सोमवार के कारोबारी सत्र में यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो में शुरुआती बढ़त कमजोर पड़ गई और यह 1.1400 के महत्वपूर्ण आंकड़े से नीचे आ गई। डॉलर सूचकांक में आई तेजी के कारण प्रमुख करेंसी जोड़े में यह नरमी दर्ज की गई है। शुरुआती घंटों में बाजार में जो सकारात्मक माहौल बना था, वह अमेरिकी अधिकारियों के बفनों के बाद फीका पड़ गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों को पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल फिर से गहरा गया है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ईरान का रुख
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने जानकारी दी कि सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ फिलहाल कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है। कूटनीतिक वार्ताओं के अभाव ने बाजार में भू-राजनीतिक जोखिमों को जिंदा रखा है। इस स्थिति के कारण अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ तेल की कीमतों में भी गिरावट के दायरे सीमित बने हुए हैं। निवेशक और व्यापारी दोनों ही पक्षों की हर गतिविधि पर बारीक नजर बनाए हुए हैं ताकि यह अंदाजा लगाया जा सके कि आने वाले दिनों में यह तनाव किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई की चिंता
ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल अपने दिन के निचले स्तर 81.28 डॉलर से उबरकर लगभग 83.20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद, यह दैनिक आधार पर 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ संघर्ष कर रहा है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें वैश्विक स्तर पर महंगाई के जोखिमों को हवा दे रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति से अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव फिर से बन सकता है, जिससे वित्तीय बाजारों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
फेडरल रिजर्व का आगामी निर्णय और बाजार के अनुमान
बुधवार को आने वाले फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले को लेकर वित्तीय गलियारों में हलचल तेज है। हालांकि यह व्यापक रूप से माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक इस बार दरों को स्थिर रख सकता है, लेकिन सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े बताते हैं कि व्यापारी अभी भी दरों में बढ़ोतरी की 33 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं। इसके अलावा, सितंबर के महीने में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना करीब 79 प्रतिशत तक आंकी जा रही है। डीबीएस ग्रुप रिसर्च के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि फेडरल रिजर्व के सामने इस समय एक बेहद कठिन परिस्थिति है। उनके अनुसार, जिद्दी मुद्रास्फीति दरों में बढ़ोतरी की वकालत कर रही है, जबकि सुस्त मांग, कमजोर निवेश, सुस्त वेतन वृद्धि और भारी कर्ज के बोझ के कारण दरों को फिलहाल मौजूदा स्तर पर ही रोके रखना ही उचित प्रतीत होता है।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक का रुख और आगामी आर्थिक आंकड़े
अटलांटिक महासागर के दूसरी ओर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने पिछले सप्ताह ही अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया था और यह दोहराया था कि भविष्य की नीतियां पूरी तरह से आने वाले आंकड़ों और मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण पर निर्भर करेंगी। इसी कड़ी में, व्यापारी शुक्रवार को जारी होने वाले जुलाई महीने के शुरुआती यूरो क्षेत्र के कोर हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेस यानी एचआईसीपी आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इन आंकड़ों से यह साफ होने की उम्मीद है कि यूरोजोन में महंगाई किस गति से आगे बढ़ रही है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं और सर्राफा बाजार की स्थिति
विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में, पाउंड स्टर्लिंग यानी जीबीपी/यूएसडी भी सोमवार के दूसरे पहर में अपनी दिशा बदलते हुए 1.3300 के आसपास लाल निशान में कारोबार करता नजर आया। हफ्ते की शुरुआत इसने मजबूती के साथ की थी। मध्य पूर्व के संघर्ष में आए अस्थायी ठहराव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने डॉलर की बढ़त को सीमित किया है और इस करेंसी जोड़े को फिलहाल के लिए संभलने का मौका दिया है। इसके विपरीत, पीली धातु यानी सोना मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, हालांकि यह सोमवार को शुरुआती घंटों में 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आंकड़े को पार करने के बाद थोड़ा नीचे आ गया है। सोने की कीमतों में यह दैनिक तेजी अमेरिकी डॉलर की अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित अस्थायी युद्धविराम की उम्मीदों के बीच आई है।

















