पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के मुख्य वार्ताकार ने साफ कर दिया है कि तेहरान की पहली प्राथमिकता कूटनीति ही है, लेकिन अगर हालात बिगड़े तो देश सशस्त्र संघर्ष के लिए भी पूरी तरह तैयार है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर बात की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की अहमियत पर फिर जोर दिया।
ईरान का दोटूक रुख़
ईरान के मुख्य वार्ताकार के बयान से साफ है कि तेहरान बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करना चाहता, लेकिन साथ ही किसी भी सैन्य टकराव की सूरत में पीछे हटने के मूड में भी नहीं है। खबरों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच सीधे हमले फिलहाल थम गए हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत किस राह पर आगे बढ़े, इसे लेकर गहरे मतभेद अभी भी बने हुए हैं। यही वजह है कि यह सवाल उठ रहा है कि क्या शांति की कोशिशें नाकाम होने पर एक बार फिर जंग की शुरुआत हो सकती है।
मोदी-पेज़ेश्कियान की फोन पर बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत में मोदी ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से नौवहन की आजादी बनाए रखने की जरूरत को एक बार फिर रेखांकित किया। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य माल एक इलाके से दूसरे इलाके तक पहुंचाया जाता है। इस जलमार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर पड़ सकता है, इसलिए भारत जैसे देशों के लिए यहां शांति और आवाजाही की आजादी बनी रहना बेहद अहम है।
तनाव अभी टला नहीं है
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी झड़पें फिलहाल रुकी हुई हैं, लेकिन इसे स्थायी शांति नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की दिशा को लेकर मतभेद इतने गहरे हैं कि किसी ठोस समझौते की उम्मीद अभी दूर की बात लगती है। ऐसे में क्षेत्र में एक बार फिर हालात बिगड़ने का खतरा बना हुआ है, और दुनिया भर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीति आगे बढ़ती है या हालात दोबारा सैन्य टकराव की तरफ मुड़ जाते हैं।



















