लोकप्रिय रियलिटी शो बिग बॉस में अपनी सशक्त आवाज से पहचान बनाने वाले प्रसिद्ध वॉयस ओवर आर्टिस्ट विजय विक्रम सिंह ने आज के डिजिटल दौर और सोशल मीडिया कल्चर को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही है। समाचार एजेंसी आईएएनएस के साथ हुई एक बातचीत के दौरान उन्होंने इस बात पर गहरा अफसोस जताया कि इंटरनेट पर रातों-रात चर्चित होने की अंधी दौड़ में लोग अपने असली व्यक्तित्व और मौलिकता से दूर होते जा रहे हैं। उनका मानना है कि लोकप्रियता हासिल करने का यह जुनून अब केवल ग्लैमर इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे समाज को अपनी चपेट में ले चुका है।
रियलिटी शो का सच और पहचान की उलझन
टीवी के सबसे चर्चित शो बिग बॉस में मुख्य सूत्रधार या नैरेटर की भूमिका निभाने वाले विजय विक्रम सिंह के बारे में अक्सर दर्शकों को यह भ्रम हो जाता है कि वही शो के अदृश्य संचालक यानी 'बिग बॉस' हैं। इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि वह शो के बिग बॉस नहीं हैं, बल्कि केवल इसके नैरेटर की जिम्मेदारी संभालते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि लोगों के मन में इस भूमिका को लेकर हमेशा थोड़ा संशय बना रहता है, लेकिन इस खास पहचान ने उन पर कभी मानसिक दबाव नहीं बनाया। इसके विपरीत, इस पहचान ने उनके करियर के हर पड़ाव पर उनकी मदद ही की है।
इसी के साथ बिग बॉस के प्रारूप पर चर्चा करते हुए उन्होंने एक दिलचस्प पहलू सामने रखा। उनका कहना है कि इस शो को इस ढंग से तैयार किया गया है कि कोई भी प्रतिभागी चाहे कितना भी बड़ा अभिनेता क्यों न हो, वह लंबे समय तक मुखौटा पहनकर नहीं रह सकता। शो के खत्म होते-होते उस व्यक्ति का असली स्वभाव और उसकी असलियत पूरी दुनिया के सामने आ ही जाती है।
वायरल ट्रेंड्स और घटती मौलिकता पर चिंता
मनोरंजन उद्योग और सोशल मीडिया के वर्तमान परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए विजय विक्रम सिंह ने कहा कि आजकल हर व्यक्ति केवल वायरल होना चाहता है। बाजार और लोगों की नजरों में बने रहने के लिए लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रवृत्ति अब किसी एक शो या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक समस्या का रूप ले चुकी है।
अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने आगे कहा कि खबरों में बने रहने की होड़ में लोग अपनी निजी जिंदगी और गरिमा से समझौता कर रहे हैं। लगातार चर्चा में रहने की इस बेताबी में लोग यह पूरी तरह भूलते जा रहे हैं कि उनका वास्तविक वजूद क्या है। इस प्रक्रिया में वे अपनी मौलिक सोच और अनूठे व्यक्तित्व को पूरी तरह गंवा रहे हैं।
वॉयस आर्टिस्ट से बेहतरीन अभिनेता बनने का सफर
अपनी हालिया अभिनय परियोजनाओं के बारे में बात करते हुए विजय विक्रम सिंह ने नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म इक्का का जिक्र किया। इस फिल्म में उन्होंने जज कामरा का एक संक्षिप्त किरदार निभाया है। स्क्रीन पर कम समय मिलने के बावजूद अपनी छाप छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर निर्देशक की सोच को सही तरीके से समझा जाए और खुद को पात्र के अनुरूप ढाल लिया जाए, तो प्रभाव छोड़ना कठिन नहीं होता।
उन्होंने अपनी पेशेवर यात्रा का निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि जिस तरह बिग बॉस ने उन्हें एक बेहतरीन वॉयस आर्टिस्ट के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया, ठीक उसी प्रकार फिल्म इक्का ने उन्हें एक गंभीर और कुशल अभिनेता के रूप में नई पहचान दिलाने का काम किया है।


















