वैश्विक मुद्रा बाजारों में इस हफ्ते की शुरुआत के साथ ही ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी रिकवरी को आगे बढ़ाया है। यूरोपीय सत्र में कारोबार के दौरान यह प्रमुख मुद्रा जोड़ी लगभग 1.3350 के आसपास ट्रेड करती हुई नजर आई। पिछले तीन हफ्तों के निचले स्तर से शुक्रवार को शुरू हुई मामूली रिकवरी को सोमवार को भी अच्छा सपोर्ट मिला, जिससे लगातार दूसरे सत्र में भी इसमें बढ़त दर्ज की गई है। इस मूवमेंट के पीछे मुख्य वजहें मध्य पूर्व के संघर्ष में ठहराव आना और अमेरिकी डॉलर का व्यापक स्तर पर कमजोर पड़ना हैं। ट्रेडर्स अब इस सप्ताह के अंत में आने वाले केंद्रीय बैंकों के बयानों और नीतिगत घोषणाओं पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं।
राजकोषीय नीतियां और नीतिगत अपेक्षाएं
विशेषज्ञों के दृष्टिकोण से देखें तो आने वाले समय में देश का राजकोषीय नजरिया मौद्रिक नीति की उम्मीदों को दिशा देने में एक अहम भूमिका निभाएगा। नई सरकार ने पहले ही कई ऐसे कदम उठाए हैं जो राहत देने वाले हैं, और इसके साथ ही चौथी तिमाही के शुरुआती हफ्तों में एक बड़े वित्तीय पैकेज की भी तैयारी है। इस पूरी रूपरेखा का मुख्य उद्देश्य टैक्स की सीमा को बढ़ाना है, ताकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान राजकोषीय खिंचाव के असर को संतुलित किया जा सके और अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिल सके।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के रुख और ब्याज दरों का अनुमान
मौजूदा बाजार भावों को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि इस साल के अंत तक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा लगभग 42 आधार अंकों की सख्ती का अनुमान लगाना कुछ ज्यादा लग सकता है, हालांकि विकास के मोर्चे पर अप्रत्याशित आंकड़े पाउंड की स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत पर ही बनाए रखने की उम्मीद है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा दो सदस्य इसके विरोध में असहमति जता सकते हैं।
भले ही हेडलाइन महंगाई के मोर्चे पर जोखिम थोड़ा बढ़ गया हो, लेकिन मौद्रिक नीति समिति का मुख्य ध्यान नरम पड़ती हुई महंगाई पर ही टिका हुआ है। बैंक के गवर्नर एंड्रयू बेली लगातार यह बात जोर देकर कह रहे हैं कि देश में वेतन वृद्धि की रफ्तार भी अब धीमी पड़ रही है, जो आर्थिक संतुलन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण संकेत है।
यूरो और व्यापक बाजार का परिदृश्य
ब्रिटिश पाउंड के साथ-साथ यूरो भी यूरोपीय सत्र के दौरान मजबूत बना हुआ है और यह 1.1400 के अहम स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। दिन के समय आई इस मजबूती को मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर की कमजोरी से बल मिला है, क्योंकि पांच महीने पुराने अमेरिका-ईरान संघर्ष को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट सुधरा है।



















