अमेरिका के सेंट लुई में आयोजित सिंकफील्ड कप शतरंज टूर्नामेंट का खिताबी मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर खत्म हुआ। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञाननंदा को निर्णायक आर्मागेडन गेम में अमेरिका के वेस्ली सो के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। इस परिणाम के साथ भारतीय स्टार खिलाड़ी को प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।
क्लासिकल राउंड से टाईब्रेकर तक का सफर
प्रतियोगिता के अंतिम दौर में आर प्रज्ञाननंदा का सामना नीदरलैंड के अनीश गिरी से हुआ। यह क्लासिकल बाजी ड्रॉ पर समाप्त हुई, जिसने वेस्ली सो को टाईब्रेकर मुकाबला खेलने के लिए मजबूर कर दिया। वेस्ली सो ने इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान ज्यादातर समय अपनी बढ़त बनाए रखी थी, लेकिन अंतिम राउंड के समीकरणों के कारण विजेता का फैसला टाईब्रेकर से होना तय हुआ।
रैपिड मैच और आर्मागेडन गेम के कड़े नियम
ग्रैंड शतरंज टूर के तहत खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट के नियमों के अनुसार टाई की स्थिति में पहले दो रैपिड गेम खेले जाने का प्रावधान था। यदि दोनों रैपिड गेम में कोई नतीजा नहीं निकलता, तो फैसला अंतिम आर्मागेडन गेम से होना था। नियम के मुताबिक आर्मागेडन गेम में सफेद मोहरों से खेलने वाले खिलाड़ी को पांच मिनट और काले मोहरों वाले खिलाड़ी को चार मिनट का समय दिया जाता है। इस गेम के ड्रॉ रहने की सूरत में काले मोहरों से खेलने वाले खिलाड़ी को विजेता घोषित कर दिया जाता है।
दोनों खिलाड़ियों के बीच खेले गए दोनों रैपिड गेम बराबरी पर छूटे। इसके बाद आर्मागेडन गेम में आर प्रज्ञाननंदा को सफेद मोहरों के साथ उतरना पड़ा, जबकि वेस्ली सो काले मोहरों से खेल रहे थे। यह मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ और नियमानुसार काले मोहरों से खेल रहे वेस्ली सो ने टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया।
ग्रैंड फाइनल की दौड़ में सुरक्षित स्थान
हालांकि सिंकफील्ड कप की ट्रॉफी हाथ से निकल गई, लेकिन आर प्रज्ञाननंदा के लिए राहत की बात यह रही कि वह इस साल के अंत में आयोजित होने वाले ग्रैंड फाइनल के लिए पहले ही अपना स्थान पक्का कर चुके हैं। ग्रैंड शतरंज टूर का यह अहम पड़ाव पूरा होने के बाद अब उनकी नजरें आगामी फाइनल मुकाबलों पर टिकी होंगी।



















