होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज़ पर हुए हमले ने संयुक्त राष्ट्र को वहां फंसे नाविकों को निकालने का अपना अभियान बीच में रोकने पर मजबूर कर दिया, ठीक उसी वक्त जब अमेरिका ने ईरान को इस अहम जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाज़ों से पारगमन शुल्क वसूलने के खिलाफ चेतावनी दी। गुरुवार, 25 जून 2026 को एवर लवली नाम के कंटेनर जहाज़ पर हुआ यह हमला ऐसे नाज़ुक मोड़ पर हुआ जब वॉशिंगटन और तेहरान अपने युद्ध को खत्म करने के लिए एक व्यापक समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, और दुनिया के सबसे व्यस्त तेल गलियारों में से एक की सुरक्षा फौरन सुर्खियों में आ गई। कुछ ही घंटों में, जलडमरूमध्य पर यातायात नियंत्रण का दावा करने वाली ईरानी एजेंसी ने चेतावनी जारी कर दी, UN की शिपिंग एजेंसी ने खाड़ी में फंसे सैकड़ों जहाज़ों और हज़ारों नाविकों को निकालने का अभियान रोक दिया, और UN के परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख ने कहा कि ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए एक 'बेहद मज़बूत' सत्यापन प्रणाली के बिना कोई भी संघर्षविराम बेमानी होगा।
एवर लवली पर हमले ने रोकी UN की निकासी योजना
न्यूयॉर्क टाइम्स समेत कई अमेरिकी मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज़ को निशाना बनाया। घटना के तुरंत बाद पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा, 'PGSA द्वारा निर्धारित मार्गों के बाहर किसी भी पारगमन को सुरक्षित आवाजाही की गारंटी नहीं दी जाएगी।' समुद्री निगरानी एजेंसी UKMTO ने पहले ही बताया था कि गुरुवार, 25 जून 2026 को जलडमरूमध्य में एक जहाज़ पर प्रक्षेपास्त्र से हमला हुआ, और अमेरिकी मीडिया के कई संस्थानों ने इसका श्रेय ईरान को दिया। ताइवान की कंटेनर शिपिंग कंपनी एवरग्रीन मरीन ने पुष्टि की कि जलडमरूमध्य से गुज़रते वक्त उसके जहाज़ पर किसी 'अज्ञात वस्तु' से प्रहार हुआ, हालांकि चालक दल, पोत और उसका माल सभी सुरक्षित बताए गए। सिंगापुर की मैरीटाइम एंड पोर्ट अथॉरिटी (MPA) ने जहाज़ की पहचान सिंगापुर में पंजीकृत पोत एवर लवली के रूप में की। MPA के मुताबिक, 25 जून को जलडमरूमध्य से बाहर निकलते समय जहाज़ के ब्रिज क्षेत्र को किसी अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से मामूली नुकसान पहुंचा। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया कि जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुका है और अपने अगले गंतव्य की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अंतिम ठिकाना नहीं बताया। एवरग्रीन मरीन के बयान की पुष्टि करते हुए MPA ने कहा कि सभी 21 चालक दल सदस्य सकुशल हैं। इसी घटना के बाद UN ने जलडमरूमध्य में फंसे नाविकों को निकालने की अपनी सक्रिय कोशिशें अस्थायी रूप से रोक दीं।
IAEA प्रमुख की दो-टूक: सिर्फ इरादे काफी नहीं, सत्यापन चाहिए
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने शुक्रवार, 26 जून को जापान में पत्रकारों से कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष की समाप्ति के बाद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए एक 'बहुत कड़ी' सत्यापन प्रणाली स्थापित करना ज़रूरी है। ग्रोसी ने कहा, 'मेरे विचार से इस हालिया अमेरिका-ईरान समझौते का लक्ष्य यह तय करना है कि ईरान में परमाणु हथियार विकसित न हों। ईरान की सरकार ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यह उसका इरादा नहीं है। लेकिन इरादे अकेले काफी नहीं होते। एक बहुत मज़बूत सत्यापन ढांचा धरातल पर जितनी जल्दी हो सके उतारना होगा।' ग्रोसी ने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ हुए प्रारंभिक समझौते के बाद एजेंसी ने तेहरान