पिछले कई दिनों से सोने और चांदी की चाल पर दबाव बना हुआ है और यह सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। 16 जुलाई को घरेलू वायदा बाजार यानी MCX पर दोनों कीमती धातुएं गिरावट के साथ कारोबार करती दिखीं। इस नरमी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बना अनिश्चितता का माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की बेचैनी बढ़ा दी है। बाजार को डर है कि यह टकराव लंबे समय तक महंगाई को ऊंचे स्तर पर रोके रख सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है, और इसी आशंका का असर सीधे तौर पर सोने-चांदी के भाव पर पड़ता दिख रहा है।
आज कितना गिरा सोना और चांदी
आज MCX पर सोने की कीमत 540 रुपये टूट गई। इसके बाद 10 ग्राम गोल्ड का रेट सस्ता होकर 141310 रुपये पर पहुंच गया। चांदी में गिरावट और भी तेज रही। चांदी का दाम 924 रुपये फिसलकर 219696 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही रही। कॉमेक्स पर सोना 0.27 फीसदी की गिरावट के साथ 4041 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। हालांकि चांदी ने यहां थोड़ा दम दिखाया और 0.15 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 57.52 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती रही।
खरीदारी में सिर्फ धातु का दाम नहीं लगता
अगर आप शादी या किसी त्योहार के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी में हैं, तो यह समझना जरूरी है कि आपको सिर्फ धातु का असली भाव नहीं चुकाना पड़ता। इसके ऊपर जीएसटी और मेकिंग चार्ज भी जुड़ता है, जिससे अंतिम बिल काफी बढ़ जाता है। मान लीजिए आप 22 कैरेट सोने का हार बनवाना चाहते हैं, तो असल में जेब पर कितना बोझ पड़ेगा, इसका पूरा हिसाब नीचे समझिए।
22 कैरेट का हार कितने का पड़ेगा
आज के भाव के हिसाब से अगर आप 22 कैरेट (22K) सोने का 10 ग्राम हार बनवाते हैं, तो सबसे पहले सिर्फ सोने की कीमत करीब 1,29,535 रुपये बैठेगी। यह अनुमान 24 कैरेट के 1,41,310 रुपये प्रति 10 ग्राम रेट के आधार पर लगाया गया है। इसके बाद अगर ज्वेलर 10 फीसदी मेकिंग चार्ज लेता है, तो इसमें करीब 12,954 रुपये और जुड़ जाएंगे। फिर कुल रकम पर 3 फीसदी जीएसटी लगेगा, जो लगभग 4,275 रुपये बनता है।
यानी आज के रेट पर 10 ग्राम का 22K गोल्ड नेकलेस तैयार करवाने का कुल खर्च करीब 1.47 लाख रुपये (लगभग 1,46,760 रुपये) पड़ सकता है। अगर हार का डिजाइन भारी और बारीक है और ज्वेलर 20 फीसदी तक मेकिंग चार्ज वसूलता है, तो यही बिल बढ़कर करीब 1.60 लाख रुपये तक जा सकता है।
आखिर किस वजह से टूटे दाम
इस गिरावट के पीछे अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों की बड़ी भूमिका है। जून महीने में अमेरिका के थोक महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। इससे पहले रिटेल महंगाई के आंकड़े भी नरम पड़े थे। इन आंकड़ों से यह भरोसा बढ़ा कि फेडरल रिजर्व फिलहाल जल्दबाजी में ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा। लेकिन इस राहत की उम्र ज्यादा लंबी साबित नहीं हो रही। दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान तनाव गहराने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसने महंगाई दोबारा भड़कने का डर पैदा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि अगर महंगाई ऊंचे स्तर पर टिकी रही, तो फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है। यही वजह है कि सोने की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है।











