पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड ने फरवरी और मार्च 2027 के सत्र में आयोजित होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की नियमित बोर्ड परीक्षाओं के लिए परीक्षा फॉर्म भरने और शुल्क भुगतान की विस्तृत समयसारिणी घोषित कर दी है। राज्य भर के संबद्ध और मान्यता प्राप्त विद्यालयों को बोर्ड की आधिकारिक प्रणाली में अपने स्कूल लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके इस पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समय पर पूरा करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। बोर्ड प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की तैयारियों को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के मकसद से यह अग्रिम कार्यक्रम साझा किया गया है ताकि किसी भी स्तर पर छात्रों के पंजीकरण में देरी न हो।
स्कूलों के आधिकारिक लॉगिन पर उपलब्ध कराया गया पूरा विवरण
एसएएस नगर स्थित बोर्ड के मुख्य कार्यालय से 5 अक्टूबर को जारी की गई आधिकारिक सूचना के अनुसार, नियमित छात्रों के परीक्षा फॉर्म भरने तथा उससे संबंधित शुल्क जमा करने की पूरी रूपरेखा संस्थागत लॉगिन आईडी पर अपलोड कर दी गई है। सभी संबंधित संस्थानों और विद्यालयों के प्रबंधकों को अपने निर्धारित पासवर्ड और आईडी की मदद से पोर्टल पर जाकर समयसीमा और आवश्यक दिशा-निर्देशों की जांच करने को कहा गया है। बोर्ड ने दोहराया है कि हर पात्र विद्यार्थी का विवरण सही समय पर सत्यापित होकर मुख्य प्रणाली में दर्ज होना चाहिए ताकि आगे चलकर प्रवेश पत्र जारी करने या परीक्षा केंद्र आवंटन में किसी तरह की तकनीकी रुकावट न आए।
लापरवाही पर स्कूल मुखियाओं की सीधी जवाबदेही तय
इस बार पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड ने केवल तारीखों का ऐलान करने तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोताही होने पर सीधे स्कूल प्रमुखों की जिम्मेदारी तय कर दी है। बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक, यदि कोई संस्थान तय समयसीमा के भीतर विद्यार्थियों के परीक्षा फॉर्म और शुल्क से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने में नाकाम रहता है, तो उस विफलता या विलंब के लिए पूरी तरह से स्कूल प्रशासन और उसके प्रमुख को उत्तरदायी माना जाएगा। छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए यह सख्त रुख अपनाया गया है ताकि प्रशासनिक ढिलाई का खामियाजा परीक्षा में बैठने वाले छात्र-छात्राओं को न भुगतना पड़े।
संबद्धता नियमों के तहत निजी संस्थानों पर कसा जाएगा शिकंजा
गैर-सरकारी अथवा संबद्ध स्कूलों के संदर्भ में बोर्ड ने कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाने की चेतावनी दी है। यदि कोई निजी संस्थान तय कार्यक्रम के अनुसार औपचारिकताएं पूरी नहीं करता है, तो बोर्ड के एफिलिएशन रेगुलेशन और मौजूदा प्रशासनिक प्रावधानों के तहत संस्थान के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। बोर्ड का मानना है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील विषय में निर्धारित कैलेंडर की अनदेखी को स्वीकार नहीं किया जा सकता, इसलिए नियम तोड़ने वाले संस्थानों को कारण बताओ नोटिस और संबद्धता से जुड़े नियमों के तहत जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा।
सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों पर होगी विभागीय कार्रवाई
सरकारी शिक्षण संस्थानों के लिए भी बोर्ड ने कार्रवाई का एक पारदर्शी तंत्र तैयार किया है। अगर कोई सरकारी स्कूल तय समयसीमा के भीतर 10वीं या 12वीं के परीक्षा फॉर्म और फीस जमा करने की प्रक्रिया पूरी करने में असफल रहता है, तो उसका मामला सीधे स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को प्रेषित किया जाएगा। ऐसे मामलों की पूरी रिपोर्ट डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन, सेकेंडरी अथवा एलीमेंट्री के पास भेजी जाएगी। इसके पश्चात संबंधित सक्षम प्राधिकारी विभागीय नियमावली के आधार पर दोषी पाए जाने वाले प्रिंसिपल या हेड टीचर के विरुद्ध आवश्यक विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाएंगे। इससे साफ है कि सरकारी तंत्र में भी इसे केवल एक सामान्य कागजी कार्रवाई मानकर टालने की अनुमति किसी भी अधिकारी को नहीं होगी।





















