैत और बहरीन तीनों ने दावा किया कि उन्होंने ईरान के हवाई हमलों को नाकाम कर दिया, और अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार पर नए प्रतिबंध भी जड़ दिए हैं।
अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी और ट्रंप की सख्त चेतावनी
अमेरिकी सैन्य बलों ने लगातार चौथे दिन ईरान पर हवाई हमले किए और देश के बंदरगाहों पर जहाजों के आवागमन को रोकने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू कर दी है। यह नाकेबंदी पहली बार अप्रैल के मध्य में लगाई गई थी और फिर जून के मध्य में हटा ली गई थी, ठीक उस अंतरिम समझौते पर दस्तखत के एक दिन बाद जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था। लेकिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हिंसा तेज होने के साथ ही यह बातचीत पूरी तरह ठप पड़ गई और अमेरिका को नाकेबंदी दोबारा लागू करनी पड़ी। यह नाकेबंदी सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करती है, क्योंकि ईरान के बंदरगाहों से गुजरने वाला तेल कारोबार दुनिया भर की रिफाइनरियों और बाजारों तक पहुंचता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारी टैक्स लगाने की अपनी पुरानी धमकी वापस ले ली है, लेकिन साथ ही उन्होंने एक नई और सख्त चेतावनी दी है। फॉक्स न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “अगला हफ्ता उनके लिए बेहद खराब साबित होगा क्योंकि अगले हफ्ते बिजलीघरों और पुलों की बारी है। जब तक वे बातचीत की मेज पर नहीं आते, हम उनके सारे बिजलीघर और पुल उड़ा देंगे।” उसी साक्षात्कार में उन्होंने इस धमकी को दोहराते हुए यह भी कहा कि अगला हफ्ता तेहरान के लिए बेहद बुरा साबित होने वाला है, क्योंकि अगले हफ्ते बिजलीघरों की बारी आएगी और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। यानी अगर तेहरान बातचीत के लिए राजी नहीं होता, तो अमेरिका अपने हमलों का दायरा बढ़ाकर ईरान के बिजली ढांचे और पुलों तक ले जाएगा, जिससे आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी, बिजली आपूर्ति और आवागमन पर सीधा असर पड़ सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने भी स्पष्ट किया कि इन हालिया हमलों का मकसद खाड़ी क्षेत्र के तेल और गैस के मुख्य शिपिंग मार्ग में नागरिक और व्यापारिक जहाजों पर हमले करने की ईरानी सैन्य क्षमता को नष्ट करना है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य सामान्य हालात में दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार के करीब पांचवें हिस्से की आवाजाही का रास्ता है। इस संकरे जलमार्ग पर दबदबे को लेकर अमेरिका और ईरान की खींचतान और हफ्तों से चले आ रहे ईरान के बदले के हमले मिलकर इस पूरे इलाके को एक बार फिर पूर्ण युद्ध की दहलीज़ पर ला खड़ा कर रहे हैं। एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अपने पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर यह संदेश देना चाहता है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
अमेरिका-ईरान जंग तेज होने और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के बाद बुधवार, 15 जुलाई 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी देखी गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सभी ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने और इसके जवाब में ईरान द्वारा क्षेत्र में अमेरिकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने से बाजार में हलचल मच गई। लगातार दूसरे सत्र में ब्रेंट क्रूड 12 जून के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर बंद हुआ, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI 15 जून के बाद के अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बुधवार सुबह के कारोबार में भी यह तेजी जारी रही, जो बताती है कि निवेशक इस टकराव को हल्के में नहीं ले रहे।
बुधवार को 0029 GMT तक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.46 डॉलर यानी 1.72 प्रतिशत बढ़कर 86.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 1.11 डॉलर यानी 1.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 80.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह उछाल इस बात का साफ संकेत है कि निवेशक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति में बड़ी रुकावट की आशंका को गंभीरता से ले रहे हैं, क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ईरान ने कबूला, जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर किया हमला
