जमशेदपुर निवासी अटल बिहारी मोहंती ने अपने घर के आसपास के इलाके को एक जीवंत और खूबसूरत मिनी जंगल में तब्दील कर दिया है। उनके इस अनूठे बगीचे में तीन सौ से ज्यादा पौधे और गमले सजाए गए हैं। यहां आने वाले लोगों को रंग-बिरंगे फूलों के साथ-साथ कई तरह के आकर्षक शो प्लांट भी देखने को मिलते हैं। इस पूरे परिवेश को और अधिक मनमोहक बनाने के लिए उन्होंने पूरे घर में शानदार लाइटिंग की व्यवस्था की है, जो साल के बारह महीने इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती रहती है। जैसे ही शाम ढलती है, रोशनी और हरियाली का यह अनूठा संगम उनके आशियाने को एक जादुई और सम्मोहक रूप प्रदान कर देता है। उनकी इस कड़ी मेहनत और लगन का अंदाजा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि वह केवल पेड़-पौधे लगाने तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि उनके रख-रखाव से लेकर उनके लिए उपजाऊ मिट्टी तैयार करने और जैविक खाद बनाने तक के सारे जरूरी काम अपने हाथों से ही करते हैं।
फलदार पेड़ों का संग्रह और यात्राओं की अनमोल यादें
इस छोटे से मिनी गार्डन की खूबी केवल सजावटी पौधों और फूलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां कई प्रकार के उपयोगी फलदार वृक्ष भी लहलहा रहे हैं। उनके इस बगीचे में सुपारी, आम, नारियल, बेल और अमरूद जैसे पेड़ भी शान से खड़े हैं। विभिन्न किस्मों और प्रजातियों के इन पौधों को इस गजब के तरीके से व्यवस्थित किया गया है कि सीमित और कम जगह होने के बावजूद आंखों को सुकून देने वाला हरियाली का एक भव्य नजारा दिखाई देता है। अटल बिहारी मोहंती जब भी कभी किसी नई जगह की यात्रा पर जाते हैं, तो वह वहां से खाली हाथ लौटने के बजाय कम से कम दो से तीन पौधे अपने साथ जरूर लेकर आते हैं। इस प्रकार उनके घर का यह हरा-भरा बगीचा केवल पौधों का संग्रह नहीं है, बल्कि उनकी तमाम यात्राओं और सुहाने सफरों की यादों का एक जीवंत दस्तावेज भी बन चुका है, जो उनके हर पौधे से जुड़ा हुआ है।
सुकून भरा बैठने का स्थान और व्यस्त दिनचर्या
इस अद्भुत हरियाली के बीच उन्होंने मेहमानों और अपनों के बैठने के लिए एक अत्यंत सुंदर सीटिंग एरिया भी बनवाया है। इस खास जगह पर शाम के वक्त पांच से सात लोग बेहद आराम से बैठकर सुकून के पल बिता सकते हैं। प्राकृतिक हरियाली के बीच बैठकर गर्म चाय या कॉफी की चुस्की लेना और अपने दोस्तों व करीबियों के साथ लंबी बातचीत करना इस जगह के आकर्षण को और अधिक बढ़ा देता है। घर के इस शांत कोने में बैठकर समय बिताना आगंतुकों को मानसिक शांति और आंतरिक सुकून का अहसास कराता है। अटल बिहारी मोहंती ने अपने इस अनूठे शौक को इतने बेहतरीन ढंग से पाला और विकसित किया है कि उनका यह घर अब महज रहने का साधारण ठिकाना नहीं रह गया है, बल्कि कुदरत और प्रकृति के बेहद करीब समय बिताने का एक अत्यंत रमणीय और शांत केंद्र बन चुका है।
प्रकृति के प्रति प्रेम और सक्रिय जीवनशैली
अटल बिहारी मोहंती का ऐसा मानना है कि वह अपने चौबीस घंटों के दौरान हमेशा सक्रिय और व्यस्त रहना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें एक जगह खाली बैठना बिल्कुल रास नहीं आता। उनके दृष्टिकोण के अनुसार, लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से इंसान का शरीर सुस्त और कमजोर पड़ने लगता है। शायद यही सबसे बड़ी वजह है कि वह अपने इस खूबसूरत गार्डन से बेहद गहरा लगाव रखते हैं और हर रोज इसकी देखभाल तथा संवारने के लिए पर्याप्त समय निकालते हैं। उनकी यह प्रेरणादायक जीवन यात्रा समाज को यह संदेश देती है कि यदि कोई भी इंसान अपने कीमती समय का सदुपयोग करना सीख ले और अपने मनपसंद शौक के प्रति पूरी तरह समर्पित व मेहनती रहे, तो वह अपने घर के एक बहुत छोटे से हिस्से को भी एक बेहद खूबसूरत, जीवंत और सुकून भरी दुनिया में आसानी से बदल सकता है।























