मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा होते ही राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। पार्टी ने इस सीट के लिए नरोत्तम मिश्रा को दरकिनार करते हुए आशुतोष तिवारी को टिकट देने का निर्णय लिया है। इस फैसले के सामने आते ही दतिया में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है, जिसने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया।
सड़कों पर उतरा आक्रोश
नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने भारी विरोध दर्ज कराया है। दतिया के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने हाईवे को पूरी तरह से जाम कर दिया और अपने नेता के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यकर्ताओं ने बीच सड़क पर टायर जलाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। क्षेत्र की कई दुकानें भी विरोध के चलते बंद करवा दी गईं, जिससे जनजीवन पर असर पड़ा है। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि यदि पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा को पुनः चुनावी मैदान में नहीं उतारा, तो यह विरोध और भी तीव्र गति से आगे बढ़ेगा।
संगठनात्मक ढांचा बिखर गया
दतिया में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को गहरा धक्का लगा है। भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने ऐलान किया कि वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उनके साथ ही जिला कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से पद छोड़ने का निर्णय लिया है। इस्तीफों का यह सिलसिला केवल कार्यकारिणी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नगर पालिका और दतिया विधानसभा के सभी पार्षदों ने भी अपने त्यागपत्र सौंप दिए हैं।
इस्तीफा पत्र में रघुवीर सिंह कुशवाह ने स्पष्ट उल्लेख किया है कि दतिया विधानसभा के 6 मंडलों के अध्यक्ष, मोर्चा अध्यक्ष, नगर पालिका दतिया के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष और बड़ौनी पंचायत के प्रमुख पदाधिकारियों ने यह कदम उठाया है। इसके अतिरिक्त, दतिया विधानसभा के अंतर्गत आने वाले सभी 281 बूथों के अध्यक्षों और उनकी पूरी कार्यकारिणी ने भी सामूहिक इस्तीफे की प्रक्रिया में भागीदारी की है।
नेतृत्व पर सवाल और भविष्य की राह
इस्तीफा देते हुए रघुवीर सिंह कुशवाह ने कहा कि यह निर्णय उपचुनाव के लिए किए गए एकतरफा चयन के विरोध में लिया गया है। उनका तर्क है कि हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने जमीन पर उतरकर बूथ-बूथ पर मेहनत की थी, लेकिन उनकी भावनाओं को नजरअंदाज किया गया। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश नेतृत्व और संभाग प्रभारियों को दे दी गई है। फिलहाल पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए कुछ लोग धैर्य रखने की बात कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा था। बाद में एक बैंक एफडी धोखाधड़ी मामले में राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी, जिसके चलते यह उपचुनाव आवश्यक हो गया। भाजपा ने इस बार आशुतोष तिवारी के रूप में नए चेहरे पर दांव खेला है, लेकिन यह निर्णय पार्टी के लिए एक बड़ी आंतरिक चुनौती बन गया है।











