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कर्जमाफी और सूखे के मुआवजे को लेकर मुंबई कूच, वर्षा बंगले पर मुख्यमंत्री से जवाब मांगेंगे किसानमहाराष्ट्र
26 अक्तू॰ 2026, 9:38 pm (1 घंटे पहले)· 2

कर्जमाफी और सूखे के मुआवजे को लेकर मुंबई कूच, वर्षा बंगले पर मुख्यमंत्री से जवाब मांगेंगे किसान

सूखा राहत, कृषि ऋण माफी और योजनाओं के बकाए को लेकर अकोले से मुंबई के लिए विशाल वाहन मार्च शुरू हुआ है, जिसमें हजारों किसान और ग्रामीण मजदूर शामिल हैं।

महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में गहराते संकट और अनसुलझी मांगों को लेकर हजारों आंदोलनकारी राजधानी मुंबई की ओर बढ़ रहे हैं। अकोले से शुरू हुए इस विशाल वाहन मार्च में किसानों के साथ-साथ खेतिहर मजदूर और विभिन्न ग्रामीण योजनाओं से जुड़े कर्मी शामिल हैं, जिनका मकसद सीधे मुख्यमंत्री के आवास वर्षा बंगले तक अपनी बात पहुंचाना है। इस मुहिम में राज्य के 20 से ज्यादा जिलों से पहुंचे करीब 12,000 प्रदर्शनकारी शामिल हैं, जो लगभग 1,000 गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ निकले हैं।

सड़क पर उतरा जनसैलाब, लाल झंडों के साथ मार्च का आगाज

वाहनों का यह सफर शुरू होने से पूर्व अकोले नगर में लाल झंडे थामे कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकाला। इस रैली का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, संगठन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विजू कृष्णन, राष्ट्रीय सहसचिव डॉ. अजित नवले तथा माकपा विधायक विनोद निकोले सहित कई प्रमुख पदाधिकारियों ने किया। जैसे ही यह मार्च आगे बढ़ा, नासिक जिले से आई गाड़ियों का एक बड़ा जत्था घोटी में आकर इस मुख्य काफिले से जुड़ गया।

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सूखा राहत, बीमा भुगतान और कर्जमाफी पर तीखे सवाल

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य के कुल 358 तालुकों में से 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है, मगर प्रशासन की तरफ से प्रति परिवार दी जाने वाली 5,000 रुपये की मदद बेहद कम है। आंदोलनकारियों ने फसल बर्बादी के एवज में सम्मानजनक मुआवजा देने तथा फसल बीमा मिलने में खड़ी हो रही अड़चनों को फौरन दूर करने पर जोर दिया है।

इसके साथ ही, दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी की सुविधा उन काश्तकारों को भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है जो लगातार और समय पर अपने बैंक लोन चुकता करते रहे हैं। प्रदर्शनकारी वन भूमि, देवस्थान ट्रस्ट, इनाम तथा चरागाह श्रेणी की जमीनों पर वर्षों से हल चला रहे किसानों के नाम पर आधिकारिक भूमि अधिकार दर्ज करने का मुद्दा भी उठा रहे हैं।

योजना कर्मियों का साथ और कल्याणकारी योजनाओं की बहाली की मांग

यह आंदोलन केवल जोतदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पेसा कर्मी, भवन निर्माण मजदूर, पोषण आहार कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता तथा आंगनवाड़ी सहायिकाएं भी पूरी सक्रियता से शामिल हैं। संगठन का जोर ग्रामीण मजदूरों के लिए न्यायसंगत पारिश्रमिक, पुख्ता रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कवच तैयार करने पर है।

काफिले में शामिल लोग नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना के तहत रुकी हुई दो किश्तों का पैसा जल्द खातों में डालने की मांग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, ई-केवाईसी प्रक्रिया में आई रुकावटों की वजह से लाडकी बहिण योजना से बाहर हो चुकीं लगभग 81 लाख महिलाओं को पुनः शामिल करने, उनका अटका हुआ मानधन चुकाने और सत्यापन की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने की आवाज उठाई गई है।

