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सिंधिया परिवार की 40 हजार करोड़ की विरासत पर सुलह, क्या होगा बंटवारे का नया आधार?मध्य प्रदेश
9 जुल॰ 2026, 2:41 am (112 दिन पहले)· 5

सिंधिया परिवार की 40 हजार करोड़ की विरासत पर सुलह, क्या होगा बंटवारे का नया आधार?

मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित सिंधिया राजपरिवार का दशकों पुराना संपत्ति विवाद सुलझने के करीब है। दोनों पक्षों ने अदालत में आपसी सहमति का फॉर्मूला पेश किया है।

मध्य प्रदेश के सबसे प्रमुख और शाही परिवारों में गिने जाने वाले सिंधिया राजघराने के बीच चल रहा दशकों पुराना संपत्ति विवाद अब समाप्त होने की दिशा में बढ़ गया है। ग्वालियर के प्रसिद्ध महलों और देश के विभिन्न शहरों में फैली अरबों रुपए की इस शाही संपत्ति के बंटवारे के लिए दोनों पक्षों ने एक साझा सहमति का फॉर्मूला तैयार कर लिया है। इस समझौते को औपचारिक कानूनी मुहर लगवाने के लिए अदालत में पेश कर दिया गया है। वर्षों से चल रही यह कानूनी खींचतान केवल ग्वालियर तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इसका प्रभाव दिल्ली, मुंबई और पुणे की अदालतों में भी देखा जा रहा था। इस विवाद के एक धड़े में ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, जबकि दूसरे पक्ष में उनकी बुआएं वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे शामिल हैं।

अदालत में दाखिल हुआ समझौते का प्रस्ताव

परिवार के इन दोनों ही पक्षों ने अब इस लंबे विवाद को आपसी बातचीत के जरिए खत्म करने का निर्णय लिया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के कानूनी प्रतिनिधियों ने ग्वालियर जिला अदालत में महत्वपूर्ण आवेदन प्रस्तुत किए हैं। बंटवारे की शर्तों को स्पष्ट करने वाले दस्तावेजों को भी कोर्ट में सौंपा गया है ताकि पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध बनाया जा सके। इस कदम से उम्मीद है कि अदालत में लंबित चल रहे एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे। दोनों पक्षों की यह मंशा है कि कोर्ट इस मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई पूरी करे, जिससे तैयार किए गए फॉर्मूले को अंतिम स्वीकृति मिल सके और संपत्ति का विवाद हमेशा के लिए सुलझ जाए।

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क्या है समझौते का मुख्य आधार?

सामने आई जानकारियों के अनुसार, यह समझौता सभी पक्षों की सहमति से तैयार किया गया है। इसके तहत एक व्यवहारिक रास्ता निकाला गया है कि वर्तमान में जिस संपत्ति पर जिसका कब्जा है, वही उसका कानूनी मालिक माना जाएगा। पहले चाहे वह संपत्ति किसी ट्रस्ट या कंपनी के नाम पर क्यों न दर्ज हो, समझौते के बाद वर्तमान स्थिति को ही मालिकाना हक का आधार बनाया जाएगा और कोर्ट में इसके अनुसार डीड तैयार कराई जाएगी।

ट्रस्टों के अधीन है अधिकांश संपत्ति

सिंधिया परिवार की संपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा सीधे व्यक्तिगत स्वामित्व में न होकर विभिन्न संस्थाओं के अंतर्गत आता है। इनमें सर जयाजीराव ट्रस्ट और कृष्ण माधव ट्रस्ट मुख्य रूप से शामिल हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब राजमाता विजयराजे सिंधिया और उनके बेटे माधवराव सिंधिया के बीच वैचारिक और पारिवारिक मतभेद खुलकर सामने आए थे। यह सिलसिला अगली पीढ़ी तक भी जारी रहा, जहाँ माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच कानूनी जंग छिड़ गई थी।

40 हजार करोड़ की विशाल विरासत

इस शाही परिवार के पास संपत्तियों का एक विशाल साम्राज्य है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत 40 हजार करोड़ रुपए बताई जाती है। इसमें ग्वालियर का ऐतिहासिक जय विलास पैलेस, उषा किरण पैलेस और शिवपुरी का माधव पैलेस शामिल है। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की अन्य अचल संपत्तियों के अलावा दिल्ली, मुंबई, उज्जैन और पुणे जैसे बड़े शहरों में भी परिवार की बहुमूल्य जमीनें और भवन स्थित हैं।

सवाल-जवाब

सिंधिया परिवार की कुल संपत्ति कितनी बताई जा रही है?
रिपोर्ट्स के अनुसार सिंधिया राजपरिवार की कुल संपत्ति का मूल्य लगभग 40 हजार करोड़ रुपए है।
विवाद के मुख्य पक्षकार कौन हैं?
इस विवाद में एक तरफ ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, जबकि दूसरी तरफ उनकी बुआएं वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे हैं।
समझौते का आधार क्या तय किया गया है?
समझौते के अनुसार, वर्तमान में जिस संपत्ति पर जिसका कब्जा है, उसे ही उसका कानूनी मालिक माना जाएगा।
किन ट्रस्टों के नाम संपत्ति दर्ज है?
परिवार की ज्यादातर संपत्तियां सर जयाजीराव ट्रस्ट और कृष्ण माधव ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के अधीन हैं।
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