के यूरेनियम भंडार के भविष्य को लेकर ईरान से बातचीत 'मुश्किल से शुरू' की है। UN के परमाणु प्रमुख ने अलग से यह भी दोहराया कि परमाणु हथियार न बनाने के ईरान के वादे के लिए 'बहुत मजबूत' सत्यापन की आवश्यकता होगी, क्योंकि अमेरिका और ईरान अपने युद्ध को समाप्त करने के लिए एक स्थायी समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस वार्ता की सबसे बड़ी अड़चनों में से एक बना हुआ है, जिसकी शुरुआत फरवरी के अंत में हुए बड़े पैमाने के अमेरिकी-इज़रायली हमलों से जुड़ी है। पिछले सप्ताह ईरान और अमेरिका ने संघर्ष खत्म करने के लिए एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद शुरू हुई बातचीत में परमाणु कार्यक्रम सहित कई विवादित मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
अमेरिका का ईरान पर फिर हमला, दोनों तरफ से चेतावनियां
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शुक्रवार को बयान जारी कर पुष्टि की कि अमेरिकी सशस्त्र बलों ने ईरान पर सैन्य हमले किए। बयान के मुताबिक अमेरिकी विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण सुविधाओं के साथ-साथ देश के तटीय राडार केंद्रों को निशाना बनाया, यह कदम होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक व्यापारिक जहाज़ पर तेहरान के हमले के जवाब में उठाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ पर हुए ड्रोन हमले की जिम्मेदारी सीधे ईरान पर डाली और इसे संघर्षविराम समझौते का 'मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' करार दिया। ट्रंप ने यह भी कहा कि हालिया अमेरिकी सैन्य हमलों के बावजूद ईरान के पास अभी भी 'कुछ' सैन्य क्षमता बची है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बची हुई ताकत 'बहुत अधिक नहीं' है। ईरानी मीडिया ने खबर दी कि दक्षिणी ईरान के सिरिक शहर में एक घाट के आसपास इलाके में प्रक्षेप्य आ गिरा; इससे पहले उसी शुक्रवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य में 'नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाज़ों' की दिशा में चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाई गई थीं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने शनिवार को दावा किया कि उन्होंने अमेरिका के ताजा हमले के जवाब में क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, हालांकि गार्ड्स ने इन ठिकानों को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। यह बयान अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ISNA द्वारा जारी एक पहले के बयान के बाद आया, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका के नए हमले पर बल की प्रतिक्रिया 'त्वरित और निर्णायक' होगी, हालांकि यह बयान बाद में हटा लिया गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वेंस ने कहा कि अमेरिका हर हिंसक कार्रवाई का जवाब उतनी ही ताकत से देगा। उन्होंने X पर लिखा, 'हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा,' और आगे जोड़ा कि अगर MOU के क्रियान्वयन के तरीके पर कोई असहमति है, तो फोन उठाया जा सकता है।
वॉशिंगटन की कूटनीति: रुबियो का खाड़ी को भरोसा, लेबनान-इज़रायल फ्रेमवर्क का ऐलान
