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ज्ञानेश कुमार के पद न छोड़ने पर मुंबई से शुरू होगा देशव्यापी आंदोलन, कॉकरोच जनता पार्टी की चेतावनीमहाराष्ट्र
25 सित॰ 2026, 12:20 pm (1 दिन पहले)· 1

ज्ञानेश कुमार के पद न छोड़ने पर मुंबई से शुरू होगा देशव्यापी आंदोलन, कॉकरोच जनता पार्टी की चेतावनी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद छोड़ने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने दो अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। पार्टी संयोजक अभिजीत दिपके ने चुनाव आयोग के साथ ही विपक्षी दलों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग को लेकर सामने आई नई जानकारियों के बाद विभिन्न राजनीतिक हलकों से उनके पद छोड़ने की मांग उठाई जा रही है। इसी कड़ी में अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी खुलकर सामने आ गई है और उसने आयोग के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ सीधे मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि ज्ञानेश कुमार अपने पद से नहीं हटते हैं, तो इसके विरोध में पूरे देश में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जाएंगे।

दो अक्टूबर को मुंबई से आंदोलन का बिगुल

कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर स्थिति स्पष्ट करते हुए आंदोलन की रूपरेखा साझा की। उनका कहना है कि यदि ज्ञानेश कुमार कल तक अपना इस्तीफा नहीं सौंपते हैं, तो उनकी पार्टी 2 अक्टूबर को मुंबई से अपने देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत कर देगी।

दिपके ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन केवल महाराष्ट्र की राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से भारत के कई अन्य प्रमुख शहरों में भी ले जाया जाएगा। उन्होंने गांधी जयंती के मौके पर लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए नागरिकों और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा रखने वालों को इस मुहिम से जुड़ने की बात कही है।

विपक्षी दलों की चुनावी भागीदारी पर तीखे सवाल

चुनाव आयोग के प्रमुख पर निशाना साधने के साथ ही अभिजीत दिपके ने मुख्यधारा के विपक्षी दलों की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राजनीतिक दल केवल अपनी प्रासंगिकता और अस्तित्व बनाए रखने के लिए ऐसी चुनावी प्रक्रियाओं में शामिल हो रहे हैं, जिन पर निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल हैं।

दिपके के मुताबिक, धांधली भरे माहौल में मतदान में लगातार हिस्सा लेते रहने से असल में एक अमान्य और दूषित व्यवस्था को ही कानूनी और नैतिक वैधता मिल जाती है। उन्होंने तर्क दिया कि बार-बार चुनाव में शामिल होकर विपक्षी दल जनता के बीच यह गलत भ्रम बनाए रखने में अनजाने में मदद करते हैं कि देश में चुनाव बिल्कुल स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो रहे हैं।

विधायकों की खरीद-फरोख्त और अस्तित्व का संकट

अभिजीत दिपके ने अपने वक्तव्य में विपक्षी खेमे के डर और चिंताओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि दल इस आशंका से चुनाव लड़ते रहते हैं कि बाहर बैठने से उनका राजनीतिक वजूद खत्म हो जाएगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि जब वोटों की कथित चोरी हो रही हो, सांसदों और विधायकों को तोड़ा जा रहा हो और मूल राजनीतिक दलों को विभाजित किया जा रहा हो, तब ऐसी भागीदारी से किसी अस्तित्व की रक्षा नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि यह कोई वास्तविक राजनीतिक जीवन नहीं है, बल्कि एक ऐसे ढांचे में बने रहने का समझौता मात्र है जो जब चाहे किसी भी दल को कमजोर कर सकता है, उसके टुकड़े कर सकता है या जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को छीन सकता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि आखिर कोई भी राजनीतिक दल इस तरह की परिस्थितियों में कब तक अपना अस्तित्व बचाए रख सकता है।

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सवाल-जवाब

कॉकरोच जनता पार्टी ने किसके इस्तीफे की मांग की है?
कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कब और कहां से शुरू करने का ऐलान किया गया है?
यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
यह घोषणा किसने और किस माध्यम से की?
यह घोषणा कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की।
अभिजीत दिपके ने विपक्षी दलों पर क्या आरोप लगाया?
दिपके ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल अपना अस्तित्व बचाने के लिए धांधली वाले चुनावों में भाग लेकर उन्हें वैधता प्रदान कर रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन का दायरा किन क्षेत्रों तक रहेगा?
यह प्रदर्शन 2 अक्टूबर को मुंबई से शुरू होकर देश के अन्य प्रमुख शहरों तक ले जाया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·15 घंटे पहले

पार्टी का नाम ही इतना अजीब है कि सीरियस बात पर भी ध्यान हट जाता है यार।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

चुनाव आयोग पर लगातार उठते सवाल बाजार और निवेशकों का भरोसा डिगाते हैं। पारदर्शिता के बिना ऐसा माहौल ठीक नहीं है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·1 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात सही है, अमेरिकी चुनाव बाजारों में भी पारदर्शिता की ऐसी ही बहस देखी जाती है जब संस्थाओं पर सवाल उठते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, और अब मुंबई से दो अक्टूबर को आंदोलन की बात सामने आ रही है। अगर नेता और पार्टियां सिर्फ अस्तित्व बचाने के लिए चुनाव लड़ती रहेंगी, तो व्यवस्था के खिलाफ आवाज कौन उठाएगा?

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

करन भाई, बात तो सही है, पर सवाल यह है कि चुनाव का बायकॉट करने से क्या सच में कोई बदलाव आएगा?

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