वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर और ब्राजीलियाई रियल के बीच विनिमय दर एक निर्धारित दायरे में सिमटी हुई नजर आ रही है। मई के दौरान 4.88 के स्तर के आसपास गिरावट रुकने के बाद यह मुद्रा जोड़ी लगातार एक आधार सीमा के भीतर समय बिता रही है। तकनीकी चार्ट पर 200-दिवसीय मूविंग एवरेज के पार टिकने में आ रही कठिनाई यह दर्शाती है कि डॉलर को रियल के मुकाबले ऊपर जाने के लिए ठोस रफ्तार नहीं मिल पा रही है। व्यापक तेजी की पुष्टि के लिए बाजार विश्लेषक 5.23 के स्तर को एक बेहद अहम प्रतिरोध मान रहे हैं, जबकि 5.04 का हालिया पिवट लो मजबूत समर्थन स्तर के तौर पर देखा जा रहा है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, यह जोड़ी 5.14 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद 5.12 के मुकाबले 0.35 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है।
ब्राजीलियाई मौद्रिक नीति और ब्याज दरों की स्थिति
ब्राजील के घरेलू आर्थिक मोर्चे पर केंद्रीय बैंक ने अपनी सेलिक दर में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए इसे 13.75 प्रतिशत पर ला दिया है। यह नीतिगत दरों में की गई लगातार पांचवीं कटौती है। केंद्रीय बैंक के ताजा बयान में भविष्य के कदमों को लेकर कोई नया स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है, जिससे यह माना जा रहा है कि मौजूदा मौद्रिक नीति अब कुछ समय के लिए ठहराव की स्थिति में रह सकती है। उच्च ब्याज दरों का दौर धीमा पड़ने के बावजूद ब्राजील की मुद्रा ने अपनी स्थिरता को बरकरार रखने का प्रयास किया है, जिससे डॉलर के मुकाबले बड़ी गिरावट पर ब्रेक लगा हुआ है।
तकनीकी स्तर और चार्ट संकेत
सोसाइटी जनरल के तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि जब तक यह जोड़ी 5.23 की ऊपरी सीमा को पार नहीं करती, तब तक किसी बड़े अपट्रेंड की संभावना सीमित रहेगी। वर्तमान तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 51 के स्तर पर तटस्थ स्थिति में है, जबकि एमएसीडी हिस्टोग्राम 0.00 पर मामूली तेजी के संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 5.13 और 50-दिवसीय ईएमए 5.13 पर स्थित हैं, जबकि 200-दिवसीय ईएमए 5.19 तथा 200-दिवसीय एसएमए 5.17 पर दबाव बनाए हुए हैं। इसके साथ ही 52 हफ्तों का दायरा 4.88 से 5.62 के बीच दर्ज है, जिसमें हालिया 20-दिवसीय समर्थन 5.07 और प्रतिरोध 5.22 के करीब बना हुआ है। एडीएक्स सूचकांक 16 पर होने के कारण बाजार में किसी मजबूत ट्रेंड के बजाय रेंज-बाउंड ट्रेडिंग के आसार अधिक दिखाई देते हैं।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में डॉलर का रुख
व्यापक अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर अपनी हालिया बढ़त के बाद ठहराव के दौर में नजर आया है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने नए खरीदारों को आकर्षित करते हुए 0.7100 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के अनुमानों और अमेरिका व ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों ने बाजार की धारणा को सहारा दिया, जिससे जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती मिली।
दूसरी ओर, डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 156.00 के स्तर से नीचे की हल्की गिरावट से उबरने का प्रयास कर रही है। फेडरल रिजर्व के रुख के बाद सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंची डॉलर की तेजी अब थमती दिख रही है। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ने की संभावनाओं ने जापानी येन को समर्थन दिया है, जिससे इस जोड़ी में बढ़त सीमित रही। अब बाजार की निगाहें बैंक ऑफ जापान के आगामी नीतिगत फैसले पर टिकी हुई हैं।
सोने की कीमतों में सुधार और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसले
डॉलर में मामूली नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला। सोने ने अपने पिछले तीन दिनों की लगातार गिरावट को पीछे छोड़ते हुए साप्ताहिक उच्च स्तर को छुआ, हालांकि 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे के पास इसे शुरुआती रुकावट का सामना करना पड़ा।
अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बात करें तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी बैंक दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा, लेकिन मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण में आई तेज गिरावट के चलते सख्त रुख का संदेश दिया। वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपने नीतिगत लक्ष्य दायरे को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत कर दिया। फेड ने सर्वसम्मति से लिए गए इस फैसले के बारे में कहा कि यह कदम मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक समयबद्ध तरीके से वापस लाने में मददगार साबित होगा।
जापानी येन और वैश्विक वित्तीय प्रवाह
एक दशक से अधिक समय तक जापान की अति-निम्न ब्याज दरों ने दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसी वजह से जापानी येन वैश्विक स्तर पर फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बना रहा। जहां अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी की, वहीं जापान लंबे समय तक इनसे अलग बना रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को और कड़ा किए जाने की संभावनाओं के साथ यह पुराना लाभ एक नए चरण में प्रवेश करता दिख रहा है, जिसका सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय मुद्रा प्रवाह पर पड़ सकता है।



















