नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में ब्रिटिश पाउंड डॉलर के मुकाबले सकारात्मक रुख के साथ आगे बढ़ रहा है, हालांकि इसमें बड़ी छलांग लगाने की गुंजाइश अभी सीमित नजर आ रही है। एशियाई सत्र के दौरान यह जोड़ी 1.3550 के मध्य स्तर के नीचे कारोबार कर रही है, जो पिछले सप्ताह के भारी नुकसान की भरपाई की कोशिश तो है लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इस स्तर पर सतर्कता बरतने की जरूरत है। इस महीने की शुरुआत में मुद्रा ने फरवरी के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छुआ था, जिसके बाद से आई गिरावट पर पूरी तरह विराम लगाने से पहले निवेशकों को बाजार के अगले संकेतों का इंतजार करना चाहिए।
मध्य पूर्व का तनाव और डॉलर की मजबूती
मध्य पूर्व में गहराते संकट के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर दो ईरानी लॉन्चर्स पर कार्रवाई की है। इसके जवाब में ईरान ने तेहरान, लोरेस्तान, करज, खोर्रमबाद और शिراز से बैलिस्टिक मिसाइलें तथा दक्षिणी ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें दागी हैं। इस भू-राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर से बाजार में रिस्क प्रीमियम को बढ़ा दिया है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर के खरीदार मजबूत स्थिति में आ गए हैं। इसके अलावा सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं ने भी डॉलर को जरूरी समर्थन दिया है।
इस हफ्ते आने वाले अहम अमेरिकी आंकड़े
नया महीना शुरू होते ही निवेशकों की निगाहें इस सप्ताह आने वाले प्रमुख अमेरिकी मैक्रो-इकोनॉमिक आंकड़ों पर टिकी हैं, जिनमें शुक्रवार को आने वाली नॉनफार्म पेरोल्स रिपोर्ट सबसे अहम है। मौजूदा बुनियादी माहौल को देखते हुए डॉलर के लिए ऊपर की ओर बढ़ने का रास्ता सबसे आसान नजर आ रहा है, इसलिए ब्रिटिश पाउंड में तेजी का दांव लगाने से पहले ट्रेडर्स को जोखिम का आकलन कर लेना चाहिए। तकनीकी मोर्चे पर यदि गिरावट आती है, तो पहली महत्वपूर्ण सपोर्ट लाइन 38.2% फिबोनाची रीट्रेसमेंट स्तर 1.3521 पर है, जिसके बाद 50.0% स्तर 1.3474 और 61.8% स्तर 1.3427 पर मजबूत आधार मौजूद हैं, जबकि 78.6% रीट्रेसमेंट स्तर 1.3360 पर एक दूर का बेस बनता है।
पाउंड स्टर्लिंग का वैश्विक महत्व और मुख्य जोड़े
ब्रिटिश पाउंड दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा है जिसे 886 ईस्वी से मान्यता प्राप्त है और यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। वर्ष 2002 के आंकड़ों के अनुसार यह विदेशी मुद्रा बाजार में दुनिया की चौथी सबसे ज्यादा कारोबार करने वाली मुद्रा है, जिसकी हिस्सेदारी सभी लेन-देन में 12% है और इसका दैनिक औसत कारोबार 630 अरब डॉलर है। इसके मुख्य ट्रेडिंग जोड़ों में पाउंड स्टर्लिंग और अमेरिकी डॉलर का जोड़ा शामिल है जिसे केबल भी कहा जाता है और यह विदेशी मुद्रा बाजार का 11% हिस्सा संभालता है। इसके अलावा पाउंड और जापानी येन का जोड़ा जिसे ट्रेडर ड्रैगन कहते हैं (3%), तथा यूरो और पाउंड का जोड़ा (2%) प्रमुखता से कारोबार में रहते हैं। पाउंड स्टर्लिंग को बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा जारी किया जाता है।
मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का प्रभाव
पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। बैंक अपने मुख्य लक्ष्य यानी मूल्य स्थिरता को बनाए रखने के लिए मुद्रास्फीति की दर को लगभग 2% पर स्थिर रखने का प्रयास करता है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए बैंक ब्याज दरों में बदलाव करता है। जब महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके उसे नियंत्रित करने की कोशिश करता है, जिससे लोगों और व्यवसायों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। यह स्थिति आमतौर पर पाउंड के लिए सकारात्मक होती है क्योंकि ऊंची ब्याज दरें ब्रिटेन को वैश्विक निवेशकों के लिए अपनी पूंजी लगाने का एक आकर्षक केंद्र बनाती हैं। इसके विपरीत जब महंगाई बहुत नीचे गिर जाती है, तो यह सुस्त आर्थिक विकास का संकेत होता है और ऐसी स्थिति में बैंक ब्याज दरों में कटौती पर विचार करता है ताकि व्यवसाय सस्ते कर्ज लेकर विकास से जुड़ी परियोजनाओं में निवेश कर सकें।
आर्थिक आंकड़े और व्यापार संतुलन की भूमिका
विभिन्न आर्थिक आंकड़े देश के स्वास्थ्य का पैमाना तय करते हैं और पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को सीधे प्रभावित करते हैं। सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा पीएमआई तथा रोजगार जैसे संकेतक पाउंड की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था पाउंड के लिए फायदेमंद होती है क्योंकि यह न सिर्फ विदेशी निवेश को आकर्षित करती है बल्कि बैंक ऑफ इंग्लैंड को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए भी प्रेरित कर सकती है। इसके अलावा व्यापार संतुलन भी एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है जो किसी देश की निर्यात कमाई और आयात खर्च के अंतर को मापता है। यदि कोई देश अत्यधिक मांग वाली वस्तुएं निर्यात करता है, तो विदेशी खरीदारों की मांग के कारण उसकी मुद्रा को सीधा लाभ मिलता है।
अन्य बाजारों का हाल और हालिया रुझान
विस्तृत बाजार पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर को इस सप्ताह की शुरुआत से ही लाभ मिल रहा है, और जैक्सन होल संगोष्ठी में अध्यक्ष केविन वार्श के आक्रामक भाषण के बाद डॉलर की स्थिति और मजबूत हो गई है। दूसरी ओर यूरो में भी कमजोरी देखी जा रही है और यह सप्ताह के अंत तक सात दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया है। सोने की कीमतें एशियाई सत्र में सोमवार को थोड़े सुधार के साथ डेढ़ सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर आने की कोशिश कर रही हैं लेकिन बड़ी रिकवरी मुश्किल लग रही है। इसके अलावा तेल बाजार में भले ही कुछ नरमी दिख रही हो, लेकिन डीजल का बाजार अलग ही कहानी कह रहा है और अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर 102 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को छू चुका है।



















