मणिपुर के तीन संवेदनशील जिलों में कई गांवों में आगजनी की घटनाओं के बाद 200 से ज्यादा नागा परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। नोनी, तमेंगलांग और कांगपोकपी जिलों के कम से कम आठ गांवों में दर्जनों मकान जला दिए गए, जिसके बाद बड़े पैमाने पर नागरिक विस्थापित हुए। इस गंभीर संकट को लेकर फॉर्मर एंड सीनियर लीडर्स फोरम ऑफ जेलियांग्रॉन्ग सिविल ऑर्गेनाइजेशन्स के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा।
हमले के खौफ से खाली हुए कई गांव
ज्ञापन के विवरण के अनुसार, लगातार बढ़ते तनाव और नए हमलों की आशंका के चलते सेमपात नागा, गैदुनलुआंग और चामरीपेउ जैसी बस्तियों के बाशिंदे अपने घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं। नागरिक संगठन ने बताया कि नागा और कुकी समुदायों के बीच गहराते तनाव ने आम लोगों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है। हाल के दिनों में कामजोंग जिले में आम नागरिकों की जान जाने की घटनाओं ने इस असुरक्षा और दहशत को और ज्यादा बढ़ा दिया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीण भारी दहशत में जीवन बिता रहे हैं।
आधिकारिक पहचान और राहत की मांग
जेलियांग्रॉन्ग नेताओं ने प्रशासन से अपील की है कि बेघर हुए इन सभी परिवारों को औपचारिक रूप से आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही सरकार से मांग की गई है कि नियमों के तहत मिलने वाली सभी मानक राहत सुविधाएं इन विस्थापितों तक तुरंत पहुंचाई जाएं। फोरम ने कोंसाराम और चवांग्किनिंग जैसे सीमांत गांवों को बेहद संवेदनशील करार देते हुए स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
नेशनल हाईवे 37 पर सुरक्षा का पुख्ता खाका
नागरिक प्रतिनिधियों ने इंफाल-जिरीबाम कॉरिडोर यानी नेशनल हाईवे 37 पर सुरक्षा इंतजाम कड़े करने को सबसे प्राथमिक जरूरत बताया है। आम जनता के आवागमन के लिए बेहद अहम इस मार्ग पर सोमवार से शनिवार तक नागरिक वाहनों को सुरक्षा एस्कॉर्ट मुहैया कराने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसके लिए कैथेलमनबी और टुपुल बाजार को ठहराव केंद्र बनाया जा सकता है। इसके विकल्प के रूप में हाईवे पर रोजाना 11 घंटे लगातार सुरक्षा बलों की मौजूदगी बनाए रखने की मांग भी रखी गई है।
ऐतिहासिक संदर्भ और सीमा पुनर्गठन की अपील
ज्ञापन में 1994 के कुकी-नागा संघर्ष के दौरान हुए एक दर्दनाक वाकये की याद दिलाई गई, जब एक यात्री बस पर उग्रवादी हमले में 40 आम नागरिक मारे गए थे। संगठन ने इसी ऐतिहासिक घटना का हवाला देते हुए हाईवे पर कड़ी चौकसी को जरूरी बताया। इसके साथ ही, नागा और कुकी समुदायों के बीच जमीन तथा प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से जुड़े पुराने विवादों के स्थायी समाधान के लिए अंतर-जिला सीमाओं के पुनर्गठन की मांग भी उठाई गई है, ताकि इलाके में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता कायम हो सके।






















