अमेरिका में आसमान छूती ईंधन कीमतों के बीच कृषि, ढुलाई और भारी उद्योगों को आर्थिक दबाव से बचाने के लिए एक अहम नीतिगत फैसला लिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैक्स छूट वाले लाल रंग के डीजल (रेड-डाइड डीजल) के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को अस्थायी तौर पर आसान बनाने का आदेश जारी किया है। जब देश भर में पारंपरिक ईंधन के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं, तब इस कदम का सीधा मकसद भारी मशीनरी चलाने वाले किसानों, मालवाहक ट्रांसपोर्टरों और निर्माण कार्यों में लगी कंपनियों के ईंधन बिल को नीचे लाना है।
कार्यकारी आदेश और टैक्स टालने की समयसीमा
इस फैसले के तहत 5 अक्टूबर को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके जरिए संघीय सरकार को सार्वजनिक सड़कों पर इस्तेमाल होने वाले लाल डीजल पर लगने वाले टैक्स को फिलहाल टालने (डिफर करने) की मंजूरी दी गई है। यह टैक्स राहत 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को इस बात की समीक्षा करने का भी निर्देश दिया गया है कि भविष्य में इस टाली गई टैक्स देनदारी को पूरी तरह कैसे खत्म किया जा सकता है, हालांकि इसे तत्काल प्रभाव से पूरी तरह माफ नहीं किया गया है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बुनियादी गतिविधियों में डीजल की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। लंबी दूरी की माल ढुलाई, फसलों की बुआई व कटाई, बड़े निर्माण प्रोजेक्ट और औद्योगिक संयंत्र पूरी तरह इसी ईंधन की आपूर्ति पर निर्भर रहते हैं। ऐसी स्थिति में जब डीजल की दरें तेजी से चढ़ती हैं, तो ढुलाई भाड़ा और मशीनरी संचालन का खर्च सीधे तौर पर बढ़ जाता है। सप्लाई में आई रुकावटों, तेल शोधन (रिफाइनरी) सीमाओं और भू-राजनीतिक तनावों के कारण देश में डीजल के दाम 6.50 डॉलर प्रति गैलन के करीब पहुंच गए थे, जिससे समूची सप्लाई चेन पर भारी दबाव बन गया था।
लाल डीजल का ढांचा और नियमों में ढील
सामान्य परिस्थितियों में लाल रंग का डीजल केवल गैर-सड़क (ऑफ-रोड) कार्यों के लिए ही बेचा जाता है। पारंपरिक सड़क उपयोग वाले डीजल पर लागू होने वाला संघीय हाईवे ईंधन टैक्स इस पर नहीं लगाया जाता है। यही वजह है कि यह ईंधन मुख्य रूप से खेतों में चलने वाले ट्रैक्टरों, कंबाइन हार्वेस्टर, निर्माण उपकरणों, बड़े जेनरेटरों और ऐसी मशीनों में काम आता है जो सार्वजनिक सड़कों पर आवाजाही नहीं करतीं। इसमें मिलाया जाने वाला लाल रंग केवल उसके अलग टैक्स दर्जे को दर्शाता है, यानी यह किसी अलग श्रेणी या गुणवत्ता का ईंधन नहीं होता, बल्कि वही मानक डीजल होता है। हाईवे टैक्स न लगने के कारण यह आम डीजल की तुलना में काफी सस्ता बिकता है, और इसका लाल रंग जांच एजेंसियों को नियमों के उल्लंघन और गलत इस्तेमाल को तुरंत पकड़ने में मदद करता है।
नए आदेश के तहत ट्रेजरी विभाग को यह तय करने का दायित्व सौंपा गया है कि टैक्स टालने की यह प्रक्रिया व्यवहार में किस तरह काम करेगी। यह निर्देश 5 अक्टूबर से लेकर 31 दिसंबर 2026 के बीच इस्तेमाल होने वाले पात्र ईंधन पर लागू रहेगा। इसके अतिरिक्त, आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस) को यह भी निर्देश दिया गया है कि इस अवधि के दौरान लाल डीजल का सार्वजनिक सड़कों पर अस्थायी उपयोग करने वालों को लगने वाले जुर्माने से राहत प्रदान की जाए।
स्थायी छूट नहीं, आगे के विकल्पों पर होगी पड़ताल
यह व्यवस्था संघीय डीजल टैक्स को स्थायी तौर पर खत्म नहीं करती है। इसके बजाय, यह चुनिंदा कार्यों के लिए सड़कों पर चलने वाले लाल डीजल के टैक्स संग्रहण को केवल कुछ समय के लिए आगे बढ़ाती है। प्रशासन ने ट्रेजरी विभाग को यह भी निर्देश दिया है कि वह विधायी बदलावों समेत ऐसे तमाम कानूनी विकल्पों की पड़ताल करे, जिनके माध्यम से इस टाली गई देनदारी को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके। किसी भी स्थायी बदलाव के लिए मौजूदा कार्यकारी आदेश के अलावा अतिरिक्त विधायी व प्रशासनिक मंजूरियों की आवश्यकता होगी।
खेती के क्षेत्र में बुआई और कटाई के व्यस्त मौसम के दौरान डीजल का खर्च किसानों की जेब पर सबसे बड़ा बोझ बनता है। बढ़ते दामों के चलते ट्रैक्टर, कंबाइन और अन्य कृषि उपकरण चलाना लगातार महंगा होता जा रहा था। इसी तरह का दबाव माल ढुलाई कंपनियों पर भी देखा जा रहा था, क्योंकि लंबी दूरी के ट्रक और स्थानीय आपूर्ति वाहन दोनों ही डीजल की खपत पर टिके हैं। नए फैसले से सड़कों पर लाल डीजल के अस्थायी उपयोग की अनुमति मिलने से कई प्रमुख क्षेत्रों को तत्काल नकदी प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी।



















