नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के शुरू होने में अब 48 घंटे से भी कम समय शेष रह गया है, लेकिन इसके बावजूद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस स्थिति की मुख्य वजह यह है कि भारत और चीन दोनों ही देशों के विदेश मंत्रालयों की तरफ से इस यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक बयान या जानकारी साझा नहीं की गई है। हालांकि, विभिन्न माध्यमों से सामने आ रही चर्चाओं और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि शी जिनपिंग का नई दिल्ली आना लगभग तय माना जा रहा है।
बीजिंग की तरफ से इस संबंध में क्या कहा गया है, यह भी स्पष्ट हो गया है। चीन ने बीते गुरुवार को यह बयान दिया था कि शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे को लेकर उनके पास इस समय कोई नया अपडेट उपलब्ध नहीं है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह प्रतिष्ठित ब्रिक्स सम्मेलन आगामी 12 और 13 सितंबर को राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीते 8 सितंबर को यह स्पष्ट किया था कि बीजिंग इस संगठन के भीतर होने वाले सहयोग को अत्यधिक महत्व देता है और इस वर्ष आयोजित हो रहे नेताओं के इस शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों का पूरी तरह समर्थन करता है।
चीन के प्रतिनिधिमंडल और नेतृत्व पर स्थिति
चीनी विदेश मंत्रालय की एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब पत्रकारों ने यह सवाल पूछा कि इस वैश्विक सम्मेलन में चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन करेगा, तो प्रवक्ता माओ निंग ने टालमटोल भरा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यदि इस विषय पर कोई भी नया अपडेट सामने आता है, तो बीजिंग की तरफ से समय पर जानकारी दी जाएगी और उन्होंने संवाददाताओं से धैर्य रखने का आग्रह किया। माओ निंग ने अपने बयान में दोहराया कि जब भी कोई आधिकारिक जानकारी होगी, उसे साझा किया जाएगा।
भले ही राजनयिक हलकों में शी जिनपिंग के दिल्ली आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन चीनी पक्ष ने अभी तक आधिकारिक रूप से उनके इस कार्यक्रम में शामिल होने पर मुहर नहीं लगाई है। विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में शामिल होने की प्रबल संभावना है और यदि वह आते हैं, तो यह पिछले सात वर्षों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब भारतीय राजधानी दिल्ली दुनिया भर के कई शीर्ष नेताओं के स्वागत की व्यापक तैयारियों में जुटी हुई है, जिनमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम भी शामिल है।
शीर्ष नेताओं के आगमन का संभावित कार्यक्रम
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आगामी 11 सितंबर को भारत पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 सितंबर को देश की राजधानी में कदम रखने की संभावना है। पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों की कार्यशैली इसके बिल्कुल विपरीत होती है, जो अमूमन अपने राष्ट्राध्यक्षों के विदेश दौरों का विस्तृत और पक्का यात्रा कार्यक्रम हफ्तों पहले ही सार्वजनिक कर देते हैं।
इसके विपरीत, चीन का विदेश मंत्रालय किसी भी उच्च स्तरीय यात्रा के शुरू होने से महज कुछ दिन या घंटे पहले ही उसकी आधिकारिक पुष्टि करता है। कई बार तो ऐसा देखा गया है कि चीन के भीतर होने वाली विशिष्ट आंतरिक गतिविधियों या नेताओं की घरेलू यात्राओं की आधिकारिक सूचना भी वहां का सरकारी मीडिया तभी जारी करता है जब नेता या तो संबंधित स्थान पर पहुंच चुके होते हैं या फिर उनका दौरा समाप्त हो चुका होता है। यही कारण है कि भारत में होने वाले इस आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे बड़े और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान भी चीनी अधिकारी अक्सर आखिरी क्षण तक राष्ट्रपति शी जिनपिंग के मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम की अंतिम पुष्टि करने से बचते हैं।



















