छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आधुनिक कृषि तकनीक किसानों की आमदनी बढ़ाने का बड़ा जरिया बन रही है। कोचलपुर गांव के किसान पुरुषोत्तम पटेल ने पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर मल्चिंग तकनीक से मिर्च की खेती शुरू की है। वे सुप्रीम हर्ट वैरायटी की मिर्च उगा रहे हैं, जिसमें इस आधुनिक पद्धति के चलते बीमारियों का खतरा काफी घट गया है और पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पुरुषोत्तम पटेल को इस फसल की खेती करते हुए एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। उनका कहना है कि अनुकूल मौसम और कम लागत की बदौलत यह फसल मुनाफे का बेहतरीन सौदा साबित हो रही है, जिसकी मांग अब पड़ोसी राज्यों तक पहुंच चुकी है।
खेत की तैयारी और रोपाई का वैज्ञानिक तरीका
फसल लगाने से पहले खेत की मिट्टी को खास तरीके से तैयार किया जाता है। पुरुषोत्तम पटेल के अनुसार, खेत को पहले दो से तीन बार अच्छी तरह जोता गया और फिर रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाया गया। इसके बाद खेत में ऊंची क्यारियां यानी बेड तैयार की गईं। दो क्यारियों के बीच की दूरी लगभग साढ़े चार फीट तय की गई, जबकि पौधों के बीच एक फीट का फासला रखा गया। पोषण प्रबंधन के लिए खेत में गोबर की पारंपरिक खाद के साथ सुपर फास्फेट और डीएपी खाद का संतुलित इस्तेमाल किया गया।
पौधों की संख्या, समय चक्र और लंबी तुड़ाई
इस निर्धारित दूरी और बेड प्रणाली के तहत एक एकड़ जमीन पर लगभग 10 हजार मिर्च के पौधे लगाए जाते हैं। रोपाई के बाद पौधों पर फल आने में तकरीबन 60 दिन का वक्त लगता है। इसके बाद फसल लगातार उत्पादन देना शुरू करती है और किसान को करीब छह से सात महीने तक नियमित रूप से मिर्च की तुड़ाई का लाभ मिलता रहता है। बस्तर का तापमान भी मिर्च की बेहतर बढ़वार और लंबी अवधि तक फल देने के लिए पूरी तरह अनुकूल माना जाता है।
कीट प्रबंधन और फसलों की देखरेख
मिर्च की खेती में कीटों से सुरक्षा एक महत्वपूर्ण पहलू है। किसान के मुताबिक, इस फसल पर मुख्य रूप से थ्रिप्स और माइट्स जैसे हानिकारक कीटों का हमला होता है। पौधों को सुरक्षित रखने के लिए तय समय अंतराल पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव बेहद जरूरी हो जाता है। फसल की सेहत बनाए रखने और कीटों के किसी भी शुरुआती प्रकोप को रोकने के लिए खेत की लगातार निगरानी करनी पड़ती है।
लागत, कमाई और अंतरराज्यीय बाजारों में मांग
आर्थिक गणित की बात करें तो एक एकड़ रकबे में मिर्च की पूरी खेती पर लगभग 50 से 60 हजार रुपये का कुल खर्च आता है। फसल की पैदावार भरपूर रहने और मंडी में उचित दाम मिलने पर किसान को एक एकड़ से करीब ढाई से तीन लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा मिल जाता है। बस्तर में पैदा होने वाली इस तीखी मिर्च की मांग स्थानीय मंडियों के अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर है, जिसके चलते फसल का अधिकांश हिस्सा सीधे बाहरी बाजारों में भेजा जा रहा है।



















