महाराष्ट्र भर में बिना वैध अनुमति बिक रही, घटिया स्तर की और नकली दवाओं के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने के लिए अन्न व औषध प्रशासन ने मैदानी स्तर पर अपनी दबिश तेज कर दी है। जून 2026 से सितंबर 2026 के बीच पूरे राज्य में दवा निर्माण इकाइयों और खुदरा या थोक बिक्री से जुड़े 4,256 अलग-अलग ठिकानों पर सघन जांच की गई। इस चार महीने की अवधि के दौरान कुल 19.11 करोड़ रुपये मूल्य की दवाओं का स्टॉक या तो जब्त कर लिया गया या फिर उसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई। अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर 33 प्राथमिकियां दर्ज कराई गईं, जिनमें 14 आरोपियों को हिरासत में लिया गया। 14 अक्टूबर को सामने आए आधिकारिक ब्योरे के मुताबिक, अप्रैल और मई 2026 की तुलना में इन चार महीनों के दौरान मासिक औसत जांच में लगभग 4.6 गुना का भारी उछाल देखा गया है। इससे पहले अप्रैल और मई के संयुक्त दौर में महज 467 जांच ही पूरी हो सकी थीं।
लाइसेंस निलंबन और 1402 नोटिस जारी
व्यापक जांच के बाद नियमों की अनदेखी करने वाले दवा कारोबारियों पर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक गाज गिरी है। जून और सितंबर के बीच दवा उत्पादन से जुड़ी इकाइयों के विरुद्ध 148 नियामकीय कदम उठाए गए, जबकि दवा दुकानों और बिक्री केंद्रों के खिलाफ ऐसे 996 कदम दर्ज किए गए। कुल मिलाकर संबंधित फर्मों को 1,402 कारण बताओ या अनुपालन नोटिस जारी किए गए। गंभीर कमियां मिलने पर कड़ा फैसला लेते हुए 288 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिए गए, जबकि 856 लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया। निर्माण इकाइयों की निगरानी के मोर्चे पर भी भारी तेजी आई है। जहां अप्रैल और मई के दौरान फैक्ट्रियों के सिर्फ 120 मुआयने हुए थे, वहीं जून से सितंबर के बीच यह संख्या बढ़कर 965 तक पहुंच गई। इसी प्रकार बिक्री काउंटरों की जांच भी 347 से सीधे बढ़कर 3,291 दर्ज की गई।
जादुई उपचार विज्ञापनों और नकली सौंदर्य प्रसाधनों पर कानूनी शिकंजा
इस बड़े अभियान के दौरान कई तरह की गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। जून से सितंबर के बीच बिना किसी वैध लाइसेंस के दवाओं के अवैध भंडारण और सीधे विक्रय के 43 प्रकरणों पर सीधी कार्रवाई हुई। इसके साथ ही ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज ऑब्जेक्शनएबल एडवरटाइजमेंट्स एक्ट, 1954 के कड़े प्रावधानों के तहत भ्रामक व आपत्तिजनक दावों वाले विज्ञापनों से संबंधित 31 मामले दर्ज किए गए। बाजार में नकली दवाओं और नकली सौंदर्य प्रसाधनों की मौजूदगी से जुड़े 14 मामले पकड़े गए, जबकि गलत ब्रांडिंग वाले कॉस्मेटिक्स के 10 प्रकरण सामने आए। मादक पदार्थों और प्रतिबंधित रसायनों के दुरुपयोग को रोकने वाले NDPS कानून के तहत 9 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा चिकित्सा उपकरणों के मानकों की अनदेखी के 3, स्थापित ब्रांडों से मिलते-जुलते भ्रामक नामों के 3 और पैकेजिंग व लेबलिंग नियमों के उल्लंघन के 2 मामलों पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
तलाशी और जब्ती अभियानों में भारी उछाल
अप्रैल और मई 2026 के शुरुआती दौर में जांच दल ने कुल 8 तलाशी और जब्ती अभियान चलाए थे, जिनमें लगभग 1.12 करोड़ रुपये का सामान रोका या जब्त किया गया था। इसके विपरीत, जून से सितंबर के चार महीनों में ऐसे तलाशी अभियानों की संख्या बढ़कर 115 पर पहुंच गई और रोके गए माल का कुल मूल्य 19.11 करोड़ रुपये के पार निकल गया। मासिक औसत के पैमाने पर देखें तो जब्त किए गए माल की कुल कीमत में करीब 8.5 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसी तरह आपराधिक मामले दर्ज करने की दर में करीब 8.2 गुना और तलाशी व जब्ती की कार्रवाइयों में करीब 7.2 गुना का इजाफा दर्ज किया गया है।
नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं
महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस व्यापक कदम पर जोर देते हुए कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीते चार महीनों के आंकड़े तंत्र की सक्रियता को साबित करते हैं और घटिया या अवैध दवाओं के प्रसार को रोकने के लिए इस तरह के निरीक्षण पूरे राज्य में लगातार और बड़े पैमाने पर जारी रहेंगे, ताकि गलत काम करने वालों पर सख्त शिकंजा कसा जा सके।























