केरल हाईकोर्ट ने कोच्चि में हुए बहुचर्चित मिनी कूपर हादसे से जुड़े मामले में एक अहम और बड़ा फैसला सुनाया है। इस दर्दनाक सड़क दुर्घटना में तीन युवाओं की जान चली गई थी, जिसके बाद से ही मामले को लेकर जनता और परिजनों में भारी गुस्सा था। अब अदालत ने इस मामले के सभी चारों आरोपियों को जमानत दे दी है, हालांकि मुख्य आरोपी सुहैल सजीव को अभी कुछ और दिन जेल में ही बिताना होगा। कोर्ट ने मुख्य आरोपी की रिहाई पर दस दिन की रोक लगा रखी है ताकि जांच एजेंसियां अपनी प्रक्रिया पूरी कर सकें। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा केरल हाईकोर्ट की उस सख्त टिप्पणी की हो रही है जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक फैसले जनता की भावनाओं या समाज में व्याप्त गुस्से के आधार पर तय नहीं किए जाते हैं। हादसे के बाद से ही आरोपी के रवैये को लेकर लोगों में काफी आक्रोश था और इस अदालती फैसले ने एक बार फिर इस दुर्घटना को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
न्यायिक प्रक्रिया और आरोपियों की रिहाई के आदेश
जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने सुहैल सजीव और उनके साथ तीन अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मुख्य आरोपी के अलावा अन्य तीन आरोपियों की पहचान निनव, जोयल एंटो और अमीन शाह के तौर पर हुई है। अदालत ने इन तीनों अन्य आरोपियों को तत्काल प्रभाव से जेल से रिहा करने का निर्देश दिया है। वहीं उन्नीस साल के मुख्य आरोपी सुहैल सजीव को दस दिन और हिरासत में रहना होगा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को जानकारी दी कि इस मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और इसे आगामी दो सप्ताह के भीतर मुकम्मल किया जा सकता है। बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी थी कि सभी आरोपी उन्नीस साल के युवा छात्र हैं और लंबी न्यायिक हिरासत में रहने की वजह से उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है, हालांकि अभियोजन पक्ष ने जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध किया था।
जनभावनाएं जमानत का आधार नहीं बन सकतीं
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यह हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था जिसमें तीन निर्दोष लोगों की जान चली गई, लेकिन अदालत को अपना फैसला हमेशा कानून और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के दायरे में रहकर ही करना होता है। अदालत ने कहा कि किसी खास घटना को लेकर लोगों की भावनाएं कितनी भी तीव्र या आक्रामक क्यों न हों, वे अदालतों में जमानत मिलने का आधार तय नहीं कर सकती हैं। न्यायाधीश ने इस दौरान जांच में अब तक इकट्ठा किए गए विभिन्न सबूतों और दस्तावेजों की भी जानकारी तलब की, ताकि यह समझा जा सके कि मामले में पुलिस और जांचकर्ताओं के पास अब तक क्या ठोस सामग्री उपलब्ध है।
ग्यारह अक्टूबर को हुआ था दर्दनाक हादसा
यह भीषण दुर्घटना ग्यारह अक्टूबर की सुबह नेडुंबस्सेरी के नजदीक हुई थी। पुलिस के अनुसार सुहैल शराब के नशे की हालत में अत्यधिक तेज रफ्तार से मिनी कूपर कार चला रहा था। अनियंत्रित कार ने सड़क पर चल रहे एक स्कूटर को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस भयंकर हादसे में करीब इक्कीस साल की दो महिलाओं और एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के तुरंत बाद मुख्य आरोपी सुहैल की तरफ से कथित तौर पर कुछ ऐसी टिप्पणियां सामने आई थीं जिनसे विवाद और ज्यादा बढ़ गया था। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक उसने कथित तौर पर कहा था कि सड़कें गाड़ियां चलाने के लिए ही बनाई जाती हैं और उसके पिता इस पूरे मामले को आसानी से संभाल लेंगे। इन बयानों और टिप्पणियों ने जनता के बीच गुस्से को और भड़का दिया था।
बीएमडब्ल्यू की तकनीकी जांच में सामने आई सचमुच की रफ्तार
इस पूरे मामले की कानूनी जांच में कार की तकनीकी रिपोर्ट सबसे बड़ा और अहम सबूत बनकर उभरी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मिनी कूपर गाड़ी बनाने वाली कंपनी बीएमडब्ल्यू ने इस दुर्घटनाग्रस्त कार के क्रैश डेटा की तकनीकी जांच की थी। उस तकनीकी रिपोर्ट में हैरान करने वाली बात सामने आई कि टक्कर होने से ठीक पांच सेकंड पहले कार की रफ्तार लगभग एक सौ बासठ किलोमीटर प्रति घंटा थी। इसके अलावा टक्कर होने से लगभग एक सेकंड पहले ही गाड़ी में ब्रेक लगाए गए थे, और उस ऐन वक्त पर भी कार एक सौ चवालीस किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से दौड़ रही थी।
सीसीटीवी फुटेज और क्रैश डेटा से पुष्टि
पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि इस हादसे से जुड़े सीसीटीवी फुटेज में भी गाड़ी की अत्यधिक तेज रफ्तार साफतौर पर नजर आई थी। फुटेज के विश्लेषण से पता चला कि कार ने महज ग्यारह सेकंड के भीतर पांच सौ मीटर की लंबी दूरी तय कर ली थी। इसके अलावा कार के एडवांस्ड क्रैश सेफ्टी मॉड्यूल से निकाले गए डेटा ने भी पुलिस की इस जांच को पुख्ता तकनीकी आधार प्रदान किया है। इस तमाम तकनीकी और दस्तावेजी सबूतों के बीच फिलहाल पुलिस इस मामले की अन्य कड़ियों को जोड़ने के लिए अपनी जांच को लगातार आगे बढ़ा रही है।

















