कनाडाई डॉलर और वहां की वास्तविक अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी ऑटो टैरिफ की संभावित मार को लेकर कॉमर्जबैंक के माइकल फिस्टर्ड ने गहन विश्लेषण पेश किया है। इस पूरे संकट की गंभीरता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी-मेक्सिको-कनाडा समझौते यानी USMCA का संरक्षण इन उपायों पर लागू होता है या नहीं। इसके बावजूद, विश्लेषक का यह तर्क है कि यदि प्रभावी शुल्क वृद्धि सीमित भी रहती है, तब भी बाजार में बढ़ता नकारात्मक माहौल कनाडा की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। चूँकि इन आर्थिक नीतियों की घोषणा वर्ष 2027 से काफी पहले कर दी गई है, इसलिए यह संभावना जताई जा रही है कि इस साल के खत्म होने से पहले दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के जरिए कोई ठोस समझौता हो सकता है।
टैरिफ दरों में दोगुना इजाफा और निर्यात पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा हाल ही में घोषित किए गए कदम को मानक के लिहाज से काफी संयमित माना जा रहा है। योजना के मुताबिक, आगामी 1 जनवरी 2027 से कारों पर लगने वाले आयात शुल्क को मौजूदा 25% से बढ़ाकर सीधे 50% कर दिया जाएगा। इस कड़े फैसले से अमेरिका को होने वाले कुल कनाडाई निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा। तुलनात्मक रूप से देखें तो शनिवार को लागू हुए शुल्क केवल लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के सामानों को ही कवर करते थे, जबकि नए और सख्त प्रावधानों का दायरा काफी व्यापक होने की उम्मीद है।
विभिन्न परिदृश्य और USMCA सुरक्षा की भूमिका
तैयार किए गए विभिन्न परिदृश्यों के आधार पर इस बात का आकलन किया जा रहा है कि इसका परिणाम कितना गंभीर होगा। यदि USMCA का सुरक्षा कवच नहीं मिलता है, तो नुकसान बहुत अधिक होगा और शुल्क में होने वाली यह वृद्धि पिछले साल की कुल वृद्धि के आंकड़े को भी पार कर जाएगी। दूसरी ओर, यदि USMCA का संरक्षण लागू रहता है, तो स्थिति थोड़ी संभाली जा सकती है, हालांकि उस परिस्थिति में भी कनाडा को कई तरह की व्यापारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव और आर्थिक मंदी की आशंका
इस साल अप्रैल के महीने में विश्लेषकों ने यह साबित किया था कि किसी भी बाजार में शुल्क वृद्धि के वास्तविक आंकड़ों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण वहाँ का प्रचलित माहौल या भावना होती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि कनाडाई अर्थव्यवस्था को भारी आघात पहुँच सकता है, भले ही प्रभावी टैरिफ दर में बहुत मामूली बढ़ोतरी दर्ज की जाए। जब बाजार में निराशा और अनिश्चितता का माहौल बनता है, तो व्यापारिक गतिविधियाँ और निवेश सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ता है.
बातचीत की गुंजाइश और कूटनीतिक उम्मीदें
इस कठिन परिस्थिति के बीच राहत की एक छोटी सी उम्मीद भी नजर आ रही है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा नए शुल्कों की घोषणा काफी समय पहले कर दी गई है, जिसके पीछे मुख्य उद्देश्य संभवतः कूटनीतिक वार्ताओं और समझौतों के लिए पर्याप्त समय देना हो सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में इस बात पर भी विस्तार से चर्चा की है कि अमेरिका अपनी जरूरत के लिए कनाडाई एल्युमीनियम आयात पर किस हद तक निर्भर है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि साल के अंत तक दोनों देश किसी पारस्परिक समझौते पर पहुँच सकते हैं।
वैश्विक मुद्रा बाजारों और कमोडिटी की स्थिति
व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार में विभिन्न मुद्राओं की चाल पर भी इसका असर दिख रहा है। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य करेंसियां अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। यूरोपीय सत्र के दौरान डॉलर की रिकवरी में कुछ सुस्ती देखी गई है, जबकि मध्य पूर्व के घटनाक्रम और कूटनीतिक प्रयासों की खबरों के कारण निवेशकों का रुख बदल रहा है। दूसरी ओर, सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है और वह शुरुआती सत्रों में एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, क्योंकि ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं अभी भी बाजार में बनी हुई हैं। इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन ने शानदार तेजी दर्ज करते हुए पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है और संस्थागत मांग के समर्थन से यह मजबूत स्थिति में है।



















