चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने देश में कर्ज वृद्धि की धीमी रफ्तार को सामान्य और आर्थिक बदलाव की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा माना है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर पान गोंगशेंग ने स्पष्ट किया कि ऋण विस्तार में आ रही यह सुस्ती किसी गंभीर आर्थिक संकट का संकेत नहीं है, बल्कि यह चीन की अर्थव्यवस्था को उच्च गुणवत्ता वाले विकास की ओर ले जाने की एक स्वाभाविक कड़ी है। उनके इस रुख से वित्तीय बाजारों को यह संकेत मिला है कि केंद्रीय बैंक निकट भविष्य में केवल कर्ज बढ़ाकर कृत्रिम रूप से विकास दर को खींचने वाले किसी बड़े प्रोत्साहन पैकेज की योजना नहीं बना रहा है। चीन का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की आगामी शिखर वार्ता से पहले दोनों देशों के बीच व्यापार शुल्क कटौती को लेकर कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ रही है।
कर्ज वृद्धि में सुस्ती और आर्थिक पुनर्गठन का गणित
कम्युनिस्ट पार्टी के नीतिगत प्रकाशन किउशी में छपे अपने आलेख में गवर्नर पान गोंगशेंग ने हालिया आर्थिक आंकड़ों पर अपनी बात रखी। अगस्त महीने के ऋण आंकड़ों से पता चला था कि चीन में समग्र सामाजिक वित्तपोषण और बैंक ऋण वृद्धि दोनों ही बाजार के अनुमानों से काफी कमजोर रहे हैं। इसके साथ ही एम2 मुद्रा आपूर्ति की वृद्धि दर भी विश्लेषकों की आम सहमति के स्तर तक नहीं पहुंच पाई। केंद्रीय बैंक के प्रमुख ने इन आंकड़ों को निराशाजनक मानने के बजाय यह तर्क दिया कि यह धीमापन आर्थिक आधुनिकीकरण और पुनर्गठन की स्वाभाविक मांग है।
बाजार के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कर्ज की मांग में आ रही इस कमी के पीछे एक बड़ा ढांचागत कारण है। चीन में घरेलू उपभोक्ता और कॉर्पोरेट कंपनियां अब नया कर्ज लेने में अत्यधिक सतर्कता बरत रही हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र में जारी मंदी और संपत्तियों की कीमतों में गिरावट ने कंपनियों के बहीखातों पर गहरा असर डाला है। दूसरी तरफ, आम उपभोक्ताओं के भीतर भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे घरेलू स्तर पर खर्च और उपभोक्ता विश्वास कमजोर बना हुआ है। जब तक कंपनियां और परिवार अपनी पुरानी देनदारियों को व्यवस्थित करने में लगे हैं, तब तक वे नए निवेश के लिए बड़े कर्ज उठाने से परहेज कर रहे हैं।
मौद्रिक ढील की संभावना कम, कूटनीति पर बढ़ा दारोमदार
केंद्रीय बैंक द्वारा कर्ज की सुस्त रफ्तार को स्वीकार किए जाने से यह संभावना लगभग समाप्त हो गई है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में तेज कटौती या आक्रामक मौद्रिक ढील देखने को मिलेगी। अभी तक राजकोषीय नीति की तरफ से भी कोई बहुत बड़ा और निर्णायक बदलाव देखने को नहीं मिला है, और घरेलू मांग अब भी सुस्त बनी हुई है। ऐसी स्थिति में चीन के नीति निर्माताओं के लिए आर्थिक गति बनाए रखने का प्राथमिक सहारा व्यापार कूटनीति बनता जा रहा है।
शी और ट्रंप के बीच होने वाली आगामी बैठक पर अब वैश्विक बाजारों की निगाहें टिकी हैं। यदि इस शिखर वार्ता से दोनों महाशक्तियों के बीच कोई सकारात्मक समझौता निकलता है या शुल्कों में राहत की दिशा में ठोस प्रगति होती है, तो इससे कारोबारी माहौल और बाजार की धारणा को कुछ सहारा मिल सकता है। हालांकि चीन के सामने बाहरी चुनौतियां कम नहीं हैं। यूरोपीय संघ की ओर से लगातार बन रहा दबाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीतियों को सख्त रखने का नया चक्र, साल के अंत में चीनी नीति निर्माताओं के लिए एक बेहद कठिन वैश्विक माहौल तैयार कर रहा है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार और केंद्रीय बैंकों का रुख
चीन के घटनाक्रमों के बीच वैश्विक बाजारों में अन्य प्रमुख मुद्राओं और केंद्रीय बैंकों की गतिविधियों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिर से खरीदारों को आकर्षित करते हुए 0.7100 के स्तर को पार करने में कामयाब रहा। अमेरिकी डॉलर की हालिया रैली थमने, रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं और अमेरिका तथा ईरान के बीच राजनयिक प्रयासों की उम्मीदों ने जोखिम उठाने की क्षमता को बढ़ाया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में 156.00 के स्तर से नीचे की संक्षिप्त गिरावट से उबरने की कोशिश करती दिखी। पिछले दिन लगभग दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद इस जोड़ी की तीन दिनों की बढ़त की दौड़ रुकने के कगार पर आ गई। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने और दरें बढ़ाने के संकेतों के चलते जापानी येन को समर्थन मिल रहा है। इससे पहले जापान की अति-निम्न ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। अब जब बैंक ऑफ जापान नीतिगत सख्ती की तैयारी में है, यह पुराना लाभ एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोना और ब्याज दरों का फैसला
गुरुवार को सोने की कीमतों में भी जोरदार तेजी दर्ज की गई और इसने नए साप्ताहिक उच्चतम स्तर को छू लिया। हालांकि, 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर के करीब इस तेजी को कुछ शुरुआती रुकावट का सामना करना पड़ा। सोने की यह छलांग पिछले तीन दिनों की लगातार गिरावट के बाद आई, जिसे अमेरिकी डॉलर की बढ़त पर लगे ब्रेक और कच्चे तेल की कीमतों में आई कमजोरी से बल मिला।
इस बीच, पश्चिमी केंद्रीय बैंकों ने अपनी ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी मुख्य बैंक दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा, लेकिन मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण में आई तेज गिरावट के बाद उसका संदेश काफी आक्रामक रहा। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सर्वसम्मति से अपनी फेड फंड्स लक्षित सीमा को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत कर दिया। फेडरल रिजर्व ने स्पष्ट किया कि दरों में यह बढ़ोतरी मुद्रास्फीति को उसके 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक समय पर वापस लाने के लिए आवश्यक थी।


















