मध्य प्रदेश के रीवा जिले के समान थाना क्षेत्र स्थित एक निजी चिकित्सालय में शनिवार को एक गंभीर दुर्घटना सामने आई, जहां लिफ्ट के बीच फंस जाने के कारण एक उपचाराधीन मरीज की जान चली गई। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों की मांग है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और इस अस्पताल को पूरी तरह से बंद किया जाए। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंच गया, लेकिन स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर भी उनके साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए।
चोट के इलाज के लिए पहुंचे थे अस्पताल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति की पहचान सुरेश सेन के रूप में हुई है, जो अमरपाटन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लालपुर गांव के रहने वाले थे। मृतक के बेटे हिमांशु सेन ने इस पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि उनके पिता कुछ दिन पहले एक पेड़ से नीचे गिर गए थे, जिसके कारण उनके कंधे की हड्डी में गंभीर चोट आई थी। इसी चोट के बेहतर उपचार के लिए शनिवार की शाम को उन्हें रीवा के इस निजी अस्पताल में लाया गया था और भर्ती कराया गया था। हिमांशु सेन ने बताया कि रात के वक्त अस्पताल का एक कर्मचारी उनके पिता को स्ट्रेचर पर लिटाकर लिफ्ट के जरिए ऊपरी मंजिल पर ले जा रहा था। जब परिवार के अन्य लोग भी उस लिफ्ट में सवार होने लगे, तो अस्पताल के उस कर्मचारी ने उन्हें अंदर आने से मना कर दिया और सीढ़ियों का उपयोग करके ऊपर आने का निर्देश दिया।
लिफ्ट में फंसा मिला शव और कर्मचारी नदारद
परिवार के सदस्यों का कहना है कि जब वे लोग सीढ़ियों के रास्ते से ऊपर पहुंचे और लिफ्ट के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि सुरेश सेन का शरीर लिफ्ट के निचले हिस्से में बुरी तरह फंसा हुआ था। उन्होंने बताया कि उनके पिता का आधा शरीर लिफ्ट के अंदर था और जिस कर्मचारी ने उन्हें ऊपर भेजा था, वह मौके से गायब था। हिमांशु सेन ने यह भी आरोप लगाया कि इस बड़ी दुर्घटना से करीब बीस मिनट पहले ही इसी लिफ्ट में एक अन्य युवती भी फंस गई थी। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने इस तकनीकी खतरे को नजरअंदाज किया और कोई एहतियाती कदम नहीं उठाया, जिसके थोड़ी देर बाद ही उनके पिता को उसी लिफ्ट से ऊपर ले जाया गया। परिजनों का मानना है कि यदि प्रबंधन ने समय रहते आवश्यक सुरक्षा कदम उठाए होते और लिफ्ट की जांच कराई होती, तो यह जानलेवा हादसा नहीं होता।
अस्पताल के बाहर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
मरीज की इस प्रकार हुई आकस्मिक मौत से परिवार और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को इस हादसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए अस्पताल के मुख्य द्वार पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनकी मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की भी उच्च स्तरीय समीक्षा की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे। दूसरी ओर, मृतक के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, मारपीट की और कुछ लोगों को जमीन पर घसीटा। हालांकि, पुलिस अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रशासनिक जांच और पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले को लेकर सीएसपी राजीव पाठक ने मीडिया को जानकारी दी कि निजी अस्पताल की लिफ्ट में एक व्यक्ति के फंसने और उसकी मौत होने की सूचना प्राप्त हुई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए संजय गांधी अस्पताल भिजवा दिया है। उन्होंने बताया कि घटना के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है और मौके से तमाम आवश्यक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। प्राथमिक जांच के हवाले से उन्होंने बताया कि लिफ्ट में किसी तकनीकी खराबी के चलते मृतक की गर्दन फंसने की बात सामने आ रही है। सीएसपी ने आश्वासन दिया कि इस मामले की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।





