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार, 25 जून को खाड़ी के अरब सहयोगी देशों को यकीन दिलाया कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में उनके हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। यह बयान पश्चिम एशिया के उनके दौरे के समापन पर आया, जिसका मकसद ट्रंप प्रशासन के प्रारंभिक ईरान समझौते को संदेहास्पद क्षेत्रीय साझेदारों के सामने रखना था। रुबियो ने अमेरिका-ईरान वार्ता में दी जा रही रियायतों को लेकर खाड़ी देशों की आशंकाओं को दूर करते हुए ज़ोर दिया कि उनकी सुरक्षा हर हाल में प्राथमिकता बनी रहेगी। शुक्रवार को रुबियो ने बताया कि वॉशिंगटन में हुई वार्ता के समापन के बाद इज़रायल और लेबनान के बीच एक ढांचागत (फ्रेमवर्क) समझौते पर सहमति बन गई है। इसी क्रम में यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी WAM के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने शुक्रवार को अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराक्ची के साथ फोन पर बातचीत की, जिसमें उन्होंने अमेरिका-ईरान समझौते की शर्तों के पालन और समुद्री गलियारों की सुरक्षा की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य से स्वतंत्र नौवहन की स्वतंत्रता भी शामिल है।
ईरान की सख्ती: बिना समन्वय होर्मुज़ से गुज़रना जोखिम भरा
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने गुरुवार, 25 जून 2026 को आगाह किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बिना उचित अनुमति के गुज़रने वाले किसी भी जहाज़ को नतीजे भुगतने होंगे, यह चेतावनी अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच जारी की गई। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम घरीबाबादी ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों को सुरक्षित मार्ग की कोई गारंटी तब तक नहीं दी जा सकती जब तक वे सीधे ईरान के साथ समन्वय न करें। उन्होंने यह भी चेताया कि अगर यह समन्वय नहीं हुआ तो किसी भी नामित शिपिंग मार्ग को निलंबित किया जा सकता है। यह बयान X पर पोस्ट किया गया, ठीक उसी समय जब ओमान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के साथ मिलकर जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए अस्थायी मार्गों का ऐलान किया था। इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने शुक्रवार को साफ शब्दों में कहा कि ईरान अगर इज़रायल पर हमला करता है तो यह तेहरान की सबसे बड़ी ऐतिहासिक भूल होगी। इससे एक दिन पहले, गुरुवार को क़ुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल क़आनी ने कहा था कि इज़रायल दक्षिण लेबनान में अनंत काल तक नहीं टिक सकता, अगर वह अपनी इच्छा से वापस नहीं गया तो उसे हार मानकर लौटना पड़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते का सबसे बड़ा शिकार ज़रूरी नहीं कि इज़रायल की ईरान नीति हो, लेकिन इस डील से इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक ताकत और अमेरिका के साथ अपने देश के संबंधों पर उनकी पकड़ गंभीर रूप से कमज़ोर पड़ सकती है।
लेबनान बंटा हुआ: आउन का सम्प्रभुता वाला बयान, हिज़बुल्ला का विरोध
हिज़बुल्ला के नेता नईम कासिम ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को कहा कि इज़रायल के पास उन लेबनानी क्षेत्रों से पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है जिन पर उसने कब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान-अमेरिका समझौता, जिसने इज़रायल के साथ लड़ाई को कम किया है, वह अमेरिकी-इज़रायली हार को दर्शाता है, और इज़रायल से लेबनान से बिना किसी शर्त के पीछे हटने की मांग की। दूसरी ओर लेबनान के राष्ट्रपति जोज़ेफ़ आउन ने शुक्रवार को इज़रायल के साथ हस्ताक्षरित रूपरेखा समझौते को अपने देश की पूर्ण सम्प्रभुता की पुनर्स्थापना की दिशा में एक प्रारंभिक कदम बताया। राष्ट्रपति कार्यालय के बयान में आउन ने कहा, 'आज हस्ताक्षरित यह रूपरेखा समझौता एक पहला कदम है' जो लेबनानी नागरिकों को 'अपनी पूरी तरह मुक्त भूमि पर और निश्चित रूप से पुनर्निर्मित होने वाले घरों में, लेबनानी राज्य की सम्प्रभुता के अधीन वापस लौटने' में मदद करेगा, वह राज्य जिसकी अपनी ज़मीन और जनता पर सम्प्रभुता में कोई साझेदार नहीं है। आउन ने यह