तुर्की की अर्थव्यवस्था और वहां की मुद्रा को लेकर मौद्रिक नीतियों पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि तुर्की के केंद्रीय बैंक यानी सेंट्रल बैंक ऑफ द रिपब्लिक ऑफ तुर्की द्वारा वन-वीक रेपो रेट को 37.0% पर बरकरार रखने की पूरी संभावना है। हालांकि, केवल औपचारिक ब्याज दर पर नजर रखने से बाजार की असली तस्वीर सामने नहीं आती है, क्योंकि बाजार में वास्तविक मौद्रिक स्थितियों को तय करने में लिक्विडिटी टूल्स और अन्य वित्तीय उपकरण कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लिक्विडिटी प्रबंधन और तकनीकी सामान्यीकरण
मध्य पूर्व संघर्ष की शुरुआत के बाद से, तुर्की के केंद्रीय बैंक ने वन-वीक रेपो फंडिंग को काफी हद तक बंद रखते हुए अपनी अधिकांश फंडिंग को 40% की ओवरनाइट लेंडिंग फैसिलिटी की तरफ मोड़ दिया था। लेकिन बाद में 24 अगस्त को बैंक ने दोबारा वन-वीक रेपो नीलामियों की शुरुआत कर दी। इस कदम से प्रभावी फंडिंग लागत वापस 37.0% के स्तर के करीब आ गई। हालांकि इसे तकनीकी सामान्यीकरण का नाम दिया जा रहा है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह मौद्रिक नरमी यानी मौद्रिक सहजता के रूप में सामने आया है।
लीरा पर बढ़ता दबाव और महंगाई के आंकड़े
इस तकनीकी बदलाव का असर तुरंत देखने को मिला और आने वाले दिनों में तुर्की लीरा की गिरावट की रफ्तार तेज हो गई। यदि आने वाले समय में फंडिंग के मोर्चे पर जरा सी भी नरमी बरती जाती है, लिक्विडिटी प्रबंधन को और ढीला किया जाता है, या ऐसे संकेत दिए जाते हैं कि असाधारण सख्ती को वापस लिया जा रहा है, तो इससे लीरा की विनिमय दर पर और अधिक दबाव पड़ना तय है। देश में महंगाई के जो रुझान चल रहे हैं, वे किसी भी प्रकार की मौद्रिक नरमी की गुंजाइश नहीं देते हैं। अगस्त महीने में मौसमी रूप से समायोजित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई में मासिक आधार पर 2.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो कि जुलाई के आंकड़ों के समान ही थी। इसके अलावा, कोर बी और कोर सी सूचकांक 2.0% की मासिक दर से आगे बढ़ रहे थे, जबकि सेवा क्षेत्र में महंगाई का दबाव 2.9% की तेज रफ्तार के साथ कहीं अधिक बना हुआ था।
वैश्विक बाजारों में अन्य मुद्राओं और जिंसों का हाल
इस बीच, एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियन डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय जोड़ी यानी AUD/USD 0.7200 के स्तर से ऊपर समेकित कारोबार करती नजर आई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों के बीच यह मुद्रा अपनी हालिया ऊंचाई के करीब बनी हुई है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख की उम्मीदों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अमेरिकी डॉलर को कुछ हद तक समर्थन प्रदान किया है, जिससे इस करेंसी जोड़े की तेजी सीमित हो गई है। अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इंतजार कर रहे व्यापारी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
दूसरी ओर, जापानी येन के मोर्चे पर भी स्थितियां दिलचस्प बनी हुई हैं। एशियाई सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई 153.50 के स्तर से ऊपर स्थिर जरूर हुआ, लेकिन यह इस सप्ताह के शुरुआती दिनों में छुए गए अपने सात महीने के निचले स्तर के आसपास ही मंडरा रहा है। बैंक ऑफ जापान की नीतियों में संभावित बदलाव की उम्मीदें जापानी येन को मजबूत आधार दे रही हैं, जबकि अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों से पहले डॉलर की बिकवाली के दबाव में कुछ कमी आई है। इसके अलावा, सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है और यह 4,400 डॉलर प्रति औंस से नीचे के स्तर से रिकवर होकर ऊपर की ओर बढ़ रहा है, हालांकि अमेरिकी मुद्रास्फीति रिपोर्ट से पहले खरीदार सतर्कता बरत रहे हैं।



















