वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजारों में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी और ईरान के बीच बढ़ते टकराव तथा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जल्द न खुलने की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
ब्रेंट क्रूड में बहुप्रतीक्षित उछाल
डॉयचे बैंक के हेनरी एलेन और उनके सहयोगियों द्वारा साझा किए गए विश्लेषण के अनुसार, जुलाई के बाद यह पहली बार है जब ब्रेंट ऑयल का भाव सौ डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं कि तेल की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं, जिसका असर छह महीने के ब्रेंट फ्यूचर्स पर भी साफ दिखाई दे रहा है और वे जून की शुरुआत के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।
बाजार में उठापटक और अमेरिकी-ईरान संघर्ष
बाजार में मंदी और मुद्रास्फीति की दोहरी मार यानी स्टैगफ्लेशन की आशंकाएं गहरी होती जा रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल के सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकलने के बाद बाजार में लगातार हलचल बनी हुई है। इस पूरी तेजी के पीछे का मुख्य उत्प्रेरक हालिया अमेरिकी-ईरान हमले रहे हैं, जिनके कारण इस बात पर संशय गहरा गया है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का रास्ता निकट भविष्य में दोबारा खुल पाएगा या नहीं। इसके अलावा, एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आया कि व्हाइट हाउस के सलाहकारों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह बात निजी तौर पर उठाई थी कि यह युद्ध उनके पूरे कार्यकाल के दौरान भी चल सकता है। इन तमाम घटनाक्रमों के बीच बाजार बंद होने तक ब्रेंट क्रूड में 3.36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 101.21 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो मई के बाद से इसका सबसे ऊंचा स्तर है।
दीर्घकालिक अनुबंधों और अन्य मुद्राओं की स्थिति
निवेशक अब इस बात का भी अनुमान लगाने लगे हैं कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें एक लंबे दौर तक कायम रहेंगी। यही वजह है कि छह महीने के ब्रेंट फ्यूचर्स में भी 1.55 प्रतिशत की तेजी आई और यह 86.09 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जून की शुरुआत के बाद से इसका सर्वोच्च स्तर है। वहीं दूसरी ओर, एशियाई सत्र के दौरान अन्य प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों की चाल में भी मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के बीच ऑस्ट्रेलियन डॉलर 14 मई के बाद से अपने उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है। हालांकि फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और अमेरिकी-ईरान तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर को भी समर्थन मिल रहा है।
प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों का हाल
जापानी येन को बैंक ऑफ जापान की तरफ से मिल रहे सख्त संकेतों का समर्थन मिल रहा है, जिसके चलते जापानी मुद्रा इस सप्ताह के शुरुआती दिनों में छुए गए अपने सात महीने के निचले स्तर के आसपास स्थिर बनी हुई है। इसके साथ ही, सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली के दबाव को कम किया है। दूसरी तरफ, सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी है और यह चार हजार चार सौ डॉलर से नीचे के स्तर से रिकवर होकर ऊपर की ओर बढ़ रहा है, हालांकि अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इंतजार कर रहे निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल है। इसके अलावा, विकेन्द्रीकृत एक्सचेंज रेडियम और यूरोपीय केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों से जुड़े घटनाक्रम भी वैश्विक वित्तीय बाजारों पर अपना असर छोड़ रहे हैं।



