भी संकल्प जताया कि जब तक यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो जाता, प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने कहा, 'अब न कोई कब्ज़ा होगा, न कैदी, न अधीनता और न ही किसी का संरक्षण।' लेकिन इस समझौते का विरोध भी सामने आया, हिज़बुल्ला के समर्थक शुक्रवार देर रात बेरुत की सड़कों पर उतर आए। सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) के मुताबिक हिज़बुल्ला समर्थकों ने बेरुत की सड़कों पर मोटरसाइकिलें चलाईं, जिसमें संसद के पास का एक केंद्रीय क्षेत्र और हवाई अड्डे की ओर जाने वाली मुख्य सड़क शामिल थी, वे 'लेबनान और इज़रायल के बीच घोषित रूपरेखा समझौते के खिलाफ' विरोध कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने जलते हुए टायरों की मदद से कम से कम एक सड़क को अवरुद्ध कर दिया। एक संवाददाता ने एक मार्ग पर लोगों को मोटरसाइकिलों पर चलते और नारेबाज़ी करते हुए देखा, साथ ही राजधानी की विभिन्न सड़कों पर लेबनानी सेना द्वारा स्थापित अस्थायी चेकपॉइंट्स भी देखे गए। इसी बीच लेबनानी सरकारी मीडिया के मुताबिक इज़रायली सेना ने शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान के एक कस्बे पर हवाई पर्चे गिराकर वहां के लोगों को इलाका छोड़ने का आदेश दिया, इज़रायल और हिज़बुल्ला के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद से यह इस तरह का पहला आदेश है। यह कस्बा दक्षिणी लेबनान के अंदर इज़रायली सैनिकों के कब्ज़े वाले क्षेत्र की सीमा के पास स्थित है। लेबनान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि इज़रायल ने हाल ही में इस कस्बे को दक्षिणी लेबनान में अपनी सेना के नियंत्रण वाले क्षेत्र में शामिल कर लिया था। लेबनानी अधिकारियों का कहना है कि इज़रायली सैनिक इस क्षेत्र की उत्तरी सीमा पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और वहां जाने वाले किसी भी व्यक्ति पर गोलियां चला रहे हैं, जिनमें आम नागरिक और लेबनानी सैनिक भी शामिल हैं। सैन्य अधिकारी ने बताया कि किसान मंसूरी में लगातार आते-जाते रहे, लेकिन वे वहां स्थायी रूप से नहीं रह रहे थे।
भारत और वैश्विक व्यापार पर असर: क्रिसिल का अनुमान, ईरानी तेल और उर्वरक
क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा है कि पश्चिम एशिया संघर्ष से कॉर्पोरेट भारत की लाभप्रदता पर पड़ने वाला असर शुरुआती आकलन की तुलना में लगभग आधा रह सकता है, बशर्ते अमेरिका और ईरान के बीच का युद्धविराम कायम रहे और ऊर्जा आपूर्ति की बहाली का सिलसिला जारी रहे। एजेंसी का ताज़ा अनुमान है कि यह संघर्ष वित्त वर्ष 2027 में भारतीय कंपनियों के परिचालन मार्जिन को करीब 100 आधार अंकों तक कम कर सकता है, जबकि इससे पहले एजेंसी ने 200 आधार अंकों की गिरावट का अनुमान जताया था, जो उस परिदृश्य पर आधारित था जिसमें संघर्ष लंबा खिंचता और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से समुद्री व्यापार बाधित होता। यह संशोधित आकलन जलडमरूमध्य के पुनः खुलने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ गिरावट की पृष्ठभूमि में आया है, जो एक अस्थायी अमेरिका-ईरान सहमति-पत्र के तहत हुआ। हालांकि क्रिसिल ने आगाह किया कि इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं और गैस आपूर्ति को पटरी पर आने में और अधिक समय लग सकता है। भारतीय रिफाइनिंग सूत्रों के मुताबिक, वॉशिंगटन द्वारा प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दिए जाने के बाद तेहरान अपनी बिक्री तेज करने की कोशिश कर रहा है, जिसके तहत कई मध्यस्थों ने भारतीय रिफाइनरियों को रियायती दरों पर ईरानी तेल की पेशकश की है। सोमवार, 22 जून 2026 को अमेरिका ने एक नए शांति समझौते के तहत शुरुआती बातचीत के बाद 60 दिनों के