अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड लगातार मजबूत रुख बनाए हुए है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3600 के मध्य स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। हालिया तेजी के बाद यह मुद्रा 11 फरवरी के बाद के अपने उच्चतम स्तर के बेहद करीब पहुंच चुकी है। वैश्विक बाजारों में जारी उथल-पुथल और अमेरिकी ट्रेजरी की नई राजकोषीय योजनाओं के कारण डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है, जिससे पाउंड सहित अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और कीमती धातुओं को मजबूती मिल रही है।
पाउंड की अल्पकालिक और मध्यकालिक चाल का विस्तृत विश्लेषण
अल्पकालिक रुझान की बात करें तो ब्रिटिश पाउंड में पिछले सप्ताह के दौरान काफी हलचल दर्ज की गई। गुरुवार को पाउंड 1.3661 के उच्च स्तर पर पहुंचा था, जिसके बाद इसमें मामूली गिरावट आई। शुक्रवार को जब यह 1.3640 के स्तर पर था, तब विश्लेषकों ने संकेत दिया था कि ओवरबॉट स्थितियों के कारण इसकी बढ़त 1.3600 से 1.3670 के सीमित दायरे में रह सकती है। इसके बावजूद पाउंड 1.3675 तक उछला और अंततः 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1.3644 पर बंद हुआ। मौजूदा कारोबारी सत्र में इसके 1.3620 से 1.3665 के दायरे में रहने का अनुमान है।
मध्यकालिक दृष्टिकोण से, 17 अगस्त को जब पाउंड 1.3540 के स्तर पर था, तभी से इसके सकारात्मक रुख के संकेत मिलने लगे थे। 21 अगस्त को 1.3640 पर पहुंचने के बाद यह संभावना और मजबूत हुई कि पाउंड जल्द ही 1.3700 का स्तर छू सकता है। हालांकि, इस तेजी के बने रहने के लिए पाउंड को 1.3585 का 'मजबूत सपोर्ट' स्तर बनाए रखना होगा। यदि पाउंड इस सपोर्ट स्तर से नीचे फिसल जाता है, तो 1.3700 तक पहुंचने का लक्ष्य अधूरा रह सकता है।
अमेरिकी ट्रेजरी के फैसले का मुद्रा बाजार पर प्रभाव
अमेरिकी डॉलर में जारी इस कमजोरी के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का एक अप्रत्याशित कदम माना जा रहा है। बुधवार को 12:32 GMT पर ट्रेजरी विभाग ने अपनी आधिकारिक समय सारणी से अलग हटकर एक घोषणा की। इसके तहत 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष की अवधि वाले दीर्घकालिक सरकारी ऋणपत्रों (बॉन्ड) की बायबैक सीमा को दोगुना करने का निर्णय लिया गया। पहले यह सीमा प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर थी, जिसे 9 सितंबर से 4 नवंबर के बीच बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बॉन्ड यील्ड में हो रही बढ़ोतरी पर अंकुश लगाना है।
यूरोजोन मुद्रा और सोने के बाजार में भी तेजी
अमेरिकी राजकोषीय कदमों का असर केवल ब्रिटिश पाउंड तक सीमित नहीं है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान EUR/USD जोड़ी में भी लगातार चौथे कारोबारी दिन मजबूती देखी गई और यह 1.1680 के स्तर के आसपास मंडराती रही। डॉलर सूचकांक में सुस्ती का सीधा लाभ यूरोपीय मुद्रा को मिला है।
इसके अलावा, कीमती धातुओं के बाजार में भी जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। एशियाई सत्र में सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार निकलकर अपने तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर की गिरावट के साथ-साथ अमेरिका और कनाडा के बीच उभरते नए व्यापारिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तरफ आकर्षित किया है। बाजार की मौजूदा बुनियादी स्थितियां आने वाले दिनों में भी बुलिश रुझान जारी रहने का संकेत दे रही हैं।


