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बुधवार को जानकारी दी कि अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा देश पर किए गए हमलों के जवाब में, ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर अलग-अलग हमले किए हैं। सरकारी टीवी चैनल IRIB के मुताबिक ईरानी सेना ने जॉर्डन में स्थित अल-अजराक बेस को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। इसके अलावा रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत के मीना अब्दुल्ला में मौजूद एक अमेरिकी सैन्य लॉजिस्टिक्स सेंटर पर क्रूज मिसाइलें दागने की पुष्टि की। ईरान ने साफ कहा कि जब तक अमेरिका अपनी आक्रामक कार्रवाइयां पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद रहेगा। इससे साफ है कि ईरान अपने जवाबी हमलों का दायरा केवल अपनी सरहद तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उन देशों तक ले जा रहा है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
जॉर्डन ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को घोषणा की कि उसने अपने देश को निशाना बनाकर दागी गई तीन ईरानी मिसाइलों को हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। तेहरान द्वारा इस हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद यह बयान आया, ऐसे समय में जब अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों के विरोध में ईरान पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। जॉर्डन की सेना ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी साझा की।
बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े पर हमला, पूरे पश्चिम एशिया का ऊर्जा निर्यात ठप करने की धमकी
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बुधवार को दावा किया कि उसने बहरीन में मौजूद अमेरिकी पांचवें बेड़े के कमांड-एंड-कंट्रोल, लॉजिस्टिक्स, ईंधन और सैन्य उपकरण ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई हिंद महासागर में अमेरिकी गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नियंत्रित कर समुद्री रास्तों को बाधित करने की कोशिशों के जवाब में की गई है। गार्ड्स ने वॉशिंगटन को चेतावनी दी कि यदि उसने समुद्री मार्गों को नियंत्रित कर इस क्षेत्र के तेल और गैस निर्यात को रोकने की कोशिश की, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों से जुड़े अन्य शिपिंग मार्गों को भी बंद कर दिया जाएगा। गार्ड्स ने यह भी साफ किया कि इस क्षेत्र का ऊर्जा निर्यात या तो सभी के लिए सुलभ होगा या फिर किसी के लिए भी नहीं, यानी ईरान की धमकी सिर्फ अपने प्रतिद्वंद्वियों तक सीमित नहीं, बल्कि उन तीसरे देशों तक भी है जो इस रास्ते से तेल आयात-निर्यात करते हैं।
इसी कड़ी में ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने मंगलवार को भी धमकी दी थी कि अगर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही, तो पूरे पश्चिम एशिया से होने वाला ऊर्जा निर्यात बंद करा दिया जाएगा। यानी ईरान की धमकी अब सिर्फ अपने बंदरगाहों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के तेल-गैस कारोबार को बाधित करने तक पहुंच गई है, जिसका असर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे बड़े ऊर्जा निर्यातक देशों पर भी पड़ सकता है।
कुवैत और बहरीन ने भी नाकाम किए ईरानी हवाई हमले
खाड़ी के दो राजतंत्रों, कुवैत और बहरीन ने पुष्टि की कि उन्होंने ईरान की ओर से किए गए नए हवाई हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया, जबकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर कब्जे को लेकर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। कुवैत की सेना ने बताया कि उसने ईरान के हमलावर ड्रोनों को मार गिराया और इसे “ईरान की कुटिल आक्रामकता” करार दिया। इसके बाद बहरीन की सेना ने भी ऐलान किया कि उसने ईरान के कई हवाई हथियारों को रोककर नष्ट करने में सफलता हासिल की। सुबह के शुरुआती घंटों में बहरीन के गृह मंत्रालय ने चेतावनी के सायरन बजाए थे और नागरिकों तथा वहां रह रहे लोगों से शांत रहने और निकटतम सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की थी।
बहरीन डिफेंस फोर्स के जनरल कमांड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “ईरान अपने उस व्यवस्थित शत्रुतापूर्ण रवैये को जारी रखे हुए है, जिसके तहत वह आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले आपराधिक हमले करता है।” बयान में यह भी जोड़ा गया कि सेना ने उस सुबह ईरान के विश्वासघाती हवाई हमलों की एक बड़ी संख्या को रोकने और नष्ट करने में कामयाबी हासिल की। इस बीच ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बहरीन में तैनात अमेरिकी पांचवें बेड़े पर अलग-अलग पलटवार किया, यानी एक ही दिन में तीन खाड़ी देशों, जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में एक साथ तनाव भड़क उठा।
अमेरिकी सेना के नए हमले और बढ़ती हताहतों की संख्या