सत्याग्रह के बाद नोटिस की कार्रवाई पर नाराजगी

मुंबई कूच का यह निर्णय 21 से 26 अक्टूबर के बीच अकोले में चले महा-मुक्काम सत्याग्रह के बाद लिया गया। किसान सभा के पदाधिकारियों का आरोप है कि बातचीत का रास्ता निकालने के बदले प्रशासन ने पुलिस के जरिए नोटिस थमाए और उन्हें मुख्यमंत्री आवास तक जाने से रोकने के जतन किए। संगठन ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से अपनी पीड़ा सरकार के समक्ष रखना हर नागरिक का अधिकार है, जिसे कानूनी नोटिसों के दम पर दबाया नहीं जा सकता।

इगतपुरी में रात्रि विश्राम के बाद कसारा घाट से आगे बढ़ेगा काफिला

तय कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार की रात यह विशाल काफिला इगतपुरी के निकट स्थित घाटणदेवी में विश्राम करेगा। मंगलवार सवेरे सभी आंदोलनकारी कसारा घाट के रास्ते होते हुए मुंबई की सीमा में प्रवेश करेंगे। आयोजकों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे प्रतिनिधिमंडल से सीधी वार्ता करें और इन तमाम मांगों पर ठोस, लिखित आश्वासन दें, क्योंकि जब तक लिखित सहमति नहीं मिलती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

सवाल-जवाब

यह लॉन्ग मार्च कहां से शुरू हुआ और कहां तक जाएगा?
यह वाहन मार्च अकोले से शुरू हुआ है और मुंबई में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा बंगले तक जाएगा।
इस मार्च में कितने लोग और वाहन शामिल हैं?
प्रदर्शन में 20 से अधिक जिलों के 12,000 से ज्यादा किसान और ग्रामीण कर्मी लगभग 1,000 से अधिक वाहनों के साथ भाग ले रहे हैं।
सूखा राहत को लेकर प्रदर्शनकारियों की मुख्य आपत्ति क्या है?
राज्य के 305 सूखा प्रभावित तालुकों के लिए घोषित 5,000 रुपये प्रति परिवार की सहायता को अपर्याप्त बताते हुए उचित फसल नुकसान मुआवजे की मांग की गई है।
लाडकी बहिण योजना से जुड़ा क्या मुद्दा उठाया गया है?
ई-केवाईसी अड़चनों के कारण योजना से बाहर हुई 81 लाख महिलाओं को पुनः शामिल करने और उनका बकाया मानधन जारी करने की मांग की गई है।
मार्च का अगला पड़ाव कहां तय किया गया है?
सोमवार रात इगतपुरी के पास घाटणदेवी में पड़ाव डालने के बाद मंगलवार सुबह काफिला कसारा घाट से मुंबई की ओर बढ़ेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·2 मिनट पहले

अरे भगवान, बारह हजार लोग सड़कों पर उतर आए हैं और मुख्यमंत्री के घर का घेराव करने जा रहे हैं। सूखा और कर्जमाफी का यह हाल देखकर दिल बैठ जाता है। पता नहीं सरकार इन किसानों की बात सुनेगी भी या इन्हें यूं ही धक्के खाने पड़ेंगे?

Ravikash Gupta@ravikash·42 मिनट पहले

अकोले से मुंबई तक किसानों का यह काफिला देखकर मुझे वो दिन याद आ गया जब मैं खुद ग्राउंड कवरेज के दौरान नासिक में इन आंदोलनों के बीच फंसा था। जब 5000 रुपये की सूखा राहत जैसी मामूली बात पर इतने लोग सड़कों पर उतर आएं, तो समझ आता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था कितनी दबाव में है। मुख्यमंत्री के बंगले तक ये गूंज जरूर पहुंचेगी।

Riya Menon@riya-menon·41 मिनट पहले

रविकेश, आपकी बात सही है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था दबाव में है। पर क्या आपको लगता है कि सीएम आवास तक जाने से इन 81 लाख महिलाओं और किसानों की मांगें सच में पूरी हो पाएंगी?

Rohan Verma@rohan-verma·55 मिनट पहले

सिर्फ पाँच हजार रुपये सूखा राहत! इतने में तो सचमुच कुछ नहीं होता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·54 मिनट पहले

रोहन भाई, सच कह रहे हो। पिछले महीने जब मैं अकोले के दौरे पर गया था, तब किसानों ने खुद मुझे बताया था कि इस पाँच हजार में तो खाद का एक कट्टा भी ठीक से नहीं आता।

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