मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले से एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और भरोसे की नींव को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। यहाँ लगभग 12 साल की एक मासूम नाबालिग के साथ उसके ही चचेरे मामा पर दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा है। इस अमानवीय घटना के बाद पीड़िता की शारीरिक स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। शुरुआत में उसे स्थानीय जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे फौरन किसी उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर कर दिया। इस बीच, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सिर्फ चार घंटे के भीतर ही आरोपी को धर दबोचा। पुलिस अधिकारियों ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है।
किस तरह सामने आयावान इस कुकृत्य का पूरा मामला
यह पूरी घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक इलाके में घटी, जहाँ पीड़िता अपने माता-पिता के साथ किराए के एक मकान में जीवन गुजार रही है। जानकारी के अनुसार आरोपी युवक रक्षाबंधन के पावन पर्व पर इस परिवार के घर मेहमान बनकर आया हुआ था। आरोप है कि त्यौहार बीतने के ठीक अगले दिन, जब लड़की की माँ अपने काम के सिलसिले में स्कूल गई हुई थी और घर पर बच्ची बिल्कुल अकेली थी, तब इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया गया। जब कुछ समय बाद पीड़िता की तबियत अचानक बहुत ज्यादा खराब हो गई, तब परिजनों को इस खौफनाक वारदात का पता चला और वे तुरंत उसे लेकर अस्पताल पहुँचे। बच्ची की बिगड़ती हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद उसे तत्काल प्रभाव से दूसरे अस्पताल भेज दिया ताकि उसका बेहतर इलाज किया जा सके।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया
जैसे ही इस जघन्य अपराध की भनक पुलिस महकमे को लगी, कोतवाली थाने की टीम ने बिना एक पल गँवाए आरोपी की धरपकड़ के लिए जाल बिछा दिया। पुलिसकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए मात्र चार घंटे के अंतराल में ही आरोपी को चारों तरफ से घेरकर गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण यानी पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस तरह के मामलों ने एक बार फिर से इस बात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या घरों के अंदर भी बच्चे सुरक्षित नहीं हैं और ऐसे संवेदनशील मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों का तुरंत हरकत में आना कितना अहम साबित होता है। इस प्रकार की घटनाओं के चलते आम जनता में गहरा गुस्सा व्याप्त है और बाल सुरक्षा से जुड़े कड़े कानूनों को और अधिक सख्ती के साथ जमीन पर उतारने की पुरजोर माँग उठाई जा रही है।



















