राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित रामदेवरा क्षेत्र से एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां भारतीय सेना के 34 वर्षीय जवान मोतीसिंह तंवर की सड़क हादसे में असमय मृत्यु हो गई। 24 राजस्थान राइफल बटालियन में पदस्थापित मोतीसिंह पंजाब के पठानकोट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वे दस दिनों का अवकाश स्वीकृत कराकर अपने पैतृक गांव रामदेवरा लौट रहे थे, लेकिन गंतव्य से केवल 40 किलोमीटर पहले उनकी मोटरसाइकिल भीषण हादसे का शिकार हो गई। गंभीर अवस्था में जोधपुर रेफर किए जाने के बाद चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्होंने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे समूचे इलाके में गहरा शोक फैल गया।
अवकाश लेकर घर के लिए निकले थे जवान
प्राप्त विवरण के अनुसार, मोतीसिंह तंवर 30 सितंबर को अपनी बटालियन से दस दिन की आधिकारिक छुट्टी लेकर रामदेवरा के लिए रवाना हुए थे। यात्रा करते हुए जब वे फलोदी पहुंचे, तो वहां उनकी भेंट अपने ममेरे भाई जसवंत सिंह से हुई। इसके पश्चात मोतीसिंह ने आगे की यात्रा बस अथवा अन्य सार्वजनिक वाहन से पूरी करने के स्थान पर अपने भाई जसवंत सिंह के साथ मोटरसाइकिल पर तय करने का निर्णय लिया। दोनों भाई फलोदी से मोटरसाइकिल पर सवार होकर रामदेवरा की ओर बढ़े, किंतु कुछ ही दूरी पर अनहोनी घटित हो गई।
कलरा गांव के समीप हुआ दर्दनाक हादसा
रामदेवरा पहुंचने से लगभग 40 किलोमीटर पूर्व, कलरा गांव के पास उनकी मोटरसाइकिल अचानक अनियंत्रित होकर गंभीर दुर्घटना की शिकार हो गई। टक्कर और दुर्घटना इतनी भीषण थी कि दोनों भाई गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही लहूलुहान हो गए। मार्ग से गुजर रहे स्थानीय ग्रामीणों एवं राहगीरों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों घायलों को संभाला और तुरंत फलोदी के राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया, किंतु मोतीसिंह की नाज़ुक स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर चिकित्सा के लिए जोधपुर रेफर कर दिया गया। जोधपुर के अस्पताल में सघन निगरानी के बीच गुरुवार रात को जवान मोतीसिंह तंवर ने अपनी अंतिम सांस ली।
सैन्य सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई
जवान के असामयिक देहावसान का समाचार मिलते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घटना की औपचारिक सूचना मोतीसिंह की सैन्य बटालियन के उच्च अधिकारियों को दी गई। शुक्रवार को जब राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव रामदेवरा पहुंचा, तो वहां मौजूद हर ग्रामीण की आंखें भर आईं। शुक्रवार शाम को गांव में एक विशाल अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें दूर-दराज से आए नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। सेना के अधिकारी महेंद्र सिंह तथा यूनिट के साथी जवानों ने हवा में गोलियां दागकर और गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत कर अपने कर्तव्यनिष्ठ साथी को अंतिम सलामी दी। इस दौरान पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी और रामदेवरा प्रशासक समंदर सिंह भी उपस्थित रहे और श्रद्धांजलि अर्पित की।
परिवार पर टूटा गहरा संकट
मोतीसिंह तंवर ने भारतीय सेना में लगभग 14 वर्षों तक निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं प्रदान की थीं और वे केवल चार वर्ष बाद सेना से सेवानिवृत्त होने की दहलीज पर थे। उनके परिवार में उनकी धर्मपत्नी, दो बेटे, तीन बेटियां और वृद्ध माता-पिता शामिल हैं। उनके पिता सूबेदार खेमसिंह स्वयं भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। इस आकस्मिक त्रासदी ने पूरे परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है, जहां एक पिता ने अपना जवान बेटा खो दिया, पत्नी का सहारा छिन गया और पांच मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।




















