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धनतेरस पर मुंबई में 697 परिवारों का चमका भाग्य, महाराष्ट्र सरकार ने सौंपी नए आशियाने की चाबियांमहाराष्ट्र
6 नव॰ 2026, 4:38 pm (2 घंटे पहले)· 0

धनतेरस पर मुंबई में 697 परिवारों का चमका भाग्य, महाराष्ट्र सरकार ने सौंपी नए आशियाने की चाबियां

महाराष्ट्र सरकार ने धनतेरस के मौके पर मुंबई के 697 परिवारों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी हैं। इनमें एनएम जोशी मार्ग बीडीडी चॉल के 557 निवासी और कोलाबा के सफाई कर्मचारी शामिल हैं।

धनतेरस के पावन अवसर पर महाराष्ट्र सरकार की तरफ से मुंबई के 697 लाभार्थियों को उनके सपनों के आशियाने की चाबियां सौंपी गईं। यह आवास दो अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत प्रदान किए गए हैं। मुंबई के लोअर परेल क्षेत्र में स्थित एनएम जोशी मार्ग बीडीडी चॉल के 557 निवासियों को 2 BHK फ्लैट मिले हैं, जबकि आश्रय योजना के तहत कोलाबा के सफाई कर्मचारियों को भी उनके नए घरों की चाबियां दी गई हैं।

जर्जर और तंग मकानों से मुक्ति

दशकों से तंग, जीर्ण-शीर्ण और छोटे आवासों में जीवन गुजार रहे परिवारों के लिए यह किसी चमत्कारों से कम नहीं है। नए फ्लैट मिलने पर लाभार्थियों ने महाराष्ट्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान सरकार की तरफ से दोहराया गया कि मुंबई को मलिन बस्ती मुक्त बनाने और भूमिपुत्रों को महानगर में ही पक्का मकान उपलब्ध कराने का अभियान निरंतर जारी रहेगा।

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कॉमन टॉयलेट से लेकर आधुनिक 2 BHK फ्लैट तक का सफर

मुंबई के लोअर परेल स्थित एनएम जोशी मार्ग बीडीडी चॉल में रहने वाले 557 परिवारों के पुनर्विकास की यह कहानी काफी लंबी रही है।

  • मंजूरी और विस्थापन: करीब चार साल पहले इस पुनर्विकास योजना को हरी झंडी मिली थी और कार्य आरंभ हुआ था। पुरानी इमारतों को गिराकर नए सिरे से निर्माण कराने के वास्ते निवासियों को अन्य स्थानों पर भेजा गया था।
  • किराए का भुगतान: इस अंतराल के दौरान म्हाडा की तरफ से निवासियों को लगातार चार साल तक किराए की राशि दी जाती रही, जिससे वे अस्थायी ठिकानों पर रह सके।
  • सरकारी एजेंसी की भूमिका: इस पुनर्विकास का जिम्मा किसी निजी बिल्डर को देने के बजाय महाराष्ट्र सरकार ने अपनी सरकारी हाउसिंग एजेंसी म्हाडा यानी महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के हवाले किया।
  • पुराना संघर्ष: पहले इन चॉल में लोग केवल 160 स्क्वायर फीट के एक कमरे वाले तंग घरों में रहते थे जहाँ व्यक्तिगत शौचालय नहीं होता था और प्रत्येक मंजिल पर साझा टॉयलेट का उपयोग करना पड़ता था।
  • पीढ़ियों का इंतजार: कई परिवारों ने इन चॉल में 15 से 50 साल बिता दिए थे और उनकी दूसरी-तीसरी पीढ़ी भी वहीं पल बढ़ रही थी, जिन्हें अब जाकर 500 स्क्वायर फीट का विशाल 2 BHK फ्लैट मिला है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अपील

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने संबोधन में कहा कि मुंबई की इन ऐतिहासिक चॉल में रहने वाले मराठी मानुस ने अपनी संस्कृति और इतिहास को संजोकर रखा है और आज उन्हें उनके सपनों का घर मिल गया है। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों से विशेष आग्रह किया कि वे अपने नए मकानों को बेचकर अन्यत्र रहने के लिए बिल्कुल न जाएं।

वहीं दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जानकारी दी कि महायुति सरकार ने बीडीडी चॉल परियोजना के तहत 557 लोगों को आवास सौंपे हैं। इसके साथ ही आश्रय योजना के अंतर्गत कोलाबा में 140 सफाई कर्मचारियों को भी 300 स्क्वायर फीट के फ्लैट की चाबियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि तड़के उठकर महानगर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले इन कर्मठ कर्मचारियों को भी सरकार ने उनका हक दिलाया है और यह पूरी प्रक्रिया विभिन्न चरणों में पूरी की जा रही है।

वर्ष 2029 तक पूरे बीडीडी चॉल के कायाकल्प का लक्ष्य

महाराष्ट्र सरकार ने आने वाले समय के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। सरकार का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2029 तक मुंबई के वर्ली, नायगांव और अन्य तमाम हिस्सों में फैली बीडीडी चॉल का पुनर्विकास पूरी तरह से संपन्न करना है। इस पूरी योजना के तहत सरकार का प्रयास है कि जो लोग पहले बेहद छोटे 160 स्क्वायर फीट के कमरों में रहने को विवश थे, उन्हें 500 स्क्वायर फीट के आधुनिक और सुविधायुक्त बड़े मकान मिल सकें। म्हाडा के माध्यम से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य महानगर को स्लम मुक्त बनाना और गरीबों के साथ भूमिपुत्रों को सम्मानित जीवन देना है।

सवाल-जवाब

धनतेरस के अवसर पर कुल कितने परिवारों को मकान मिले?
धनतेरस के शुभ अवसर पर मुंबई के कुल 697 परिवारों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी गईं।
एनएम जोशी मार्ग बीडीडी चॉल के कितने लोगों को आवास मिला?
लोअर परेल स्थित एनएम जोशी मार्ग बीडीडी चॉल के 557 निवासियों को 2 BHK मकान मिले हैं।
आश्रय योजना के तहत किसे मकान दिए गए हैं?
आश्रय योजना के अंतर्गत कोलाबा क्षेत्र के 140 सफाई कर्मचारियों को 300 स्क्वायर फीट के मकानों की चाबियां सौंपी गई हैं।
पुनर्विकास परियोजना का निर्माण किस एजेंसी द्वारा किया गया है?
यह पुनर्विकास कार्य महाराष्ट्र सरकार की हाउसिंग एजेंसी म्हाडा यानी महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा कराया गया है।
पुराने बीडीडी चॉल के मकानों का क्षेत्रफल कितना था?
पुराने बीडीडी चॉल में लोग महज 160 स्क्वायर फीट के छोटे से वन रूम किचन मकान में रहते थे।
महाराष्ट्र सरकार का बीडीडी चॉल पुनर्विकास पूरा करने का लक्ष्य कब तक है?
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक मुंबई की वर्ली, नायगांव और अन्य जगहों की बीडीडी चॉल का पुनर्विकास पूरा करना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

160 वर्ग फीट से सीधे 2 बीएचके! सच में इन परिवारों के लिए इस बार की दिवाली और धनतेरस जिंदगीभर याद रहेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन भाई, सालों से कोर्ट और पुलिस थानों के चक्कर काटने वाले इन परिवारों का दर्द हम समझ सकते हैं, आज इन्हें असली राहत मिली है।

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