मणिपुर में मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के दौरान अब तक कुल 306 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि 49 नागरिक अब भी लापता बने हुए हैं। राज्य विधानसभा के जारी सत्र के दूसरे दिन गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने सदन को इन आधिकारिक आंकड़ों की जानकारी दी। सरकार की ओर से पेश यह आंकड़ा 31 अगस्त 2026 तक की स्थिति को दर्ज करता है।
विधानसभा सत्र में गृह मंत्री ने साझा की जानकारी
सदन में यह अहम जानकारी बीजेपी विधायक सपुम रंजन सिंह की ओर से पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में सामने आई। गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने बताया कि राज्य में जातीय तनाव की शुरुआत के बाद से प्रशासन की ओर से जुटाए गए रिकॉर्ड के अनुसार 31 अगस्त 2026 तक 306 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई है और 49 लोगों का कोई अतापता नहीं चला है।
जातीय संघर्ष की शुरुआत और आबादी का गणित
मणिपुर में मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच यह भयंकर हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी। मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिए जाने की मांग के खिलाफ राज्य के पहाड़ी जिलों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे, जिसके बाद टकराव फैल गया। जनसांख्यिकी के लिहाज से मैतेई समुदाय की आबादी मणिपुर की कुल जनसंख्या की लगभग 53 प्रतिशत है और यह मुख्य रूप से इंफाल घाटी में निवास करता है। दूसरी ओर, कुकी और नागा सहित आदिवासी समुदायों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है और यह आबादी ज्यादातर पहाड़ी क्षेत्रों में बसती है।
राजनीतिक उथल-पुथल और सरकार का गठन
लंबे समय तक चले इस अशांति के दौर के कारण मणिपुर में बड़ा राजनीतिक बदलाव भी देखने को मिला। हिंसक परिस्थितियों के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके ठीक बाद 13 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। वर्ष 2027 तक के कार्यकाल वाली 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा को निलंबित अवस्था में रखा गया। बाद में हालात में सुधार के बाद 4 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया और बीजेपी नेता वाई खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ, जिन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली।



