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान में दर्जनों सैन्य ठिकानों के खिलाफ एक नए हमले के अभियान के पूरा होने की घोषणा की। CENTCOM के मुताबिक अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोनों और नौसैनिक जहाजों ने सात घंटे तक चले इस अभियान में ईरान के मिसाइल व ड्रोन ठिकानों, नौसैनिक क्षमताओं और तटीय रक्षा प्रणालियों पर सटीक हथियार दागे, ताकि व्यावसायिक जहाजों और उनके चालक दल को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को और कमजोर किया जा सके। इससे पहले CENTCOM ने इन हमलों का मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईरानी क्षमताओं को नष्ट करना बताया था। अमेरिकी सशस्त्र बलों ने इसके अलावा दिन के उजाले में भी हमलों का एक नया दौर शुरू करने की घोषणा की, जो उनके सैन्य अभियान की रफ्तार और समय में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, क्योंकि पिछले कई दिनों के दौरान किए गए तमाम हमले अब तक केवल रात के वक्त ही अंजाम दिए जाते रहे थे।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को बताया कि रात के दौरान हुए अमेरिका के ताजा हवाई हमलों में 260 से अधिक लोग घायल हो गए। मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन करमानपुर ने यह जानकारी दी, हालांकि उन्होंने मृतकों की संख्या साझा नहीं की। यह घायलों की तादाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर वर्चस्व को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच अब तक हुई किसी भी मुठभेड़ से कहीं ज्यादा है। बाद में स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन करमानपुर ने यह भी बताया कि पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी हवाई हमलों में 35 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और कम से कम 72 लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। इससे पहले ईरान सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहजेरानी ने भी बताया था कि हाल के दिनों में अमेरिकी हवाई हमलों में 30 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि उन्होंने किस समयावधि का जिक्र किया, यह साफ नहीं हो सका। अमेरिका और इजराइल के साथ जारी इस जंग के दौरान ईरान ने अब तक हताहतों के पूरे आंकड़े केवल कभी-कभार ही सार्वजनिक किए हैं, जिससे असल नुकसान का सही अंदाजा लगाना मुश्किल बना हुआ है।
ईरान की सेना ने बुधवार को पुष्टि की कि रात के दौरान दक्षिण-पूर्वी शहर इरानशहर के निकट बम्पुर सैन्य अड्डे पर हुए अमेरिकी हमलों में कम से कम सात कर्मी मारे गए। सेना के मुताबिक यह हमला अधिकतम हताहत कराने के इरादे से किया गया था, जिसमें अड्डे के गेस्टहाउस, सुरक्षा चौकियों और आवासीय सुविधाओं पर 13 मिसाइलें दागी गईं। सेना ने बताया कि कई और जवान भी घायल हुए हैं और उसने इस हमले का “निर्णायक जवाब” देने का संकल्प जताया। इसके अलावा ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने बुधवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी बंदरगाह शहर बुशहर पर नए हमले किए, जहां ईरान का एकमात्र नागरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थित है, जिससे इस तरह के हमलों की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। शहर के गवर्नर मोहम्मद मोजफरी ने बताया कि बुधवार को अमेरिका ने बुशहर में तीन अलग-अलग जगहों पर हमला किया, जो एक दिन पहले उसी शहर पर हुए हमले के तुरंत बाद हुआ, जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है।
दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को यह दावा पूरी तरह नकार दिया कि उसके बलों ने ईरान में किसी नागरिक गेहूं भंडारण सुविधा को निशाना बनाया। सेना ने स्पष्ट किया कि सभी हमले ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों पर ही केंद्रित थे, जिनका मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजरानी पर तेहरान की आक्रामक क्षमता को कमजोर करना था, यानी अमेरिका बार-बार यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि उसके हमले सैन्य लक्ष्यों तक सीमित हैं, भले ही जमीन पर नागरिक हताहतों की खबरें लगातार आ रही हों।
अमेरिका ने ईरान के तेल व्यापार और डिजिटल करेंसी नेटवर्क पर प्रतिबंध बढ़ाए
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के पेट्रोलियम क्षेत्र पर प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ा दिया है, जिसमें खासतौर पर तेल टैंकर व्यापार के दिग्गज मोहम्मद हुसैन शमखानी के शिपिंग नेटवर्क को निशाना बनाया गया है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि विभाग ने ईरान के केंद्रीय बैंक से जुड़े डिजिटल वॉलेट में जमा 13 करोड़ डॉलर भी फ्रीज कर दिए हैं, यह वह क्षेत्र है जिसमें युद्ध शुरू होने के बाद से गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं, यानी ईरान युद्ध के खर्च और प्रतिबंधों की मार से बचने के लिए डिजिटल करेंसी का सहारा ले रहा है। ये कदम अमेरिकी सेना द्वारा लगातार चौथे दिन ईरान पर हमले करने और नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू करने के तुरंत बाद उठाए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के मुताबिक, ईरान ने इसके जवाब में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार करते भारतीय नाविकों की जान पर बना खतरा
