प्राचीन भारतीय विधा योगासन आने वाले समय में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में स्थापित हो सकता है। मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने राजधानी इंफाल में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर के खेल मंच से यह विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने देशभर से जुटे खिलाड़ियों से वैश्विक प्रतियोगिताओं के लिए पूरी तैयारी करने और इस पारंपरिक विधा को दुनिया के सामने गौरव दिलाने का आह्वान किया।
इंफाल के इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आगाज
मुख्यमंत्री खुमान लंपक मेन इंडोर स्टेडियम में आयोजित 38वीं राष्ट्रीय योगासन चैंपियनशिप के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 2 अक्टूबर से 4 अक्टूबर तक किया जा रहा है। इसका संयुक्त आयोजन मणिपुर योग सोसाइटी और ऑल इंडिया योग फेडरेशन की भागीदारी से हुआ है। इस पूरे आयोजन को स्वास्थ्य, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के लिए योगासन की थीम पर आयोजित किया गया है।
यह राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप केवल घरेलू प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया का भी हिस्सा है। इस आयोजन के माध्यम से वर्ष 2027 में थाईलैंड में होने वाली 12वीं विश्व योगासन चैंपियनशिप के लिए भारतीय दल का चयन किया जाएगा। देशभर के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिस्पर्धी इस चयन प्रक्रिया और पदक दौड़ में अपना दमखम दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को लेकर X पर लिखा कि उन्हें इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता और आगामी विश्व चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में शामिल होने का अवसर मिला।
भारतीय विरासत और वैश्विक पहचान का विस्तार
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत की प्राचीन परंपराओं पर आधारित योगासन पहले ही विश्व स्तर पर व्यापक लोकप्रियता हासिल कर चुका है। आने वाले वर्षों में इसके एक पूर्ण खेल विधा बनने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बढ़ते झुकाव का संदर्भ देते हुए संस्कृत भाषा का उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि संस्कृत भाषा ने अपनी अद्भुत सटीकता और अद्वितीय शब्दावली के चलते आज अकादमिक और तकनीकी अनुसंधान क्षेत्रों में दुनिया भर के विद्वानों का ध्यान खींचा है।
योग के वैश्विक विस्तार का स्मरण करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की चर्चा की। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से की गई पहल के बाद ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की आधिकारिक स्थापना संभव हो सकी थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह खुद भी वर्ष 2014 से जमीनी स्तर पर योग के प्रचार और प्रसार से जुड़े रहे हैं और लोगों को इसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभों से परिचित कराने वाले कई कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग लेते रहे हैं।
शांति का संदेश लेकर लौटें प्रतिभागी
अन्य राज्यों से मणिपुर पहुंचे खिलाड़ियों और अधिकारियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने एक खास अपील भी रखी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता के समापन के बाद जब खिलाड़ी अपने गृह राज्यों को लौटें, तो वे अपने साथ मणिपुर में शांति की वापसी का सच्चा संदेश लेकर जाएं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने राज्यों में यह बताएं कि मणिपुर में सामान्य जीवन और शांति बहाल हो चुकी है, ताकि देश भर में राज्य की एक सकारात्मक और सशक्त छवि प्रस्तुत हो सके।





















