वैश्विक वित्तीय बाजारों में बुधवार, 9 सितंबर को एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। आने वाली प्रमुख आर्थिक घटनाओं से पहले निवेशकों की सतर्कता के बीच अमेरिकी डॉलर में गिरावट दर्ज की गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे पिछले कारोबारी सत्र के दौरान वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव जारी है, जहां वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल की कीमतें जून की शुरुआत के बाद से अपने उच्चतम स्तर 92.00 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। यूरोपीय कारोबारी सत्र में अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स मिला-जुला रुख दिखा रहे हैं, जबकि कच्चा तेल ऊपरी स्तरों के पास बना हुआ है। बाजारों की नजर अब आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़ों और विभिन्न केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर टिकी हुई है।
जापानी येन की मजबूती से गिरा USD/JPY, बैंक ऑफ जापान की दर बढ़ोतरी की चर्चा तेज
कारोबारी हफ्ते के मध्य में जापानी येन ने विदेशी मुद्रा बाजार में जबरदस्त मजबूती हासिल की है। इस वजह से USD/JPY मुद्रा जोड़ी में गिरावट आई और यह 0.5% टूटकर 153.00 के स्तर के करीब पहुंच गई। जापानी मुद्रा में इस तेजी की मुख्य वजह बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सख्त करने की अटकलें हैं। बाजार विश्लेषक यह कयास लगा रहे हैं कि जापानी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट (0.50%) की बढ़ोतरी करने पर विचार कर सकता है। राबोबैंक के विश्लेषकों का कहना है कि अगर ऐसा कदम उठाया जाता है, तो यह 1989 के बाद पहला ऐसा मौका होगा जब बैंक ऑफ जापान इतनी बड़ी बढ़ोतरी करेगा। 1989 का दौर वह समय था जब जापानी अर्थव्यवस्था अपनी ऐतिहासिक एसेट बबल सीमा पर थी और पहला शीत युद्ध समाप्त होने की ओर था। उस समय अमेरिका ने अपने सहयोगियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्कों का इस्तेमाल कर प्लाजा एकॉर्ड जैसे समझौते किए थे।
इसके अलावा, हाल ही में आए रॉयटर्स तानकन (Reuters Tankan) बिजनेस सर्वे के मजबूत आंकड़ों ने भी जापानी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाया है, जिससे बैंक ऑफ जापान के नीतिगत सामान्यीकरण को और बल मिला है। लाइव तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, USD/JPY वर्तमान में 153.31 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 153.85 से नीचे है। 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 24 पर पहुंच गया है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र का संकेत देता है। वहीं मैकडी (MACD) संकेतक -1.29 पर है, जो मंदी के रुख को दर्शाता है। USD/JPY अपनी 20 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (157.92), 50 दिवसीय EMA (159.22) और 200 दिवसीय EMA (157.76) से नीचे बना हुआ है। तकनीकी स्तरों के अनुसार, 152.83 और 152.90 पर मजबूत सपोर्ट मौजूद है, जबकि 153.88 और 160.38 पर प्रतिरोध स्तर (रजिस्टेंस) देखा जा रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर की भूमिका और फेडरल रिजर्व की नीतियां
अमेरिकी डॉलर में आ रही मौजूदा गिरावट को गहराई से समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली में इसकी भूमिका को देखना जरूरी है। अमेरिकी डॉलर न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है, बल्कि कई अन्य देशों में भी यह व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है। वर्ष 2022 के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के कुल विदेशी मुद्रा कारोबार में 88% से अधिक हिस्सेदारी अमेरिकी डॉलर की है, जो औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर प्रति दिन का कारोबार दर्शाती है। दूसरे विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह ली और दुनिया की प्राथमिक रिजर्व मुद्रा बन गया। दशकों तक यह मुद्रा सोने (गोल्ड) द्वारा समर्थित थी, लेकिन 1971 में ब्रिटेन वुड्स समझौते के खत्म होने के बाद गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त कर दिया गया।
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व का मुख्य लक्ष्य मूल्य स्थिरता (मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना) और अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बदलाव करता है। जब महंगाई दर फेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे डॉलर की मांग और कीमत बढ़ती है। इसके विपरीत, जब महंगाई घटती है या बेरोजगारी दर बढ़ती है, तो ब्याज दरों में कटौती की जाती है, जिससे डॉलर पर दबाव बनता है।
अत्यधिक विषम परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व क्वांटिटेटिव इजिंग (QE) जैसी नीतियों का सहारा लेता है। उदाहरण के लिए, 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान जब बैंकों के बीच क्रेडिट फ्लो रुक गया था, तब फेडरल रिजर्व ने नए डॉलर छापकर वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदे थे। इस प्रक्रिया से बाजार में नकदी तो बढ़ी, लेकिन डॉलर कमजोर हुआ। इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) में केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व हो चुके बॉन्ड के पैसे को दोबारा निवेश नहीं करता, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है।
सोने में तेजी, 4400 डॉलर के पार पहुंचा भाव और डीजल क्रैक स्प्रेड का रिकॉर्ड
अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और जापानी येन में आई मजबूती का सीधा असर कमोडिटी बाजार पर दिखाई दे रहा है। सोने ने पिछले तीन दिनों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए एक बार फिर वापसी की है। बुधवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले सोने का भाव तेजी के साथ 4,400 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को पार कर गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में भी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें 92.00 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर दिख रही हैं, लेकिन रिफाइंड ईंधन बाजार एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है। अमेरिका का डीजल क्रैक स्प्रेड (अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI क्रूड के बीच का अंतर) हाल ही में इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। कारोबारी सत्र के दौरान यह 102.00 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को छू गया। यह बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्षमता की कमी और औद्योगिक ईंधन की भारी मांग को दर्शाती है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महंगाई का दबाव बना हुआ है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति और चीनी आर्थिक आंकड़ों का असर
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD मुद्रा जोड़ी 0.7200 के स्तर से ऊपर स्थिर बनी रही। चीन से आए मुद्रास्फीति के आंकड़ों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) दोनों में उम्मीद से ज्यादा तेजी देखी गई। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर नकारात्मक असर नहीं पड़ा, क्योंकि बाजार में यह धारणा मजबूत हो रही है कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) अपनी ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी कर सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में सख्त मौद्रिक नीति की संभावनाओं और अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की है। हालांकि, निवेशक इस सप्ताह के अंत में जारी होने वाले अमेरिका के मुद्रास्फीति आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इन आंकड़ों से फेडरल रिजर्व के भविष्य के कदमों का स्पष्ट संकेत मिलेगा, जिसके बाद ही बाजार में नई दिशा तय होगी।
पाई नेटवर्क (PI) में रिकवरी, डेवलपर इकोसिस्टम पर ध्यान केंद्रित
डिजिटल एसेट और क्रिप्टो बाजार की बात करें तो पाई नेटवर्क (PI) में बुधवार को सकारात्मक रुख देखने को मिला और इसका भाव 0.098 डॉलर से ऊपर निकल गया। इस हफ्ते की शुरुआत में पाई नेटवर्क ने अपने 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के पास मजबूत सपोर्ट हासिल किया था, जिसके बाद यह रिकवरी संभव हुई है। पाई कोर टीम ने नेटवर्क पर एप्लिकेशन स्तर की उपयोगिता को बढ़ाने के लिए अपने डेवलपर इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया है। टीम का मानना है कि नए उपयोग के मामलों और विकेंद्रीकृत एप्लिकेशनों के विकास से नेटवर्क को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और इसके उपयोगकर्ता आधार में वृद्धि होगी।



















