मणिपुर के लेइलोन वैफेई गांव में छह नागा नागरिकों के अपहरण और उनकी निर्मम हत्या के मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि इस हत्याकांड के संबंध में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इस मामले की गहन जांच कर रही है और घटना में शामिल अन्य फरार संदिग्धों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
शादी समारोह से लौटते समय हुआ था अपहरण
यह दर्दनाक वारदात इस साल 13 मई को उस समय हुई थी, जब एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे लगभग 18 लोगों को रास्ते में रोककर अगवा कर लिया गया था। अपहृत लोगों में ज्यादातर लियांगमई नागा समुदाय के नागरिक थे। अपहरणकर्ताओं ने उन्हें लेइलोन वैफेई इलाके से बंधक बना लिया था। घटना के अगले ही दिन 12 लोगों को तो रिहा कर दिया गया, लेकिन बाकी बचे छह नागरिकों को बंधक बनाए रखा गया। बाद में इन सभी छह लोगों के शव बरामद हुए, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था।
एनआईए की कार्रवाई और चार फरार आरोपियों की तलाश
इस जघन्य मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई थी। गृह मंत्री ने 12वीं मणिपुर विधानसभा के आठवें सत्र के दौरान प्रश्नकाल में बताया कि NIA ने शुरुआती जांच में दो संदिग्धों को पकड़ा था। इसके बाद पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ और मिली जानकारियों के आधार पर दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों ने पूछताछ में चार अन्य लोगों के नाम भी उजागर किए हैं जो इस वारदात में शामिल थे। जांच एजेंसी ने उन चारों की पहचान कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
विधानसभा में उठा शवों को न्याय मिलने का मुद्दा
विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक के रंजीत सिंह ने इस मुद्दे को उठाते हुए घटना को बेहद दुखद और गंभीर करार दिया। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के साथ बेहद बर्बरता की गई थी। विधायक ने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई कि मारे गए छह नागरिकों के शव पिछले तीन महीने से अधिक समय से जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) के मुर्दाघर में रखे हुए हैं और पीड़ित परिवार लगातार इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं।
आरोपों पर गृह मंत्री का स्पष्टीकरण
सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक ने रिहा हुए प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का हवाला देते हुए एक स्थानीय पुलिस कांस्टेबल और कुकी नेशनल फ्रंट-पी (KNF-P) के नेता की संलिप्तता की आशंका जताई थी। इस पर गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने स्पष्ट किया कि आधिकारिक ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच से पुलिस कांस्टेबल पूरी तरह निर्दोष पाया गया है, क्योंकि घटना के समय वह अपनी ड्यूटी पर तैनात था। इसके अलावा गृह मंत्री ने बताया कि अब तक की NIA जांच में KNF-P संगठन या उसके नेतृत्व का इस हत्याकांड से कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है।



















