मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है। लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने जिला आपूर्ति कार्यालय के भीतर छापामारी करते हुए एक प्रभारी लेखापाल को घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोचा है। पकड़ा गया आरोपी कार्यालय में सहायक ग्रेड-3 के पद पर तैनात है। यह मामला सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी की बकाया राशि को जारी करने के बदले में की गई अवैध वसूली से जुड़ा हुआ है। आरोपी ने कुल डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 50 हजार रुपये की राशि लेते हुए वह पकड़ा गया।
शिकायत के बाद बिछाया गया जाल
इस पूरे मामले का खुलासा रतलाम जिले के जावरा निवासी विजय कुमार बोरसिया की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने लोकायुक्त उज्जैन को दी अपनी शिकायत में बताया था कि उनके पिता गोवर्धन लाल, जो जिला आपूर्ति अधिकारी कार्यालय आगर से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उन्हें अपने जीवन के महत्वपूर्ण लाभों का इंतजार था। इसमें उनकी ग्रेच्युटी, बीमा और अवकाश नकदीकरण की राशि शामिल थी, जिसकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 27 लाख रुपये बताई गई है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि कार्यालय में कार्यरत बाबू मनीष कुमार पंड्या इस भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ी रकम की मांग कर रहा था।
इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त निरीक्षक दीपक सेजवार ने पहले आरोपों का सत्यापन किया। जांच में शिकायत को सही पाए जाने के बाद, लोकायुक्त उज्जैन के पुलिस महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देशों का पालन करते हुए एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया। इस टीम का नेतृत्व पुलिस उप महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह कर रहे थे। गुरुवार के दिन जैसे ही मनीष कुमार पंड्या ने शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये की रिश्वत ली, टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत की जा रही है। डीएसपी दिनेशचंद पटेल और निरीक्षक दीपक सेजवार सहित कुल 10 सदस्यों की टीम ने इस सफल अभियान को अंजाम दिया। लोकायुक्त विभाग के सूत्रों ने बताया कि आरोपी मनीष कुमार पंड्या की पहचान सहायक ग्रेड-3 के रूप में की गई है, जो वर्तमान में प्रभारी लेखापाल के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा था। शिकायतकर्ता विजय कुमार बोरसिया ने आठ जुलाई को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक से इस संदर्भ में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
सत्यापन के बाद शुक्रवार को जब रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये का लेन-देन हुआ, तब टीम ने उसे कार्यालय के भीतर से ही गिरफ्तार किया। फिलहाल आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है और लोकायुक्त विभाग पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहा है, ताकि भ्रष्टाचार के इस तंत्र से जुड़े अन्य पहलुओं का भी पता लगाया जा सके।