लिए ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी थी, जिससे ऊर्जा व्यापार को फिर शुरू करने का एक छोटा अवसर मिला है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क सीधे नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) द्वारा और ऐसे बिचौलियों के ज़रिए किया गया है जो दावा कर रहे हैं कि उन्हें ईरानी सरकारी उत्पादक से तेल आवंटित किया गया है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते उर्वरकों के शिपमेंट में फिर से तेज़ी आने लगी है, हालांकि बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्यात को संघर्ष-पूर्व स्तर पर लौटने और वैश्विक बाज़ार को राहत देने में अभी समय लगेगा। अमेरिका और इज़रायल द्वारा 28 फरवरी को युद्ध शुरू किए जाने से पहले, दुनिया भर में व्यापार होने वाले यूरिया का लगभग एक-तिहाई हिस्सा और समुद्री मार्ग से भेजे जाने वाले सल्फर का करीब आधा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुज़रता था, लेकिन युद्ध के अधिकांश समय इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के लगभग बंद रहने से इन जरूरी सामानों की आवाजाही में भारी गिरावट आई थी।
जहाज़ों की आवाजाही धीमी, फिर भी टैंकर खाड़ी में दाखिल
जहाज़ ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ताइवान द्वारा संचालित एक जहाज़ पर ईरान की गोलाबारी के कुछ घंटों बाद, शुक्रवार, 26 जून 2026 को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों की संख्या इस सप्ताह की शुरुआत की तुलना में काफी कम रही। जलमार्ग के ओमानी हिस्से के करीब हुए हमले में जहाज़ के क्षतिग्रस्त होने के बाद, UN की शिपिंग एजेंसी ने खाड़ी से फंसे सैकड़ों जहाज़ों और हज़ारों नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने की अपनी स्वैच्छिक योजना अस्थायी रूप से रोक दी। इसके बावजूद, LSEG और MarineTraffic के शुक्रवार के शिप ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि कम से कम चार टैंकर, जिनमें तीन विशाल कच्चे तेल के वाहक शामिल हैं जो अधिकतम 20 लाख बैरल तेल ले जा सकते हैं, तेल लादने के लिए खाड़ी में दाखिल हुए। अलग शिपिंग डेटा के मुताबिक दो अन्य सुपरटैंकर ईरानी तेल लेने के लिए जलडमरूमध्य में घुसे, जबकि Kpler के विश्लेषण के अनुसार एक अन्य टैंकर होर्मुज़ के ओमानी रास्ते से 20 लाख बैरल तेल लेकर बाहर निकला। ईरान की चेतावनियों की परवाह न करते हुए जहाज़ ओमान के तटीय मार्ग से होर्मुज़ पार कर रहे हैं, हालांकि जलडमरूमध्य में जहाज़ों की कुल आवाजाही बुधवार, 24 जून 2026 के उच्चतम स्तर से नीचे आ गई है। Kpler के ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक गुरुवार को कम से कम 42 मालवाहक जहाज़ों ने इस जलडमरूमध्य को पार किया, इनमें तेल, गैस और उर्वरक जैसे सूखे माल ढोने वाले टैंकर शामिल थे, जबकि बुधवार, 24 जून 2026 को यह संख्या 57 के शीर्ष स्तर पर पहुंची थी। इन 42 जहाज़ों में से दस खाड़ी में दाखिल हो रहे थे, जबकि 32 बाहर निकल रहे थे, और कुल जहाज़ों में से आधे ने ओमान के समुद्र तट के साथ-साथ बने दक्षिणी मार्ग को चुना। शुक्रवार, 26 जून 2026 को UN की समुद्री एजेंसी के प्रमुख ने घोषणा की कि मंगलवार से अब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से लगभग 115 जहाज़ और करीब 2,500 नाविकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। IMO के महासचिव अर्सेनियो डोमिंग्वेज़ ने यह जानकारी उस घटनाक्रम के एक दिन बाद साझा की, जब संगठन ने ओमान की खाड़ी में एक जलपोत पर हमले के चलते लगभग 600 जहाज़ों और 11,000 नाविकों को निकालने का अभियान अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था। एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोमिंग्वेज़ ने बताया कि बीते साढ़े तीन दिनों में 115 जलपोत इस जलडमरूमध्य से रवाना हो चुके हैं और इस दौरान करीब 2,500 नाविक अब सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए हैं।
