अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में इंडोनेशियाई रुपया (IDR) की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इंडोनेशियाई रुपया लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज करने में सफल रहा। मुद्रा बाजार में USD/IDR की जोड़ी गिरकर 17,810 के स्तर के करीब कारोबार कर रही थी। इंडोनेशियाई मुद्रा को यह मजबूती बैंक इंडोनेशिया (BI) के उस नए फैसले से मिली है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने देश की मुद्रा को स्थिर बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। नए नेतृत्व के तहत आयोजित पहली नीतिगत बैठक में केंद्रीय बैंक ने वित्तीय बाजारों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि उसकी मौद्रिक रणनीतियों में निरंतरता बनी रहेगी।
बैंक इंडोनेशिया का ब्याज दरों पर फैसला और आर्थिक रूपरेखा
बैंक इंडोनेशिया के कार्यकारी गवर्नर डेस्ट्री दमयंती की अध्यक्षता में हुई पहली नीतिगत समीक्षा बैठक में केंद्रीय बैंक ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को 5.75% के स्तर पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आयातित मुद्रास्फीति (imported inflation) पर कड़ा नियंत्रण रखना है, ताकि घरेलू आर्थिक वृद्धि को बिना किसी बाधा के गति दी जा सके। केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ब्याज दरों को इस स्तर पर बनाए रखना अर्थव्यवस्था के संतुलन के लिए आवश्यक है।
यूओबी ग्रुप के अर्थशास्त्रियों ने बैंक इंडोनेशिया के इस रणनीतिक कदम का विश्लेषण करते हुए बताया कि कार्यकारी गवर्नर डेस्ट्री दमयंती ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में छाई उथल-पुथल के बीच रुपये की स्थिरता को बनाए रखने को प्राथमिक उद्देश्य बताया है। केंद्रीय बैंक ने 2026-2027 की अवधि के लिए मुद्रास्फीति को अपने निर्धारित लक्ष्य सीमा 2.5% ±1% के भीतर सीमित रखने का इरादा जताया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मौद्रिक नीति का यह वर्तमान स्वरूप टिकाऊ आर्थिक विकास को समर्थन देने और व्यापक आर्थिक स्थिरता हासिल करने के लिए तैयार किया गया है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख और डॉलर का वैश्विक प्रभाव
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर (USD) को फेडरल रिजर्व की ओर से जारी हुईFOMC की हालिया बैठक के मिनटों से समर्थन मिल रहा है। फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख ने बाजार में यह संकेत दिया है कि इस साल अमेरिकी ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी संभव है। अमेरिका का आधिकारिक डॉलर दुनिया की सबसे प्रमुख मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के कुल दैनिक कारोबार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 88% से अधिक यानी लगभग 6.6 ट्रिलियन डॉलर प्रतिदिन की है।
द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड का स्थान लेते हुए दुनिया की प्राथमिक रिजर्व करेंसी के रूप में मान्यता प्राप्त की थी। लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर का मूल्य सोने के भंडार से जुड़ा रहा, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के बाद गोल्ड स्टैंडर्ड व्यवस्था समाप्त कर दी गई। वर्तमान समय में अमेरिकी डॉलर का मूल्य मुख्य रूप से अमेरिका की केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों से तय होता है। फेडरल रिजर्व के दो प्रमुख जनादेश हैं: मूल्य स्थिरता बनाए रखना यानी महंगाई पर नियंत्रण पाना और अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना। इन दोनों लक्ष्यों को साधने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बदलाव का उपयोग करता है।
केंद्रीय बैंकों की नीतियां: ब्याज दरें, QE और QT की प्रक्रिया
जब अमेरिका में मुद्रास्फीति फेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करता है। दरों में यह बढ़ोतरी आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य को मजबूती प्रदान करती है। इसके विपरीत, जब महंगाई नियंत्रित हो जाती है या बेरोजगारी की दर बढ़ती है, तब फेड दरों में कटौती करता है, जिससे डॉलर पर दबाव बनता है और उसकी विनिमय दर घटती है।
असाधारण परिस्थितियों में, जब बैंकिंग प्रणाली में तरलता का संकट पैदा होता है, तो फेडरल रिजर्व 'क्वांटिटेटिव ईज़िंग' (QE) जैसी नीतियों का सहारा लेता है। इसके तहत केंद्रीय बैंक नई मुद्रा छापकर वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदता है, जिससे बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ता है। वर्ष 2008 के महान वित्तीय संकट के दौरान इस नीति का व्यापक इस्तेमाल किया गया था। इस प्रक्रिया से बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे डॉलर कमजोर होता है। वहीं 'क्वांटिटेटिव टाइटनिंग' (QT) इसकी विपरीत प्रक्रिया है, जिसमें फेड बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपनी बैलेंस शीट को समेटता है, जो डॉलर को मजबूती प्रदान करने में सहायक होता है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार पर अन्य प्रमुख मुद्राओं का प्रदर्शन
इंडोनेशियाई रुपये के अलावा अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में भी हलचल देखी गई। एशियाई सत्र के दौरान GBP/USD की जोड़ी में हल्की गिरावट आई। पिछले कारोबारी दिन मई 11 के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद यह 1.3600 के स्तर से नीचे फिसल गई। हालांकि, तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि पौंड के लिए बुनियादी ढांचा अभी भी सकारात्मक बना हुआ है और निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसी तरह, EUR/USD की जोड़ी मई के अंत के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद एक समेकन (consolidation) के चरण में प्रवेश कर गई है। यूरो के खरीदार आगे की नई पोजीशन बनाने से पहले 1.1700 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि पिछले तीन हफ्तों से चले आ रहे अपट्रेंड को और आगे बढ़ाया जा सके।
सोना और क्रिप्टो बाजार पर वैश्विक रुझानों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई। पिछले कारोबारी दिन में 3% से अधिक की शानदार तेजी दर्ज करने के बाद, गुरुवार के एशियाई सत्र में सोना जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा नीचे आ गया। फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाले प्रतिफल में आई गिरावट थमी, जिससे सोने की कीमतों पर हल्का दबाव बना।
डिजिटल एसेट बाजार यानी क्रिप्टोकरेंसी में भी रिकवरी का माहौल देखा गया। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक के सकारात्मक प्रभाव के चलते रिपल (XRP), सोलाना (SOL) और कार्डानो (ADA) जैसे प्रमुख एल्टकॉइन्स में स्थिरता दर्ज की गई। पिछले दिन 10% की बड़ी छलांग लगाने के बाद रिपल का भाव $1.0951 के आसपास बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों के अनुसार XRP और SOL में आगे और बढ़त की संभावना दिख रही है, जबकि ADA पर हालिया बढ़त को गंवाने का जोखिम मंडरा रहा है।


















