अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सिंगापुर डॉलर इन दिनों किसी बड़ी दिशा की जगह एक तंग दायरे में कारोबार करता दिख रहा है। यूनाइटेड ओवरसीज बैंक (UOB) के विश्लेषक क्वेक सेर लियांग के मुताबिक पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद USD/SGD में नीचे की ओर का जोर अब सुस्त पड़ चुका है, और इंट्राडे कारोबार में यह जोड़ी 1.2900 से 1.2935 के बीच रहने की उम्मीद है। यानी बाजार फिलहाल किसी बड़े फैसले के मूड में नहीं है और दोनों तरफ की चाल सीमित बनी हुई है।
इस तरह के दौर में समझना जरूरी है कि सपोर्ट और रेजिस्टेंस का मतलब क्या होता है। सपोर्ट वह स्तर है जहां गिरावट थमने की उम्मीद रहती है, जबकि रेजिस्टेंस वह ऊपरी दीवार है जिसे पार करना कीमत के लिए मुश्किल होता है। मौजूदा हालात में यही दो दीवारें डॉलर और सिंगापुर डॉलर की चाल को बांधे हुए हैं।
अगले 24 घंटे का नजरिया
पिछले गुरुवार को अमेरिकी डॉलर तेजी से लुढ़ककर 1.2901 के निचले स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद शुक्रवार को अनुमान यही था कि गिरावट भले ही जरूरत से ज्यादा दिखे, लेकिन यह अभी पूरी तरह थमी नहीं है। संभावना जताई गई थी कि डॉलर 1.2900 के नीचे फिसल सकता है और 1.2890 के अहम सपोर्ट को छू सकता है, हालांकि इस स्तर के साफ तौर पर टूटने के आसार कम थे। ऊपर की ओर 1.2935 पर रेजिस्टेंस था और 1.2950 के पार जाना इस बात का संकेत होता कि गिरावट स्थिर हो चुकी है।
असल में हुआ भी कुछ ऐसा ही। डॉलर पहले फिसलकर 1.2896 के निचले स्तर तक गया, लेकिन फिर संभलकर लगभग बिना बदलाव के 1.2919 पर बंद हुआ, यानी 0.02% की मामूली बढ़त के साथ। नीचे की ओर का दबाव धीमा पड़ा है, इसलिए आज नई गिरावट के बजाय डॉलर के एक दायरे में, संभवतः 1.2900 और 1.2935 के बीच, टिके रहने की गुंजाइश ज्यादा है।
एक से तीन हफ्ते की तस्वीर
मध्यम अवधि के लिहाज से पिछले हफ्ते की शुरुआत में ही डॉलर पर रुख न्यूट्रल कर दिया गया था। सबसे ताजा आकलन 2 जुलाई, गुरुवार का था, जब स्पॉट 1.2960 पर था। उस समय कहा गया था कि दायरे में कारोबार की उम्मीद बरकरार है, बस इस दायरे को बढ़ाकर 1.2890 से 1.2990 कर दिया गया। शुक्रवार को डॉलर इसी दायरे के निचले सिरे की ओर बढ़ा और 1.2896 तक गया।
नीचे की ओर जो हल्की तेजी आई, वह इतनी मजबूत नहीं है कि इसे लगातार गिरावट का संकेत माना जाए। इसलिए एक से तीन हफ्ते के नजरिए से फिलहाल यही अनुमान है कि डॉलर 1.2890 और 1.2990 के बीच ही घूमता रहेगा।
लंबी अवधि में डॉलर की मजबूती का पलड़ा भारी
छोटी अवधि की सुस्ती से अलग, साप्ताहिक चार्ट पर रफ्तार अब भी मजबूत बनी हुई है और यह USD/SGD की और तेजी की ओर इशारा करती है। लंबी अवधि में डॉलर की यह मजबूती जोड़ी को 1.3000 की ओर और संभवतः उससे आगे 1.3095 तक ले जा सकती है। यानी नजदीकी दायरे में भले ही ठहराव हो, बड़ी तस्वीर में डॉलर का पलड़ा भारी दिख रहा है।
सिंगापुर डॉलर से आगे, बाकी बड़ी मुद्राओं का हाल
अब नजर बाकी प्रमुख मुद्राओं पर। सोमवार को ब्रिटिश पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ा फिसल गया और लगातार सात दिन की तेजी पर विराम लगने के करीब पहुंच गया। इसकी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से बढ़ता तनाव है, जो वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शांति प्रक्रिया के अहम बिंदुओं में से एक है। GBP/USD जोड़ी इस समय 1.3340 के आसपास कारोबार कर रही थी, जो पिछले हफ्ते के 1.3387 के ऊंचे स्तर से नीचे है, हालांकि नजदीकी अवधि का तेजी वाला रुझान अभी बना हुआ है।
दूसरी ओर यूरो ने शुरुआती कमजोरी को झटककर वापसी की। सोमवार को EUR/USD जोड़ी 1.1440 से 1.1450 के दायरे की ओर बढ़ी और दिन के लिहाज से हल्की बढ़त में रही। हफ्ते की सुस्त शुरुआत में डॉलर में कोई साफ दिशा न होने का फायदा यूरो को मिला।
सोने पर सोमवार को फिर से बिकवाली का दबाव आया। लगातार तीन दिन की बढ़त के बाद यह पलटा और प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के आसपास शुरुआती रुकावट का सामना करता दिखा। होर्मुज जलडमरूमध्य के इर्द-गिर्द फिर उभरे तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग सोने के बजाय अमेरिकी डॉलर की ओर मुड़ गई, जिससे कीमती धातु की तेजी पर लगाम लगी।
सुरक्षित निवेश की दुनिया के राजा माने जाने वाले स्विस फ्रैंक को आमतौर पर ईरान युद्ध जैसे भू-राजनीतिक झटकों से फायदा मिलता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। ईरान में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के साथ आई तेज गिरावट के बाद स्विस फ्रैंक डॉलर के मुकाबले जनवरी के अपने शिखर से करीब 6% नीचे आ चुका है।
सिंत्रा के बाद अब फेड पर टिकी निगाहें
वित्तीय बाजार सिंत्रा में इस उम्मीद के साथ पहुंचे थे कि उन्हें फेडरल रिजर्व (फेड) के अगले कदम को लेकर कुछ संकेत मिलेंगे। लेकिन बाजार को वहां से जो सबसे बड़ी बात मिली, वह यह पुष्टि थी कि फेड चेयर केविन वॉर्श इन संकेतों को पढ़ना अब और मुश्किल बना देना चाहते हैं। यानी आने वाले दिनों में ब्याज दरों की दिशा को लेकर अनिश्चितता और गहरा सकती है, और यही अनिश्चितता डॉलर समेत तमाम मुद्राओं की चाल पर असर डालती रहेगी।