दुबई का झूठा अलार्म, आशूरा का शोक और रिहा हुए ईरानी नाविक
संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को दुबई शहर के लिए एक संभावित मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की। स्थानीय समयानुसार शाम 5:15 बजे के तुरंत बाद जारी हुए इस अलार्म का कारण क्या था, यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया। ईरान पर गुरुवार को ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमला करने का संदेह है, और तेहरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर इस क्षेत्र और अमेरिका को लगातार चुनौती दे रहा है, भले ही ईरान युद्ध में फिलहाल एक अंतरिम शांति समझौता लागू है। चेतावनी जारी होने के कुछ ही मिनट बाद, अधिकारियों ने बिना कोई अतिरिक्त विवरण दिए खतरे की समाप्ति यानी 'ऑल क्लियर' का संदेश जारी कर दिया। इसी तरह यूएई में रहने वाले लोगों को शुक्रवार को गृह मंत्रालय की ओर से उनके फोन पर 'संभावित मिसाइल खतरे' की चेतावनी देने वाला एक आपातकालीन संदेश मिला, जिसे थोड़ी देर बाद ही वापस ले लिया गया, एक महीने से अधिक समय में इस तरह की यह पहली चेतावनी थी। मंत्रालय ने इसके बाद एक और सूचना जारी कर लोगों से 'पिछली चेतावनी को नज़रअंदाज़ करने' को कहा, जो कि एक गलत अलार्म प्रतीत होता है। हालांकि कुछ निवासियों को इस कैंसिलेशन मैसेज से पहले एक और मिसाइल चेतावनी वाला अलर्ट मिल चुका था। गृह मंत्रालय ने अपने मोबाइल नोटिफिकेशन में कहा था, 'मौजूदा स्थिति को देखते हुए, संभावित मिसाइल खतरे की आशंका है, तुरंत किसी सुरक्षित स्थान पर जाएं,' इसके तुरंत बाद एक और अलर्ट जारी कर कहा गया कि 'स्थिति वर्तमान में सुरक्षित है, आप अपनी सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू कर सकते हैं।' इसी बीच शिया मुसलमानों ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को अपने कैलेंडर के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक, आशूरा, को ईरान, इराक, लेबनान और दुनिया के अन्य हिस्सों में भारी भीड़ के साथ मनाया, इस दौरान उन्होंने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के नवासे हुसैन की सातवीं शताब्दी में हुई शहादत को याद किया। इस साल आशूरा का आयोजन मुख्य रूप से शिया बहुल देश ईरान और अमेरिका व इज़रायल के बीच हुए युद्ध के बाद हो रहा है, जिन्होंने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे। इन हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे। 86 वर्षीय खामेनेई न केवल ईरान के सबसे बड़े राजनीतिक नेता थे, बल्कि सभी धार्मिक मामलों पर भी उनका फैसला आखिरी होता था और दुनिया भर के करोड़ों शिया उनका बेहद सम्मान करते थे। खामेनेई के जनाज़े का जुलूस जुलाई की शुरुआत में निकालने की योजना है। एक अन्य घटनाक्रम में, तेहरान ने शुक्रवार को जानकारी दी कि हालिया सैन्य टकराव के दौरान अमेरिका द्वारा जब्त किए गए तेल टैंकर के चालक दल के 22 ईरानी सदस्यों को पाकिस्तान में ईरान के वाणिज्य दूतावास में स्थानांतरित कर दिया गया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन के साथ बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ईरान के पूर्वी पड़ोसी देश पाकिस्तान ने 'इन 22 ईरानी नाविकों की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया, जिनका तेल टैंकर अमेरिका द्वारा जब्त कर लिया गया था।' एजेंसी के मुताबिक चालक दल को कराची में ईरानी राजनयिकों को सौंप दिया गया है और उम्मीद है कि वे अगले कुछ दिनों में ईरान लौट आएंगे।



















