अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर की आक्रामक बढ़त पर अस्थायी रोक लगती दिखाई दी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में की गई हालिया बढ़ोतरी के बाद डॉलर अपने सात हफ्तों के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन बैंक ऑफ जापान की आगामी मौद्रिक नीति बैठक से ठीक पहले निवेशकों ने सतर्कता का रुख अपनाया है। मुद्रा बाजार में प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में हल्का सुधार देखने को मिला, जिसमें ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले डॉलर की मजबूती सबसे अधिक दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ, जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी प्रमुख करेंसियों को केंद्रीय बैंकों के रुख और भू-राजनीतिक मोर्चे से मिल रहे संकेतों के चलते नया समर्थन प्राप्त हुआ है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का आगामी फैसला
विदेशी मुद्रा बाजार में यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी गुरुवार को एशियाई सत्र के दौरान 156.00 के स्तर से नीचे आने के बाद तेजी से संभलती दिखी। यह मुद्रा जोड़ी अपने पिछले कारोबारी दिन बने करीब दो सप्ताह के उच्चतम स्तर से नीचे आई है और लगातार तीन दिनों की जीत के सिलसिले को तोड़ने की कगार पर खड़ी नजर आई। डॉलर में आई इस हल्की नरमी का मुख्य कारण बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण के रास्ते पर आगे बढ़ने की बढ़ती उम्मीदें हैं। बाजार प्रतिभागी यह मानकर चल रहे हैं कि बैंक ऑफ जापान इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त कर सकता है। इसी उम्मीद ने जापानी येन को नया सहारा दिया है और इस मुद्रा जोड़ी की ऊपरी बढ़त को फिलहाल सीमित दायरे में बांध दिया है।
जापान की दशकों पुरानी बेहद कम ब्याज दरों की व्यवस्था ने दुनिया भर के वित्तीय तंत्र में एक अहम भूमिका निभाई है। एक दशक से भी अधिक समय तक जापान की अल्ट्रा-लो ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की। इस व्यवस्था की बदौलत जापानी येन पूरी दुनिया में सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था, जहां निवेशक सस्ते येन उधार लेकर ऊंचे रिटर्न वाली संपत्तियों में लगाते थे। जब दुनिया की लगभग सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं महंगाई को काबू में करने के लिए अपनी ब्याज दरें तेजी से बढ़ा रही थीं, तब भी जापान वैश्विक मंच पर एक अपवाद बना रहा और उसने अपनी ढीली मौद्रिक नीति जारी रखी। हालांकि, अब जब केंद्रीय बैंक द्वारा नीति को सख्त करने की संभावना बन रही है, तो यह माना जा रहा है कि वैश्विक वित्तीय बाजार में उस पुराने सस्ते फंडिंग के दौर का फायदा एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। सभी की निगाहें अब शुक्रवार को आने वाले नीतिगत फैसले पर टिकी हुई हैं।
फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड के कड़े संकेत
अमेरिकी मुद्रा की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो फेडरल रिजर्व ने अपनी पिछली बैठक में अप्रत्याशित मजबूती दिखाई थी। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने सभी सदस्यों की पूर्ण सहमति से अपने फेड फंड टारगेट रेंज को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75% से 4.00% कर दिया। फेडरल रिजर्व ने अपने इस सर्वसम्मत निर्णय के पीछे तर्क दिया कि नीतिगत दरों में यह इजाफा मुद्रास्फीति को उसके निर्धारित 2% के लक्ष्य तक अधिक समयबद्ध तरीके से वापस लाने में मदद करेगा। इस सख्त रुख के कारण ही डॉलर इंडेक्स जुलाई के अंत के बाद के अपने सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया था।
इसी बीच बैंक ऑफ इंग्लैंड ने भी वैश्विक बाजार को चौंकाने वाले संकेत दिए हैं। ब्रिटिश केंद्रीय बैंक ने अपनी नीतिगत समीक्षा में बेंचमार्क बैंक रेट को बिना किसी बदलाव के 3.75% पर स्थिर रखा। हालांकि, ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के बावजूद बैंक ऑफ इंग्लैंड की ओर से जारी बयान पूरी तरह से सख्त रहा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट चेतावनी दी कि देश में महंगाई का परिदृश्य तेजी से बिगड़ा है। बिगड़ती महंगाई के इसी दृष्टिकोण के चलते बाजार में ब्रिटिश पाउंड पर दबाव देखा गया और अमेरिकी डॉलर ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले आज सबसे मजबूत स्थिति में नजर आया।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में सुधार और जोखिम धारणा
एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने उल्लेखनीय वापसी की और एयूडी/यूएसडी की जोड़ी ने 0.7100 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया। डॉलर की तेजी थमने का सीधा फायदा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम-संवेदनशील मुद्रा को मिला। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाए जाने के मजबूत दांवों से भी सीधा सहारा मिल रहा है। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों को लेकर बन रही सकारात्मक उम्मीदों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम धारणा को बेहतर किया है। जब भी बाजार में जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ती है, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं में मांग स्वतः बढ़ जाती है।
सोने में जोरदार उछाल और कच्चे तेल की चाल
मुद्रा बाजार के साथ-साथ कमोडिटी बाजार में भी हलचल तेज रही। सोने की कीमतों में गुरुवार को जबरदस्त उछाल देखा गया और पीली धातु ने नए साप्ताहिक शीर्ष स्तर को छू लिया। सोने में आई इस ताजा बढ़त ने पिछले लगातार तीन दिनों से चली आ रही गिरावट के सिलसिले को पूरी तरह पलट दिया है। हालांकि, सोने की यह तेजी प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के मनोवैज्ञानिक क्षेत्र के पास आकर प्रारंभिक तकनीकी बाधाओं का सामना करती दिखी। बुलियन बाजार में यह तेजी अमेरिकी डॉलर में आई मामूली गिरावट और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज की गई कमजोरी के सीधे परिणाम के रूप में सामने आई है।
ऊर्जा बाजार की बात करें तो वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल की कीमतें हालिया गिरावट के बाद संभलती हुई दिखाई दीं। डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल बाजार में अपने 100.00 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद आए इस ठहराव ने जिंस बाजारों में एक हद तक संतुलन बनाने का काम किया है, जिससे कारोबारी अब अपनी नजरें केंद्रीय बैंकों के फैसलों और वैश्विक आपूर्ति से जुड़े घटनाक्रमों पर टिकाए हुए हैं।


















