पर्यावरणविद् भवरीन कंधारी ने नेपाल में हाल ही में आई अचानक बाढ़ की घटना पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक बड़ी चेतावनी करार दिया है। उनका कहना है कि इस आपदा को केवल एक साधारण प्राकृतिक घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह जलवायु संकट, तेजी से पिघलते ग्लेशियरों और हिमालयी क्षेत्र पर मंडराते गंभीर खतरों का स्पष्ट संकेत है। इसके साथ ही उन्होंने चित्रकूट जैसे अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ते जलस्तर का जिक्र करते हुए तत्काल और टिकाऊ विकास योजनाओं पर जोर दिया है।
प्राकृतिक संरचना और इंसानी दखल
एक बातचीत के दौरान भवरीन कंधारी ने स्पष्ट किया कि हिमालय दुनिया की अन्य पर्वत श्रृंखलाओं के मुकाबले काफी युवा है और यह अभी तक पूरी तरह से स्थिर नहीं हो पाई है। इस भौगोलिक स्थिति को अपनी स्थिरता हासिल करने में अभी लाखों साल लग सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं, लेकिन इंसान अपनी हरकतों से स्थिति को और अधिक खतरनाक और विनाशकारी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
बढ़ता तापमान और अंधाधुंध निर्माण
तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के पीछे प्रदूषण और पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में हो रहे भारी निर्माण कार्यों को मुख्य वजह बताया गया है। पहाड़ों की छाती पर होने वाली ब्लास्टिंग और निर्माण गतिविधियों ने हालात को बदतर कर दिया है। इन घटनाओं को सिर्फ प्राकृतिक आपदा कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता, बल्कि जो मानवीय भूलें हो रही हैं, उनमें सुधार लाने की सख्त जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि हिमालय क्षेत्र को साझा करने वाले सभी देशों को इस साझा संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।
विकास के नाम पर हो रही भारी अनदेखी
विभिन्न अध्ययनों और मूल्यांकनों से यह बात पहले ही साफ हो चुकी है कि तापमान तेजी से ऊपर जा रहा है और मौजूदा हालात बेहद नाजुक हैं, जहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं बचती है। कोयले के उत्पादन से लेकर बड़े पैमाने पर हाइड्रोपावर प्लांट बनाने और पहाड़ों पर पर्यटकों की संख्या असीमित रूप से बढ़ाने से कार्बन फुटप्रिंट तेजी से बढ़ रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी इस तरह की लापरवाही और पेड़ों की कटाई वाले कई विकास प्रोजेक्ट्स के बुरे परिणाम पहले ही देखे जा चुके हैं।
भारत और चीन को मिलकर उठाने होंगे कदम
इस संकट से निपटने के लिए सीमाओं से परे जाकर सहयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। भवरीन कंधारी का मानना है कि केवल भारत और नेपाल को ही नहीं, बल्कि चीन को भी इस दिशा में आगे आना होगा। हिमालयी श्रृंखला से जुड़े हर एक देश को आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना चाहिए और समय रहते चेतावनी देने वाले अर्ली वार्निंग सिस्टम तथा अन्य आधुनिक सिग्नलिंग तंत्रों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए।





















