मध्य प्रदेश में उज्जैन और इंदौर को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर मंगलवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया, जब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत संचालित एक यात्री बस में अचानक भीषण आग लग गई। रामवासा के समीप हुए इस घटनाक्रम में देखते ही देखते पूरी बस लपटों से घिर गई और जलकर कंकाल में बदल गई। गनीमत यह रही कि वाहन के भीतर धुआं और लपटें उठते ही सभी सवार फुर्ती दिखाते हुए नीचे उतर गए, जिससे किसी भी मुसाफिर को गंभीर चोट या जान का नुकसान नहीं हुआ। हादसे के तुरंत बाद सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और वाहनों की आवाजाही थम गई। इससे पहले ग्वालियर से भोपाल की यात्रा पर निकली एक अन्य बस भी इसी तरह पूरी तरह खाक हो गई थी, जिसमें करीब 25 मुसाफिर सफर कर रहे थे।
रामवासा के पास अचानक फटा टायर, 12 मुसाफिरों की बची जान
यह बस उज्जैन बस स्टैंड से इंदौर शहर की ओर रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान दोपहर करीब 12:15 बजे, जब गाड़ी उज्जैन से तकरीबन 15 किलोमीटर की दूरी तय कर रामवासा इलाके के पास पहुंची, तो उसका एक टायर अचानक जोरदार आवाज के साथ फट गया। पहिया फटने के कारण चालक का बस पर से नियंत्रण डगमगा गया और उसी दौरान वाहन के निचले हिस्से में तेजी से आग भड़क उठी। आग ने पलक झपकते ही पूरी गाड़ी को अपनी जद में ले लिया। हादसे के वक्त वाहन के अंदर करीब 12 यात्री मौजूद थे। जैसे ही केबिन में धुआं घुसा और आग की लपटें दिखाई दीं, यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। सभी सवार आनन-फानन में खिड़कियों और दरवाजों की ओर भागे और लपटों के विकराल होने से पहले सुरक्षित सड़क पर कूदने में सफल रहे।
दमकल टीमों ने 90 मिनट में पाया काबू, ढांचा ही बचा
हादसे को देखकर आसपास के स्थानीय निवासी और सड़क किनारे मौजूद दुकानदार सबसे पहले मदद के लिए दौड़े। सरकारी इमर्जेंसी सहायता मौके पर पहुंचने से पहले इन लोगों ने बाल्टियों और उपलब्ध साधनों से आग पर काबू पाने की भरसक कोशिश की। सूचना मिलने के तकरीबन 45 मिनट बाद दमकल विभाग की चार गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं। फायर ब्रिगेड कर्मियों को पानी की लगातार बौछारें डालकर लपटों को पूरी तरह बुझाने में करीब 90 मिनट का कड़ा परिश्रम करना पड़ा। जब तक आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया गया, तब तक बस अंदर और बाहर से पूरी तरह स्वाहा हो चुकी थी और सड़क पर सिर्फ उसका लोहे का ढांचा (चेसिस) ही बचा रह गया। इसके बाद पुलिस दल ने मौके पर पहुंचकर यातायात को नियंत्रित किया और घटना स्थल की घेराबंदी कर पड़ताल शुरू की।
जांच के घेरे में तकनीकी पहलू और गाड़ी का मालिकाना हक
प्राथमिक तौर पर टायर फटने को ही आग फैलने का मुख्य ट्रिगर माना जा रहा है, परंतु प्रशासनिक और तकनीकी जांच अधिकारियों ने अभी तक किसी अंतिम नतीजे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस महकमे के साथ-साथ परिवहन विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ इस बिंदु पर गहन जांच कर रहे हैं कि आग केवल पहिए के घर्षण से लगी या इसके पीछे कोई गंभीर मैकेनिकल खराबी अथवा इलेक्ट्रिकल शॉर्ट-सर्किट भी जिम्मेदार था। इसके अलावा बस के मालिकाना दस्तावेजों और उसकी आधिकारिक ब्रांडिंग को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बात की छानबीन की जा रही है कि क्या दुर्घटनाग्रस्त बस सीधे योजना के अंतर्गत अनुबंधित थी या फिर यह सरकारी स्कीम के विशेष परमिट व लाइसेंस की आड़ में चलाई जा रही कोई निजी बस थी।
21 साल बाद बहाल हुई सरकारी बस सेवा पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश में राज्य स्तरीय सार्वजनिक बस संचालन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए सरकार ने 25 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की थी। इस महत्वाकांक्षी पहल के जरिए राज्य में सरकारी बस सेवाओं के 21 साल के लंबे विराम को खत्म किया गया था। इस योजना के शुरुआती चरण में इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे प्रमुख नगरों के मार्गों पर 351 बसें उतारी गई थीं। नई शुरुआत के कुछ ही हफ्तों के भीतर इस योजना से संबद्ध बस में इस तरह की भीषण आग लगना सुरक्षा और वाहनों के फिटनेस मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सेवा के पुनः प्रारंभ होने के बाद यह इस तरह का पहला बड़ा सुरक्षा संकट सामने आया है।





















