इंदौर शहर के पलासिया थाना क्षेत्र में डिजिटल करेंसी USDT के लेनदेन के नाम पर हुई 7 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट का रहस्य महज 36 घंटे के भीतर पुलिस ने खोल दिया है। खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह के 6 सदस्यों को पुलिस की विशेष टीमों ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में इंदौर का एक पेशेवर वकील भी शामिल है। पुलिस की इस तत्परतापूर्ण कार्रवाई में लूटी गई कुल रकम में से 4 लाख 30 हजार रुपये नकद बरामद कर लिए गए हैं, जबकि वारदात में शामिल एक अन्य फरार आरोपी की तलाश में कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है।
साकेत चौराहे पर USDT ट्रेडिंग के बहाने बुना गया जाल
पूरे मामले की शुरुआत अभय तिवारी नाम के शख्स को झांसे में लेने के साथ हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के शातिर दिमाग सदस्यों ने पीड़ित से फोन और व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से संपर्क साधा था। आरोपियों ने अभय को भरोसे में लिया और 7 लाख रुपये मूल्य की USDT क्रिप्टोकरेंसी बेचने का लालच देकर सौदा पक्का कर लिया। सौदा तय होने के बाद आरोपियों ने अभय को नकद रकम के साथ इंदौर के व्यस्त साकेत चौराहे पर बुलाया।
योजना के मुताबिक जैसे ही अभय तिवारी नकद 7 लाख रुपये लेकर तय जगह पर पहुंचे, वहां मौजूद आरोपियों ने नोटों की गिनती करने का बहाना बनाया। पैसों की जांच का झांसा देकर वे पीड़ित को चौराहे के पास मौजूद एक सुनसान और अंधेरी गली में ले गए। इसी दौरान पूर्व नियोजित साजिश के तहत फर्जी अधिकारी बनकर दो अन्य आरोपी अचानक मौके पर धमके।
फर्जी क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर मारपीट और लूट
अंधेरी गली में पहुंचते ही आरोपियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का वरिष्ठ अधिकारी बताया और अवैध लेनदेन का डर दिखाकर पीड़ित के साथ गाली-गलौज व मारपीट शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले और पुलिसिया कार्रवाई के डर से पीड़ित पूरी तरह घबरा गया। इसी घबराहट का फायदा उठाकर आरोपी नोटों से भरा बैग छीनकर मौके से रफूचक्कर हो गए।
घटना के तुरंत बाद पीड़ित अभय तिवारी ने पलासिया थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी सुरेंद्र रघुवंशी ने तुरंत एक्शन लिया और आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की 6 अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया। पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित के बताए शारीरिक हुलिए और विवरण के आधार पर संदिग्धों के स्केच तैयार करवाए और इलाके में नाकेबंदी लागू की।
कैफे के सुराग से भागते हुए आरोपियों तक पहुंची पुलिस
जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए पुलिस टीमों ने क्षेत्र के तमाम CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। इसी तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को बंगाली चौराहे पर स्थित द टी चैप्टर कैफे से एक बेहद महत्वपूर्ण सुराग मिला। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि संदिग्धों का इस कैफे में लगातार आना-जाना बना रहता था और वे यहीं बैठकर अपनी आपराधिक गतिविधियों का ताना-बाना बुनते थे।
CCTV रिकॉर्डिंग और साइबर सेल से मिले तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद पुलिस ने आयुष और कुलदीप नामक दो संदिग्धों की गतिविधियों को चिन्हित किया। पुलिस टीमों ने इन दोनों के मूवमेंट पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी। 7 अगस्त को जब पुलिस ने संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी, तो शशांक और विशाल नामक दो आरोपी बिना नंबर वाली एक्टिवा स्कूटर पर सवार होकर भागने लगे।
खजराना सर्विस रोड पर तेजी से भागने के प्रयास में उनका स्कूटर अनियंत्रित होकर गिर पड़ा, जिससे दोनों घायल हो गए। मौके पर मुस्तैद पुलिस टीम ने तुरंत दोनों को दबोच लिया। घायल अवस्था के कारण पुलिस ने प्राथमिक उपचार के लिए दोनों को MY अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में इलाज के साथ ही CCTV फुटेज से उनके चेहरे का मिलान किया गया, जिससे इस लूट में उनकी सीधी संलिप्तता पूरी तरह साबित हो गई।
गिरोह का आपराधिक ढांचा और शेष राशि की तलाश
MY अस्पताल में कड़ी पूछताछ के दौरान शशांक और विशाल ने लूट की पूरी साजिश का सच उगल दिया। उनकी निशानदेही पर पलासिया पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रेलवे स्टेशन के पास से गिरोह के अन्य सहयोगियों एडवोकेट आशुतोष प्रधान, दीपेश सोलंकी, आयुष सिंह पंवार और कुलदीप सिंह थापा को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम का बंटवारा किया था। शशांक और विशाल का काम पीड़ित अभय को अपनी बातों में फंसाकर घटनास्थल तक लाना था। वहीं एडवोकेट आशुतोष प्रधान और दीपेश सोलंकी का काम नकली क्राइम ब्रांच अफसर बनकर डराना, मारपीट करना और नकदी छीनना था। इसके अलावा कुलदीप और आयुष को पूरी वारदात के दौरान गली के बाहर बैकअप देने और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से लूटी गई रकम में से 4 लाख 30 हजार रुपये नकद बरामद कर लिए हैं। पलासिया थाना प्रभारी सुरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि मामले में शामिल सातवां आरोपी मोनू उर्फ विवेक परदेशी फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी और बाकी बचे 2 लाख 70 हजार रुपये की बरामदगी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।



















