विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड और यूरो के बीच की चाल पर विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई है। मौजूदा समय में EUR/GBP का जोड़ा 0.8550 से 0.8560 के दायरे के आसपास फिसल गया है। इस हालिया हलचल के पीछे मुख्य वजहें यूरो के शुरुआती प्रीमियम का कम होना और वैश्विक बॉन्ड बाजार में स्थिरता का लौट Trough माना जा रहा है। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि जैसे-जैसे बॉन्ड बाजार में शांति स्थापित होगी, यह मुद्रा जोड़ा एक बार फिर कम उतार-चढ़ाव वाले माहौल में शॉर्ट-तेजी के ब्याज दर अंतर का बारीकी से पीछा करना शुरू कर देगा।
ब्याज दरों के मोर्चे पर क्या हैं उम्मीदें
बाजार के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड की तरफ से अब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें जरूरत से ज्यादा आक्रामक आंकी जा रही थीं। इसी नज़रिया बदलाव के चलते आने वाले महीनों में पाउंड के मुकाबले यूरो की स्थिति मजबूत होने की पूरी संभावना है। विशेषज्ञों का यह भी अनुमान है कि आने वाले समय में यह मुद्रा जोड़ा ऊपर की ओर बढ़कर 0.870 के स्तर को छू सकता है, क्योंकि पाउंड के मोर्चों पर नरम रुख का असर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
वैश्विक बाजारों और अन्य मुद्राओं का हाल
व्यापक आर्थिक मोर्चे पर अन्य प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों की चाल भी काफी सुस्त और सतर्क बनी हुई है। यूरोपीय सत्र के दौरान GBP/USD की जोड़ी में हल्की बढ़त देखी गई और यह 1.3650 के करीब कारोबार करती नजर आई। डॉलर की रिकवरी में उस समय बाधा उत्पन्न हुई जब ईरान पर लगाए गए नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदें फिर से जाग उठीं। ऐसी खबरें सामने आईं कि पाकिस्तान ईरान के समक्ष घेराबंदी को समाप्त करने और समझौता ज्ञापन के तहत प्रतिबंध हटाने का एक प्रस्ताव लेकर आगे बढ़ रहा है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी का प्रदर्शन
दूसरी ओर सोने की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है और यूरोपीय सत्र के शुरुआती हिस्से में पीली धातु 4,650 डॉलर के नीचे कमजोर रुख के साथ टिके रहने की कोशिश कर रही है। हालांकि, बिकवाली के भारी दबाव में तुरंत निरंतरता न दिखने के कारण निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है ताकि $4,700 के आसपास के उच्चतम स्तर से आई इंट्राडे गिरावट का आकलन सही से किया जा सके। इसके विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन ने अपनी बढ़त को आगे बढ़ाते हुए 80,000 डॉलर के स्तर को पार कर लिया है। पिछले तीन वर्षों में यह इसका सबसे मजबूत साप्ताहिक उछाल माना जा रहा है, जिसे संस्थागत निवेशकों की जबरदस्त मांग और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में लगातार सकारात्मक inflows का समर्थन मिल रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी और नीतिगत बदलाव
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया है, जिस पर बाजार के हर बड़े निवेशक की नजर टिकी हुई है। ट्रेजरी विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह 10-वर्षीय से 20-वर्षीय और 20-वर्षीय से 30-वर्षीय क्षेत्रों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशंस के आकार को कम से कम दोगुना करने जा रहा है। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक लागू रहेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य बाजार में नकदी के प्रवाह को बेहतर बनाए रखना है।



