सोमवार, 13 जुलाई 2026 को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले एक तेल टैंकर पर सवार एक भारतीय नाविक ने इस यात्रा को बेहद डरावना, अनिश्चितता और परस्पर विरोधी निर्देशों से भरा बताया है। नाम न छापने की शर्त पर बात करते हुए नाविक ने बताया कि किस तरह दो मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल से लदा उनका विशाल जहाज यानी VLCC और पूरा चालक दल विपरीत परिस्थितियों में फंस गए थे। ओमान तट के समीप दक्षिणी मार्ग से गुजरते वक्त वे एक तरफ ईरानी नौसेना की धमकियों और दूसरी तरफ आगे बढ़ने के लिए मिल रहे अमेरिकी प्रोत्साहन के बीच पिस रहे थे, यानी सैन्य खतरों और कंपनी की तरफ से मिलने वाले बोनस के बीच उनकी जान सीधे दांव पर लगी थी।
इसी बीच ओमान के समुद्री तट के पास अपने जहाज पर हुए हमले के बाद से गायब एक भारतीय नाविक का शव खोज लिया गया है। पश्चिमी भारत के पुणे शहर के 30 वर्षीय मरीन इंजीनियर हेरंब कर्मकर रविवार को साइप्रस के झंडे वाले जहाज GFS Galaxy पर हुए हमले के बाद से लापता थे। फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया के मनोज यादव ने बताया, “मंगलवार की शाम मुझे जहाज की मालिक कंपनी का फोन आया, जिसने सूचित किया कि ओमानी तटरक्षक बल ने हेरंब कर्मकर का शव ढूंढ लिया है।” यादव ने कहा, “जब से हमें पहली बार उनके लापता होने की खबर मिली थी, तब से करीब 60 घंटे बीत चुके थे।” जहाज के बाकी 23 चालक दल सदस्यों को, जिनमें 10 भारतीय नागरिक भी शामिल थे, 12 जुलाई को ही सुरक्षित बचा लिया गया था।
दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने पुष्टि की है कि वह UAE के अधिकारियों और संबंधित शिपिंग कंपनी के साथ मिलकर हेरंब कर्मकर के परिजनों को हर संभव मदद दिलाने की कोशिश कर रहा है। मिशन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “हम 12 जुलाई 2026 को व्यावसायिक पोत MV GFS Galaxy पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की दुखद मृत्यु पर हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करते हैं।” यह घटना दिखाती है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य का यह टकराव अब सिर्फ सरकारों और सेनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस रास्ते से रोज गुजरने वाले आम कामगारों की जान तक पहुंच चुका है।
इज़राइल में घटनाक्रम: जासूसी के आरोप में सैनिक को सज़ा, नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा
इज़राइली सेना ने घोषणा की है कि उसके एक कार्यरत सैनिक को पांच साल कैद की सज़ा सुनाई गई है, क्योंकि उसने मिसाइल-रोधी अभियानों के वीडियो एक ईरानी एजेंट को भेजे थे। सेना के मुताबिक उस सैनिक ने पिछले साल जून में ईरान के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध के दौरान इस तरह के दो वीडियो भेजे और इसके बदले उसे पैसे भी मिले। सेना ने यह भी बताया कि उसने नागरिक इलाकों में रिकॉर्ड किए गए कई अन्य वीडियो भी उसी ईरानी एजेंट को दिए थे, जिससे यह मामला महज एक सुरक्षा चूक नहीं बल्कि जासूसी और भुगतान लेकर संवेदनशील जानकारी बेचने का मामला बन जाता है।
वहीं इज़राइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शनिवार, 18 जुलाई 2026 को अमेरिका के लिए रवाना होंगे। अधिकारी के मुताबिक नेतन्याहू राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने के इच्छुक हैं, हालांकि यह अभी तय नहीं है कि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात होगी या नहीं। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अपने चरम पर है, इसलिए इस पर पूरे क्षेत्र की नजर रहेगी।
इराक के अरबिल में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास धमाके
बुधवार को इराक के स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी अरबिल में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के आसपास कई धमाके सुनाई दिए, जिसके बाद वायु रक्षा प्रणाली को तुरंत सक्रिय किया गया। मौके पर मौजूद पत्रकारों के मुताबिक वायु रक्षा प्रणाली के हस्तक्षेप से पहले कई ड्रोन अरबिल के आसमान में उड़ते नजर आए। रक्षा प्रणाली द्वारा इन्हें निशाना बनाए जाने पर विस्फोट हुए और वाणिज्य दूतावास के करीब धुआं उठता साफ दिखाई दिया। पश्चिम एशिया की इस जंग के दौरान यही वाणिज्य दूतावास बार-बार ड्रोन और रॉकेट हमलों का निशाना बनता रहा है। अप्रैल में एक नाजुक युद्धविराम लागू होने के बाद से बुधवार का यह पहला मौका है, जब अरबिल स्थित वाणिज्य दूतावास के पास धमाकों की खबर सामने आई है, जो दिखाता है कि अप्रैल का युद्धविराम अब पूरी तरह से बिखरने की कगार पर है।



















