महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच कुर्ला इलाके में एक बड़ा हादसा सामने आया है। चिराग नगर स्थित गौशिया चाल के पास तड़के अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा खिसककर नीचे बने रिहाइशी मकानों पर आ गिरा। इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की जान चली गई है, जबकि 7 अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम तेजी से शुरू किया गया।
तड़के 3:48 बजे हुआ दर्दनाक हादसा और बचाव अभियान
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह भूस्खलन 12 अगस्त 2026 की तड़के 3:48 बजे दर्ज किया गया। कुर्ला के चिराग नगर में स्थित राठौड़ मेडिकल के निकट स्थित गौशिया चाल में जब लोग सो रहे थे, तभी भारी बारिश के दबाव में पहाड़ी से मिट्टी और पत्थर नीचे बने मकानों पर गिर पड़े। मलबे की चपेट में आने से दो से तीन मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। डीसीपी गणेश शिंदे ने बताया कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ी खिसकी, जिसके तुरंत बाद मुंबई पुलिस, अग्निशमन दल, एनडीआरएफ, एम्बुलेंस सेवा और एल वार्ड कार्यालय के कर्मचारी बचाव कार्य के लिए मौके पर तैनात किए गए।
शुरुआती दौर में दो लोगों के मारे जाने और कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई थी। जैसे-जैसे राहत कर्मियों ने मलबा हटाना शुरू किया, मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ती गई। दोपहर 12:45 बजे बीएमसी द्वारा जारी अद्यतन जानकारी के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वालों का आंकड़ा 7 तक पहुंच गया, जबकि 7 घायल नागरिकों का इलाज जारी है। उप मुख्य अग्निशमन अधिकारी के. आर. यादव ने जानकारी दी कि मृतकों में एक ही परिवार के 4 सदस्य शामिल हैं। उनके शवों को कुर्ला वेस्ट स्थित राठौड़ मेडिकल ले जाया गया। मलबे के नीचे फंसे अंतिम व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत दल लगातार प्रयासरत हैं।
संकरे रास्तों के बीच राहत कार्य और 4 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान
घटना की सूचना मिलते ही मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने दुर्घटनास्थल का दौरा किया और स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। महापौर ने मृतक नागरिकों के परिजनों को 4 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता राशि देने का ऐलान किया। इस दौरान उनके साथ वार्ड समिति अध्यक्ष विजेंद्र शिंदे, अतिरिक्त नगर आयुक्त डॉ. अविनाश ढाकने और एल वार्ड के प्रभारी सहायक आयुक्त अनिल जाधव भी मौजूद थे।
महापौर रितु तावड़े ने बताया कि दुर्घटनास्थल तक जाने वाला मार्ग अत्यधिक संकरा है, जहां एक समय में केवल एक ही व्यक्ति पैदल निकल सकता है। ऐसी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संकरी गलियों के बावजूद बीएमसी, मुंबई पुलिस, अग्निशमन विभाग और एनडीआरएफ के जवान पूरी निष्ठा के साथ बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। इसके अतिरिक्त उप महापौर संजय घाड़ी और एमएलसी नसीम खान ने भी प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर राहत कार्यों की समीक्षा की और प्रशासनिक टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मृतकों की पहचान, अस्पताल की कार्यवाही और बीएमसी की चेतावनी
हादसे में जान गंवाने वाले सभी 7 व्यक्तियों की आधिकारिक पहचान कर ली गई है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजावाड़ी अस्पताल से सभी शवों को परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने कागजी औपचारिकताएं तेजी से पूरी कीं।
दूसरी ओर, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मानसून से पहले ही भूस्खलन और चट्टान खिसकने की आशंका वाले खतरनाक क्षेत्रों में नोटिस जारी किए जाते हैं। कुर्ला के अशोक नगर स्थित हिल नंबर 3 और आसपास की बस्तियों के निवासियों को संभावित जोखिमों के प्रति आगाह करने के लिए नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं और समय रहते स्थान खाली करने की सलाह दी जाती है।
सायन ईस्ट में दूसरी घटना और प्रशासनिक लापरवाही पर राजनीतिक आरोप
कुर्ला हादसे के कुछ ही घंटों बाद मुंबई के सायन ईस्ट इलाके में एक और दुर्घटना दर्ज की गई। शाम करीब 4:48 बजे प्रतीक्षा नगर स्थित बीएमसी के माला गार्डन के पास एक इमारत गिरने की घटना सामने आई, जिसमें 3 से 4 लोगों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका जताई गई है। संबंधित एजेंसियां इस घटना स्थल पर भी स्थिति का जायजा ले रही हैं और विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है।
इस बीच, हादसों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने साकीनाका और कुर्ला क्षेत्र में हुए भूस्खलन के लिए बीएमसी की मानसून-पूर्व घोर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अप्रैल महीने में ही नगर प्रशासन से कुर्ला और घाटकोपर के संवेदनशील इलाकों का सुरक्षा ऑडिट कराने तथा सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की थी। वर्षा गायकवाड़ का आरोप है कि बीएमसी ने समय रहते एहतियाती कदम नहीं उठाए और केवल हादसे घटने के बाद ही कार्रवाई शुरू की, जिससे 7 मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।



















