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बिश्केक यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी को परोसा जाएगा खास गुजराती और किर्गिज फ्यूजन भोजनदुनिया
30 अग॰ 2026, 6:05 pm (48 मिनट पहले)· 3

बिश्केक यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी को परोसा जाएगा खास गुजराती और किर्गिज फ्यूजन भोजन

शंघाई सहयोग संगठन समिट में शामिल होने किर्गिस्तान जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बिश्केक में विशेष शाकाहारी व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने जा रही शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की 26वीं समिट में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक दो दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे के बीच उनकी खान-पान की सूची और विशेष शाकाहारी मेन्यू को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर प्रसिद्ध गांधी रेस्तरां के मुख्य शेफ चिन्मय बडोदेकर और उनकी पूरी पाक कला टीम इस हाई-प्रोफाइल यात्रा के लिए विशेष रूप से घरेलू शैली के गुजराती व्यंजनों और किर्गिज पकवानों का शाकाहारी स्वरूप तैयार करने में जुटी हुई है।

हर पहर के लिए विशेष भोजन की तैयारी

प्रधानमंत्री की खान-पान की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए बिश्केक प्रवास के दौरान प्रत्येक समय के भोजन की रूपरेखा अत्यंत सावधानी के साथ तैयार की गई है। दिन की शुरुआत पारंपरिक भारतीय व्यंजनों से होगी, जिसमें सुबह के नाश्ते में पोहा, उपमा और इडली के साथ सांभर परोसा जाना तय किया गया है। इसके बाद दोपहर के भोजन में विशेष तौर पर गुजराती थेपला, दाल-चावल और पारंपरिक तरीके से तैयार की गई ताजी सब्जियां शामिल रहेंगी। दिनभर की व्यस्त कूटनीतिक बैठकों के बाद रात के वक्त उन्हें हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन दिया जाएगा, जिसमें मुख्य रूप से खिचड़ी और कढ़ी परोसी जाएगी।

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पारंपरिक किर्गिज व्यंजनों का शुद्ध शाकाहारी रूप

चूंकि किर्गिस्तान का खान-पान मुख्य रूप से मांसाहारी व्यंजनों पर आधारित है, इसलिए प्रधानमंत्री के लिए वहां की लोकप्रिय डिशों का खास इंडो-किर्गिज फ्यूजन रूप तैयार किया जा रहा है। शेफ चिन्मय बडोदेकर के अनुसार, किर्गिस्तान के प्रसिद्ध पुलाव जिसे प्लोव कहा जाता है और जो आमतौर पर मांस के साथ बनता है, उसका विशेष शाकाहारी संस्करण तैयार किया जा रहा है जिसमें ढेर सारी ताजी सब्जियों का उपयोग हो रहा है। इसके अलावा नूडल्स से बनने वाली लोकप्रिय स्थानीय डिश लघमन को भी पूरी तरह से शाकाहारी तरीके से पकाया जा रहा है ताकि मेहमान प्रधानमंत्री को स्थानीय स्वाद का शाकाहारी विकल्प मिल सके।

सुरक्षा के कड़े मानक और तीन चरणों वाली जांच

प्रधानमंत्री को परोसे जाने वाले खान-पान की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर बेहद कड़े प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाली हर एक कच्ची सामग्री की प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच की जा रही है। किसी भी प्रकार के जोखिम को पूरी तरह से समाप्त करने के उद्देश्य से टेबल पर खाना पहुंचने से पहले तीन अलग-अलग जिम्मेदार टीमें उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और स्वाद की अंतिम परख करेंगी।

सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिश्केक क्यों जा रहे हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन की 26वीं समिट में हिस्सा लेने बिश्केक जा रहे हैं।
नरेंद्र मोदी का यह दौरा कितने दिनों का है?
उनका यह दौरा 31 अगस्त से 1 सितंबर तक दो दिनों का होगा।
बिश्केक में पीएम मोदी के लिए भोजन कौन तैयार कर रहा है?
बिश्केक स्थित गांधी रेस्तरां के हेड शेफ चिन्मय बडोदेकर और उनकी टीम भोजन तैयार कर रही है।
किर्गिज व्यंजनों में कौन सी डिशेज को वेज रूप दिया जा रहा है?
किर्गिज प्लोव और लघमन नूडल्स को शाकाहारी रूप में तैयार किया जा रहा है।
भोजन की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
हर सामग्री का लैब एनालिसिस किया जा रहा है और परोसने से पहले तीन टीमें इसकी जांच करेंगी।
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टिप्पणियाँ 2

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·16 मिनट पहले

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राष्ट्राध्यक्षों के खान-पान और उससे जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं नहीं होतीं, बल्कि यह कूटनीतिक बैठकों की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। शंघाई सहयोग संगठन जैसे बड़े बहुपक्षीय सम्मेलनों में इस तरह की सांस्कृतिक और गैस्ट्रोनॉमिक कूटनीति मेजबान देश के साथ द्विपक्षीय संबंधों को एक अनूठा और सकारात्मक आयाम देती है, जिससे कूटनीतिक तनाव के बीच भी आपसी सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·16 मिनट पहले

कार्लोस मेंडोज़ा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह देखना महत्वपूर्ण है कि एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर इस प्रकार के हाई-प्रोफाइल दौरों के दौरान सुरक्षा और खान-पान के कड़े प्रोटोकॉल केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं होते, बल्कि वे द्विपक्षीय वार्ताओं के माहौल को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। जब किसी मेहमान नेता के लिए स्थानीय व्यंजनों को पूरी तरह उनकी प्राथमिकताओं के अनुकूल ढाला जाता है, तो यह मेजबान देश की कूटनीतिक संवेदनशीलता और अतिथि सत्कार के ऊंचे स्तर को रेखांकित करता है। ऐसे बहुपक्षीय आयोजनों में क्षेत्रीय कूटनीति की जटिलताओं के बीच इस तरह की गैस्ट्रोनॉमिक कूटनीति कड़े राजनीतिक माहौल को नरम करने का एक प्रभावी माध्यम बन जाती है।

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