मणिपुर में सड़कों और राजमार्गों को बाधित करने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य के मुख्य रास्तों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने या आवाजाही रोकने वाले व्यक्तियों और संगठनों पर बिना किसी पूर्व नोटिस के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजमार्गों पर रोक और जरूरी सेवाओं की सुरक्षा
गृह आयुक्त सह सचिव एन. अशोक कुमार द्वारा 28 अगस्त को जारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति, संस्था या स्थानीय संगठन को राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और अन्य प्रमुख सड़कों की घेराबंदी करने का अधिकार नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम लोगों और वाहनों की स्वतंत्र आवाजाही में कोई भी रुकावट पैदा करना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा।
आदेश में आवश्यक वस्तुओं, जैसे भोजन, ईंधन, दवाइयों, आपातकालीन सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहनों की आवाजाही रोकने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, वाहनों की जबरन चेकिंग करना, डराना-धमकाना, रंगदारी वसूलना या हिंसा के जरिए यातायात रोकना भी प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल किया गया है। सड़कों, पुलों और सरकारी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाने पर कठोर सजा दी जाएगी।
प्रशासनिक निर्देश और लागू होने वाले सख्त कानून
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे राजमार्गों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखें, बाधाओं को तुरंत हटाएं और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अविलंब एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई शुरू करें।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि शांति भंग करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले उपद्रवियों पर कई कठोर कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। इनमें नेशनल हाईवे एक्ट 1956, प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट 1984 और मोटर व्हीकल एक्ट 1988 शामिल हैं। इसके साथ ही, हाल ही में लागू हुए भारतीय न्याय संहिता 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत भी सख्त मामले दर्ज किए जाएंगे।
सप्लाई चेन पर असर और शांतिपूर्ण समाधान की अपील
राज्य में पिछले कुछ समय से जारी बार-बार की नाकेबंदी के कारण आवश्यक सामान की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी। इस वजह से मणिपुर के विभिन्न हिस्सों में दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें काफी बढ़ गई हैं और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने नागरिक समाज संगठनों, छात्र यूनियनों और स्थानीय निकायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। सरकार ने कहा है कि अपनी मांगों या समस्याओं को रखने के लिए बंद और नाकेबंदी का रास्ता चुनने के बजाय लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से बातचीत का सहारा लिया जाना चाहिए।



















