होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर जोरदार बमबारी की है, जिससे पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल घिर आए हैं। जवाबी कार्रवाई में तेहरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है, जिससे समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
समझौते का उल्लंघन और जवाबी कार्रवाई
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन अमेरिकी हमलों को द्विपक्षीय समझौते का स्पष्ट उल्लंघन करार देते हुए चेतावनी दी है कि वे अपने हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाएंगे। सरकारी चैनल IRIB के माध्यम से साझा किए गए एक बयान में मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका द्वारा किए गए इस हमले के परिणाम गंभीर होंगे। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए गाइडेड हथियारों से 80 से अधिक ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
राष्ट्रपति पेज़ेशकियन का दौरा और ईरान में स्थिति
अमेरिकी हमले के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इराक का अपना आधिकारिक दौरा बीच में ही छोड़ दिया और स्वदेश लौट आए। ईरानी सरकारी टेलीविजन की रिपोर्ट के अनुसार, बंदर अब्बास और क़ेश्म द्वीप में स्थिति अब सामान्य है, लेकिन सिरिक में अभी भी विस्फोटों की आवाजें सुनी जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, ईरान की संयुक्त सैन्य कमान, खातम अल-अंबिया, ने अमेरिकी कार्रवाई को खुली आक्रामकता बताया है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रबंधन में किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है।
बहरीन और कुवैत में मिसाइल हमलों का साया
बहरीन के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की है कि देश में हवाई हमले के सायरन बजाए गए हैं, जिसके बाद स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। कुवैती सेना ने भी सूचित किया है कि उनके हवाई रक्षा तंत्र सक्रिय हैं और आने वाले मिसाइल हमलों को नाकाम करने का प्रयास कर रहे हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर असर
इस संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बुधवार, 8 जुलाई, 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चे तेल का भाव ₹227 की तेजी के साथ ₹6,932 प्रति बैरल पर पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तनाव जारी रहता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसी बीच, चार बड़े तेल और गैस टैंकरों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से अपना रास्ता बदल लिया है, जिससे व्यापारिक जहाजों के लिए खतरे का स्तर गंभीर हो गया है।
राजनयिक प्रतिक्रिया और भविष्य की आशंकाएं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्किये में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन के दौरान घोषणा की कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने तेहरान को चेतावनी दी कि अमेरिका आज रात फिर से हमला कर सकता है और खारग द्वीप पर कब्जा करने की संभावना को भी खारिज नहीं किया। चीन ने दोनों पक्षों को संयम बरतने की अपील की है, जबकि यूरोपीय संघ ने इसे युद्ध को रोकने की बातचीत के लिए एक और बाधा बताया है। यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने एयरलाइनों को 31 अगस्त तक ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र का उपयोग न करने की सलाह दी है।



















